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हाथरस: विदेशों में रहकर राजा महेंद्र प्रताप ने लड़ी आजादी की लड़ाई

Sun, 01 Dec 2019 12:10 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 01 Dec 2019 12:10 AM IST
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Hathras: King Mahendra Pratap fought for freedom while staying abroad
आर्यान पेशवा राजा महेंद्र प्रताप। - फोटो : HATHRAS
जन्मदिन पर विशेष
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विदेशों में रहकर राजा महेंद्र प्रताप ने लड़ी आजादी की लड़ाई
आजादी से पहले की थी हिंद सरकार की स्थापना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हाथरस। विजयी विश्व तिरंगा प्यारा झंडा ऊंचा रहे हमारा ... देश की आजादी के लिए 32 साल तक विदेश में रहकर संघर्ष करने वाले आर्यान पेशवा राजा महेंद्र प्रताप के दिल में इसी तरह का जज्बा और जुनून था। उन्होंने 1915 में हिंद सरकार की स्थापना कर दी थी।
राजा महेंद्र प्रताप का जन्म मुरसान नरेश बहादुर घनश्याम सिंह के यहां एक दिसंबर 1886 में हुआ था। बाद में उन्हें हाथरस नरेश राजा हरनारायण ने गोद ले लिया। मात्र बीस वर्ष की अवस्था में पिता का देहांत होने के बाद हाथरस की विरासत पर राजा महेंद्र प्रताप की ताजपोशी हुई, लेकिन राजा महेंद्र प्रताप के विचार शुरू से ही अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ थे। यही कारण था कि अंग्रेजों ने उन्हें राजा बहादुर की उपाधि नहीं दी।
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राजा साहब हमेशा यह सोचते थे कि क्यों न यह मुल्क अंग्रेजों के चंगुल से आजाद हो। 1914 में जब पूरा यूरोप पहले विश्व युद्ध की आग से जल रहा था तब उन्होंने यह योजना बनाई कि क्यों न विदेश जाकर के स्वाधीनता आंदोलन को मजबूती प्रदान की जाए। वह इसी सिलसिले में देहरादून में पुरुषोत्तम टंडन से मिले। देहरादून से ही राजा महेंद्र प्रताप आजादी के आंदोलन में कूद पड़े। जीवन के 32 साल तक वह देश से निर्वासित रहे और आजादी की लड़ाई लड़ते रहे।
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दस फरवरी 1915 को वह मोहम्मद पीर के छद्म नाम से स्विट्जरलैंड होते हुए बर्लिन पहुंचे। उन्होंने एक दिसंबर 1915 को काबुल में आजाद हिंद सरकार की स्थापना कर दी। इस सरकार ने अफगानिस्तान से राजकीय स्तर पर संबंध स्थापित कर लिए। आजादी के इस योद्धा ने 1957 से लेकर 1962 तक मथुरा लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। 1979 में उनका इंतकाल हो गया। शहर के समाजसेवी शैलेंद्र वार्ष्णेय, गोविंद उपाध्याय ने सरकार से मांग की है कि राजा साहब को भारत रत्न से नवाजा जाए।

1957 में पूर्व पीएम अटल को मथुरा से हराया था चुनाव
हाथरस। आर्यान पेशवा समाज सुधारक थे। उन्होंने एएमयू की स्थापना के लिए जमीन भी दान की थी। यहीं नहीं वर्ष 1909 में उन्होंने वृंदावन में प्रेम महाविद्यालय की स्थापना की। यह तकनीकी शिक्षा का केंद्र था। उन्होंने प्रेम धर्म भी चलाया और इसी नाम से एक राष्ट्रीय पत्र भी निकाला। आजादी के बाद राजा साहब ने कई चुनाव लड़े। 1957 में लोकसभा चुनाव में पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी को मथुरा से चुनाव भी हरा दिया था। इस चुनाव में अटल जी की जमानत जब्त हो गई थी।
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