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हाथरस : महंगाई ने छीन ली पावरलूम कारोबार की चमक

Thu, 24 Nov 2022 11:22 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 24 Nov 2022 11:22 PM IST
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Hathras: Inflation took away the shine of powerloom business
हाथरस : हाथरस की पावरलूम फैक्टरी में काम करता कारीगर। संवाद - फोटो : HATHRAS
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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कच्चे सूत के दामों में इजाफा और पांच फीसदी जीएसटी लगने से पावरलूम कारोबार की चमक फीकी पड़ गई है। पहले हाथरस में पावरलूम की करीब 80 फैक्टरियां चलती थीं, लेकिन वर्तमान में इनकी संख्या महज 15 ही रह गई है। बिजली की समस्या भी इस कारोबार की तरक्की में बड़ा रोड़ा साबित हो रही है। माल के आवागमन के लिए परिवहन के पर्याप्त इंतजामों की कमी है। ऑर्डर का माल पहुंचाने में कारोबारियों को कई दिन लग जाते हैं। इसका बुरा असर कारोबार पर पड़ता है।
उल्लेखनीय है कि औद्योगिक नगरी कहे जाने वाले हाथरस के पावरलूम कारोबार की भी आसपास के जिलो में अच्छी पहचान है। यहां से पावरलूम का माल पूरे उत्तर प्रदेश के अलावा हरियाणा, राजस्थान आदि राज्यों में जाता है, लेकिन महंगाई की मार ने इस कारोबार की कमर तोड़ दी है।
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पावरलूम में इस्तेमाल होने वाला छह नंबर सूत पहले 40 रुपये किलो था, लेकिन वर्तमान में इसके दाम 54 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गए हैं। इसी तरह 10 नंबर का जो धागा पहले 80 रुपये किलो मिलता था, उसके दाम अब 105 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। पहले इस कारोबार पर कोई कर नहीं था, लेकिन अब पांच फीसदी जीएसटी लगा दी गई है।
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यह बनता है पावरलूम फैक्टरियों में
पावरलूम में बैडशीट, रजाई के लिहाफ, खोली, चादर, पोंछा और पैरदान आदि सामान बनता है।
कारोबारियों की पीड़ा
पहले सूत के दाम काफी कम थे। अब सूत के दाम दोगुने हो गए हैं। इस कारण पावरलूम कारोबार के संचालन में काफी परेशानी आ रही है। साथ ही अब माल पर पांच प्रतिशत जीएसटी लग गया है। इस कारण माल भी महंगा हो गया है। इससे खरीदारों की जेब पर भी बोझ बढ़ा है।
-वासुदेव माहौर, कारोबारी
पहले बिजली बिल पर सब्सिडी मिलती थी। अब शासन स्तर से सब्सिडी बंद हो गई है। अब पूरा बिल जमा कर रहे हैं। आए-दिन बिजली गुल होने के कारण माल तैयार करने में भी अड़चन आती हैं। इस कारण माल देरी से तैयार हो पाता है। आर्डर पूरे करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

-बुद्धसेन माहौर, कारोबारी
सबसे बड़ा कारण यह है कि माल को गंतव्य तक पहुंचाने में परिवहन के साधनों की कमी महसूस होती है। यहां से सीधे माल भेजने की व्यवस्था नहीं है। हाथरस से राजस्थान, हरियाणा, व पूरे उत्तर प्रदेश में माल की आपूर्ति होती है। ट्रांसपोर्ट सिस्टम को दुरुस्त किया जाए।
-सुबोध माहेश्वरी, कारोबारी
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