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हाथरस : कमलासन पर विराजमान मां लक्ष्मी की मूर्ति करें स्थापित
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हिंदू धर्म में माता लक्ष्मी को धन की देवी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि जिस घर में माता लक्ष्मी का वास होता है, वहां कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होती। जीवन में हमेशा सुख-शांति बनी रहती है। जिन लोगों के घर में माता लक्ष्मी की प्रतिमा या मूर्ति होती है और नियमित रूप से उनकी पूजा आराधना की जाती है तो ऐसे लोगों की यश और कीर्ति चारों दिशाओं में फैलती है। विद्वानों की मानें तो धर्म शास्त्रों में माता लक्ष्मी की प्रतिमा की किस तरह पूजा करें, इसके भी नियम हैं।
आचार्य सुरेंद्रनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि धर्म शास्त्रों में माता लक्ष्मी की प्रतिमा को रखने के लिए कुछ नियम हैं। शास्त्रों का मानना है कि मंदिर में देवी लक्ष्मी की मूर्ति को यदि सही दिशा में रखा जाए तो विशेष लाभ प्राप्त होता है। मां लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति मंदिर में हमेशा मां लक्ष्मी की मूर्ति को गणेश जी के दायीं ओर ही रखा जाना चाहिए।
मां लक्ष्मी चंचल होती हैं और खड़ी मूर्ति विराजमान करने से माता ज्यादा देर उस स्थान पर नहीं टिकती हैं, इसलिए कभी भी उनकी मूर्ति या प्रतिमा खड़े अवस्था में नहीं रखना चाहिए। हमेशा कमलासन पर विराजमान माता की मूर्ति स्थापित करें। संभव हो तो कमलासन पर विराजमान माता की मूर्ति स्थापित करें। व्यापारिक प्रतिष्ठान में दायीं ओर सूंड़ वाले गणेशजी की प्रतिमा को विराजमान करें, जिससे व्यापार में खुशहाली आएगी। संवाद
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हिंदू धर्म में माता लक्ष्मी को धन की देवी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि जिस घर में माता लक्ष्मी का वास होता है, वहां कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होती। जीवन में हमेशा सुख-शांति बनी रहती है। जिन लोगों के घर में माता लक्ष्मी की प्रतिमा या मूर्ति होती है और नियमित रूप से उनकी पूजा आराधना की जाती है तो ऐसे लोगों की यश और कीर्ति चारों दिशाओं में फैलती है। विद्वानों की मानें तो धर्म शास्त्रों में माता लक्ष्मी की प्रतिमा की किस तरह पूजा करें, इसके भी नियम हैं।
आचार्य सुरेंद्रनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि धर्म शास्त्रों में माता लक्ष्मी की प्रतिमा को रखने के लिए कुछ नियम हैं। शास्त्रों का मानना है कि मंदिर में देवी लक्ष्मी की मूर्ति को यदि सही दिशा में रखा जाए तो विशेष लाभ प्राप्त होता है। मां लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति मंदिर में हमेशा मां लक्ष्मी की मूर्ति को गणेश जी के दायीं ओर ही रखा जाना चाहिए।
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मां लक्ष्मी चंचल होती हैं और खड़ी मूर्ति विराजमान करने से माता ज्यादा देर उस स्थान पर नहीं टिकती हैं, इसलिए कभी भी उनकी मूर्ति या प्रतिमा खड़े अवस्था में नहीं रखना चाहिए। हमेशा कमलासन पर विराजमान माता की मूर्ति स्थापित करें। संभव हो तो कमलासन पर विराजमान माता की मूर्ति स्थापित करें। व्यापारिक प्रतिष्ठान में दायीं ओर सूंड़ वाले गणेशजी की प्रतिमा को विराजमान करें, जिससे व्यापार में खुशहाली आएगी। संवाद
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