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हाथरस : अपहरण नहीं हुआ तो कहां हैं भगवान देवी
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिकंदराराऊ (हाथरस)
गांव टीकरी कलां की बीडीसी सदस्य भगवान देवी के अपहरण के मामले में रोज नये खुलासे हो रहे हैं। एक दिन पूर्व अपहरण के नामजद आरोपी बंटी के साथ भगवान देवी ने कहा कि उनका अपहरण नहीं हुआ। अगले दिन भगवान देवी के पति और पुत्र सामने आए और कहा कि भगवान देवी से जबरन कहलवाया गया है कि उनका अपहरण नहीं हुआ। अपहरण नहीं हुआ तो भगवान देवी कहां हैं।
बता दें कि बीडीसी सदस्य भगवान देवी के पुत्र ने रिपोर्ट दर्ज कराते हुए कहा था कि उनकी मां का बंटी यादव और अन्य लोगों ने 21 मई को गांव से अपहरण कर लिया था। 29 मई को अपहरण की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद 30 मई को भगवान देवी सपा की पूर्व जिलाध्यक्ष के कार्यालय पर पहुंचीं और बताया कि उनका अपहरण नहीं हुआ था। वह रिश्तेदारी में गई थीं।
31 मई को उनके पति ईश्वरी प्रसाद और विनोद कुमार ने कहा कि उनकी मां का किसी राजनीतिक पार्टी से कोई संबंध नहीं है। उनका बंटी यादव और ओमवती यादव से भी कोई संबंध नहीं हैं। फिर वह बंटी यादव के पास कैसे पहुंचीं। उनको डरा-धमका कर बयान दिलवाया गया है। विनोद और ईश्वरी प्रसाद गांव में ही हैं, लेकिन भगवान देवी गांव नहीं आईं। रिश्तेदारी में भी नहीं हैं। पिता-पुत्र ने कहा कि यह ड्रामा अपहरण की कार्रवाई से बचने के लिए किया गया है।
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गांव टीकरी कलां की बीडीसी सदस्य भगवान देवी के अपहरण के मामले में रोज नये खुलासे हो रहे हैं। एक दिन पूर्व अपहरण के नामजद आरोपी बंटी के साथ भगवान देवी ने कहा कि उनका अपहरण नहीं हुआ। अगले दिन भगवान देवी के पति और पुत्र सामने आए और कहा कि भगवान देवी से जबरन कहलवाया गया है कि उनका अपहरण नहीं हुआ। अपहरण नहीं हुआ तो भगवान देवी कहां हैं।
बता दें कि बीडीसी सदस्य भगवान देवी के पुत्र ने रिपोर्ट दर्ज कराते हुए कहा था कि उनकी मां का बंटी यादव और अन्य लोगों ने 21 मई को गांव से अपहरण कर लिया था। 29 मई को अपहरण की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद 30 मई को भगवान देवी सपा की पूर्व जिलाध्यक्ष के कार्यालय पर पहुंचीं और बताया कि उनका अपहरण नहीं हुआ था। वह रिश्तेदारी में गई थीं।
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31 मई को उनके पति ईश्वरी प्रसाद और विनोद कुमार ने कहा कि उनकी मां का किसी राजनीतिक पार्टी से कोई संबंध नहीं है। उनका बंटी यादव और ओमवती यादव से भी कोई संबंध नहीं हैं। फिर वह बंटी यादव के पास कैसे पहुंचीं। उनको डरा-धमका कर बयान दिलवाया गया है। विनोद और ईश्वरी प्रसाद गांव में ही हैं, लेकिन भगवान देवी गांव नहीं आईं। रिश्तेदारी में भी नहीं हैं। पिता-पुत्र ने कहा कि यह ड्रामा अपहरण की कार्रवाई से बचने के लिए किया गया है।
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