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हाथरस : होली के रंग में महंगाई डालेगी भंग
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हाथरस : होली के लिए एक दुकान पर बिक्री के लिए रखीं पिचकारी, मुखौटे व अन्य सामान। संवाद
- फोटो : HATHRAS
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
होली के त्योहार की रंगत इस बार महंगाई की वजह से फीकी पड़ने वाली है। त्योहार से पहले रिफाइंड, तेल, मैदा, सूजी व आटा के दामों में उछाल आया है तो वहीं रंग, गुलाल व पिचकारी के दाम भी पिछले साल की अपेक्षा बढ़े हुए हैं। इससे लोगों की जेब पर बोझ बढ़ने वाला है।
कोरोना काल की वजह से फैक्टरियां बंद थीं। इस वजह से रंग, गुलाल आदि का उत्पादन अपेक्षाकृत नहीं हो पाया। अब कोरोना से लोगों को काफी राहत मिली है तो रंग और गुलाल की मांग बढ़ गई। वहीं उत्पादन कम होने की वजह से दाम बढ़ गए हैं। रंग और गुलाल के लिए स्टार्च की जरूरत होती है। इसके मूल्य में भी वृद्धि होने से रंग और गुलाल पर इसका अभी असर पड़ेगा। संवाद
पिचकारी के दाम में लगभग 20 फीसदी की वृद्धि
जिले में पिचकारी दिल्ली, आगरा व अन्य जगहों से आती हैं। कारोबारियों की मानें तो कोरोना के चलते पिछली बार बाजार सूना रहा। ऐसे में पुराने स्टॉक की खपत पिछली होली पर नहीं हो पाई। अब नया माल नहीं मंगाया है। वैसे बाजार में डोरेमोन, छोटा भीम, टैंक, डायनासोर आदि पिचकारियां बिक रही हैं। पिचकारी के दाम में पिछले साल की अपेक्षा बीस प्रतिशत की बढ़ोत्तरी है।
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खाद्य पदार्थों के दामों में आया उछाल
चीनी 36 से 38 रुपये हो गई है। वहीं मैदा 25 से 27 रुपये, सूजी 27 से तीस रुपये, उड़द दाल धोबा 90-100 रुपये किलो, छोले 90 से सौ रुपये, आटा 22 से 25 रुपये, दस किलो आटा 270 से 285 रुपये, वहीं रिफाइंड व तेल के टिन में 100 से डेढ़ सौ रुपये की बढ़ोतरी चल रही है। इस कारण लोगों की जेब पर महंगाई का बोझ बढ़ा है। पापड़, चिप्स आदि के दाम में पिछले साल से इस साल इजाफा है। त्योहार पर और ज्यादा खाद्य सामग्री की मांग होगी ऐसे में लोगों की जेब पर बोझ बढ़ना तय है।
- कोरोना के चलते पहले माल के आर्डर नहीं मिले। अब कोरोना खत्म हो गया है। बाजार में रंग गुलाल की मांग बढ़ गई है। माल की कमी भी है। स्टार्च के दाम डेढ़ गुने बढ़ गए हैं। इस कारण रंग और गुलाल के रेटों में इजाफा हुआ है। - विनोद मित्तल, रंग उद्यमी।
- प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद भगवा गुलाल की मांग में लगभग तीस प्रतिशत की वृद्धि हुई है। माल तैयार नहीं है। इस कारण आर्डरों को पूरा कर पाना मुश्किल हो रहा है। स्टार्च के दामों में अचानक बढ़ोत्तरी ने भी गुलाल के दाम बढ़ा दिए हैं। - कृष्णा गर्ग, रंग उद्यमी।
- त्योहार के मौसम में माल की मांग बढ़ गई है। आवक पर्याप्त नहीं हो पा रही है। इस कारण खाद्य वस्तुओं के दामों इजाफा हुआ है। होली पर हलवाइयों के यहां भी माल की आपूर्ति बढ़ गई है। आमजन भी खरीदारी कर रहे हैं। - प्रदीप वार्ष्णेय, कारोबारी
- पिछले दस दिनों के अंदर बाजार में खाद्य वस्तुओं के दामों में उतार चढ़ाव आया है। मैदा, सूजी, आटा के दामों में इजाफा हुआ है। यकायक तेजी आने के कारण कारोबार भी प्रभावित हो रहा है। बाजार में मांग के हिसाब से माल कम है। - अशोक वार्ष्णेय, कारोबारी।
- होली के त्योहार पर खाद्य सामग्री के दामों में वृद्धि से सामान खरीदने में काफी परेशानी हो रही है। बाजार में अधिकांश वस्तुओं के दाम बढ़े हुए हैं। महंगाई होली के रंग में भंग डालने का काम कर रही है। -धर्मेंद्र कौशिक, ग्राहक।
- खाद्य वस्तुओं के दामों में आई बढ़ोत्तरी के कारण सामान खरीदना में मुश्किल हो रही है। रंग गुलाल, व खाद्य वस्तुओं में तेजी से आर्थिक बोझ बढ़ गया है। इस कारण त्योहार की तैयारियां में दिक्कतें आ रही है। - रोहित अग्रवाल, ग्राहक।
भाजपा की सरकार बनी तो भगवा गुलाल की मांग बढ़ी
हाथरस। हाथरस के रंग और गुलाल की देशभर में मांग है। यहां पर एक दर्जन के करीब रंग, गुलाल की फैक्टरियां हैं। अब प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद भगवा गुलाल की मांग में करीब तीस प्रतिशत की मांग बढ़ गई है। संवाद
