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हाथरस : गंगा दशहरा पर खूब उड़ेंगी पतंगें, लड़ेंगे पेच
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हाथरस : एक दुकान पर रखी पतंगें व मांझा।
- फोटो : HATHRAS
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
गंगा दशहरा का पर्व रविवार को मनाया जाएगा। पर्व को लेकर पतंगबाजी के शौकीनों में खासा उत्साह है। बाजार में पन्नी के साथ कागजों की पतंग की लंबी रेंज है। वैसे भी इन-दिनों स्कूल बंद होने के कारण बच्चे शाम को पतंगबाजी में ज्यादा समय बिता रहे हैं। अब दशहरा पर्व के नजदीक आने के साथ ही पतंगों की मांग और बढ़ गई है। बाजार में पांच रुपये से लेकर 50 रुपये कीमत तक की पतंग उपलब्ध हैं। पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार पतंग और मांझे के दाम ज्यादा हैं।
उल्लेखनीय है कि अप्रैल में कोरोना कर्फ्यू के दौरान बाजार बंद रहे थे। ज्यादातर समय लोग घरों में बिता रहे थे। तभी से पतंग और मांझा की मांग दुकानदारों पर आना शुरू हो गई। इस वक्त बाजार में बरेली व चाइनीज मांझा भी उपलब्ध है। गौरतलब है कि हर वर्ष गर्मियों की छुट्टियों में पतंग खूब बिकती हैं, लेकिन इस बार कोरोना संकट के कारण स्कूल पहले से ही बंद चल रहे हैं, इसलिए बच्चों के साथ उनके परिजन भी पतंगबाजी का पूरा लुत्फ उठा रहे हैं।
शहर के ऐतिहासिक किला परिसर स्थित मंदिर श्रीदाऊजी महाराज परिसर में हर रोज शाम को पतंगबाजी के शौकीन पेच लड़ा रहे हैं। इस बार गंगा दशहरा पर्व पर दो दिन की साप्ताहिक बंदी का फायदा भी पतंगबाजी के शौकीनों को मिलेगा। यही वजह है कि इस बार पिछले वर्ष की अपेक्षा पतंगों की खरीदारी ज्यादा हो रही है।
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कोरोना काल के चलते इस बार पतंगों के बाजार में मंदी नहीं है। पन्नी की पतंगों की सबसे ज्यादा मांग है। पन्नी की पतंगों के साथ कागज की पतंगों के कद्रदान भी बहुत हैं। हालांकि इस बार पिछले वर्ष की अपेक्षा पतंग और मांझे के दामों में वृद्धि हुई है।
-विनोद कौशल, पतंग विक्रेता
गंगा दशहरा पर पतंगबाजी की पूरी तैयारी है। दो दिन की साप्ताहिक बंदी में परिवार के साथ पतंगबाजी का पूरा लुत्फ उठाएंगे। स्कूल बंद होने के कारण शाम का समय इन-दिनों पतंग उड़ाकर ही बीत रहा है। इस बार पतंग व मांझा महंगा है।
-आदित्य शर्मा, खरीदार
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गंगा दशहरा का पर्व रविवार को मनाया जाएगा। पर्व को लेकर पतंगबाजी के शौकीनों में खासा उत्साह है। बाजार में पन्नी के साथ कागजों की पतंग की लंबी रेंज है। वैसे भी इन-दिनों स्कूल बंद होने के कारण बच्चे शाम को पतंगबाजी में ज्यादा समय बिता रहे हैं। अब दशहरा पर्व के नजदीक आने के साथ ही पतंगों की मांग और बढ़ गई है। बाजार में पांच रुपये से लेकर 50 रुपये कीमत तक की पतंग उपलब्ध हैं। पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार पतंग और मांझे के दाम ज्यादा हैं।
उल्लेखनीय है कि अप्रैल में कोरोना कर्फ्यू के दौरान बाजार बंद रहे थे। ज्यादातर समय लोग घरों में बिता रहे थे। तभी से पतंग और मांझा की मांग दुकानदारों पर आना शुरू हो गई। इस वक्त बाजार में बरेली व चाइनीज मांझा भी उपलब्ध है। गौरतलब है कि हर वर्ष गर्मियों की छुट्टियों में पतंग खूब बिकती हैं, लेकिन इस बार कोरोना संकट के कारण स्कूल पहले से ही बंद चल रहे हैं, इसलिए बच्चों के साथ उनके परिजन भी पतंगबाजी का पूरा लुत्फ उठा रहे हैं।
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शहर के ऐतिहासिक किला परिसर स्थित मंदिर श्रीदाऊजी महाराज परिसर में हर रोज शाम को पतंगबाजी के शौकीन पेच लड़ा रहे हैं। इस बार गंगा दशहरा पर्व पर दो दिन की साप्ताहिक बंदी का फायदा भी पतंगबाजी के शौकीनों को मिलेगा। यही वजह है कि इस बार पिछले वर्ष की अपेक्षा पतंगों की खरीदारी ज्यादा हो रही है।
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कोरोना काल के चलते इस बार पतंगों के बाजार में मंदी नहीं है। पन्नी की पतंगों की सबसे ज्यादा मांग है। पन्नी की पतंगों के साथ कागज की पतंगों के कद्रदान भी बहुत हैं। हालांकि इस बार पिछले वर्ष की अपेक्षा पतंग और मांझे के दामों में वृद्धि हुई है।
-विनोद कौशल, पतंग विक्रेता
गंगा दशहरा पर पतंगबाजी की पूरी तैयारी है। दो दिन की साप्ताहिक बंदी में परिवार के साथ पतंगबाजी का पूरा लुत्फ उठाएंगे। स्कूल बंद होने के कारण शाम का समय इन-दिनों पतंग उड़ाकर ही बीत रहा है। इस बार पतंग व मांझा महंगा है।
-आदित्य शर्मा, खरीदार