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होली के त्योहार की रंगत इस बार महंगाई की वजह से फीकी पड़ने वाली है। त्योहार से पहले रिफाइंड, तेल, मैदा, सूजी व आटा के दामों में उछाल आया है तो वहीं रंग, गुलाल व पिचकारी के दाम भी पिछले साल की अपेक्षा बढ़े हुए हैं। इससे लोगों की जेब पर बोझ बढ़ने वाला है।
कोरोना काल की वजह से फैक्टरियां बंद थीं। इस वजह से रंग, गुलाल आदि का उत्पादन अपेक्षाकृत नहीं हो पाया। अब कोरोना से लोगों को काफी राहत मिली है तो रंग और गुलाल की मांग बढ़ गई। वहीं उत्पादन कम होने की वजह से दाम बढ़ गए हैं। रंग और गुलाल के लिए स्टार्च की जरूरत होती है। इसके मूल्य में भी वृद्धि होने से रंग और गुलाल पर इसका अभी असर पड़ेगा। संवाद
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पिचकारी के दाम में लगभग 20 फीसदी की वृद्धि
जिले में पिचकारी दिल्ली, आगरा व अन्य जगहों से आती हैं। कारोबारियों की मानें तो कोरोना के चलते पिछली बार बाजार सूना रहा। ऐसे में पुराने स्टॉक की खपत पिछली होली पर नहीं हो पाई। अब नया माल नहीं मंगाया है। वैसे बाजार में डोरेमोन, छोटा भीम, टैंक, डायनासोर आदि पिचकारियां बिक रही हैं। पिचकारी के दाम में पिछले साल की अपेक्षा बीस प्रतिशत की बढ़ोत्तरी है।
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खाद्य पदार्थों के दामों में आया उछाल
चीनी 36 से 38 रुपये हो गई है। वहीं मैदा 25 से 27 रुपये, सूजी 27 से तीस रुपये, उड़द दाल धोबा 90-100 रुपये किलो, छोले 90 से सौ रुपये, आटा 22 से 25 रुपये, दस किलो आटा 270 से 285 रुपये, वहीं रिफाइंड व तेल के टिन में 100 से डेढ़ सौ रुपये की बढ़ोतरी चल रही है। इस कारण लोगों की जेब पर महंगाई का बोझ बढ़ा है। पापड़, चिप्स आदि के दाम में पिछले साल से इस साल इजाफा है। त्योहार पर और ज्यादा खाद्य सामग्री की मांग होगी ऐसे में लोगों की जेब पर बोझ बढ़ना तय है।
- कोरोना के चलते पहले माल के आर्डर नहीं मिले। अब कोरोना खत्म हो गया है। बाजार में रंग गुलाल की मांग बढ़ गई है। माल की कमी भी है। स्टार्च के दाम डेढ़ गुने बढ़ गए हैं। इस कारण रंग और गुलाल के रेटों में इजाफा हुआ है। - विनोद मित्तल, रंग उद्यमी।
- प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद भगवा गुलाल की मांग में लगभग तीस प्रतिशत की वृद्धि हुई है। माल तैयार नहीं है। इस कारण आर्डरों को पूरा कर पाना मुश्किल हो रहा है। स्टार्च के दामों में अचानक बढ़ोत्तरी ने भी गुलाल के दाम बढ़ा दिए हैं। - कृष्णा गर्ग, रंग उद्यमी।
- त्योहार के मौसम में माल की मांग बढ़ गई है। आवक पर्याप्त नहीं हो पा रही है। इस कारण खाद्य वस्तुओं के दामों इजाफा हुआ है। होली पर हलवाइयों के यहां भी माल की आपूर्ति बढ़ गई है। आमजन भी खरीदारी कर रहे हैं। - प्रदीप वार्ष्णेय, कारोबारी
- पिछले दस दिनों के अंदर बाजार में खाद्य वस्तुओं के दामों में उतार चढ़ाव आया है। मैदा, सूजी, आटा के दामों में इजाफा हुआ है। यकायक तेजी आने के कारण कारोबार भी प्रभावित हो रहा है। बाजार में मांग के हिसाब से माल कम है। - अशोक वार्ष्णेय, कारोबारी।
- होली के त्योहार पर खाद्य सामग्री के दामों में वृद्धि से सामान खरीदने में काफी परेशानी हो रही है। बाजार में अधिकांश वस्तुओं के दाम बढ़े हुए हैं। महंगाई होली के रंग में भंग डालने का काम कर रही है। -धर्मेंद्र कौशिक, ग्राहक।
- खाद्य वस्तुओं के दामों में आई बढ़ोत्तरी के कारण सामान खरीदना में मुश्किल हो रही है। रंग गुलाल, व खाद्य वस्तुओं में तेजी से आर्थिक बोझ बढ़ गया है। इस कारण त्योहार की तैयारियां में दिक्कतें आ रही है। - रोहित अग्रवाल, ग्राहक।
भाजपा की सरकार बनी तो भगवा गुलाल की मांग बढ़ी
हाथरस। हाथरस के रंग और गुलाल की देशभर में मांग है। यहां पर एक दर्जन के करीब रंग, गुलाल की फैक्टरियां हैं। अब प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद भगवा गुलाल की मांग में करीब तीस प्रतिशत की मांग बढ़ गई है। संवाद