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हाथरस : शिविर में दी गई मानवाधिकारों की जानकारी
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हाथरस : आरडी डिग्री कॉलेज में मानवाधिकार दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में पुस्तक का विमोचन कर
- फोटो : HATHRAS
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के मौके पर श्री रामेश्वर दयाल कन्या महाविद्यालय में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन जनपद न्यायाधीश श्रीमती मृदुला कुमार के आदेश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव चेतना सिंह की अध्यक्षता में किया गया। इस मौके पर मानवाधिकारों की विस्तार से जानकारी दी गई।
चेतना सिंह ने मानवाधिकार की उत्पत्ति, आवश्यकता और मानवाधिकार हनन पर नियंत्रण के लिए सामाजिक एवं आध्यात्मिक पक्ष पर प्रकाश डालते हुए लोगों को ऐसा व्यवहार करने की सलाह दी, जो संयमित न्याय उचित, सामाजिक हो और स्वयं के लिए अपेक्षित हो। नागरिकों को यह ज्ञान होना चाहिए कि कब किस मामले में किस अधिकारी या कर्मचारी को सूचित करना है। यदि न्याय मिलने में देरी हो या कोई न सुन रहा हो तो अपनी बात तथ्य और प्रमाण सहित सही-सही लिखकर विधिक सेवा प्राधिकरण में प्रस्तुत करके मदद ले सकते हैं।
प्राचार्या डॉ. इंदु वार्ष्णेय ने कहा कि 10 दिसंबर 1948 को ‘संयुक्त राष्ट्र महासभा‘ ने विश्व मानवाधिकार घोषणा पत्र जारी कर पहली बार मानवाधिकार व मानव की बुनियादी मुक्ति पर घोषणा की थी। इस मौके पर वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश कुमार शर्मा, डॉ. अंजू आर्या ने भी विचार व्यक्त किए। संचालन प्रवक्ता डॉ. नाहिद बी ने किया। इस अवसर पर दो हिंदी एवं संस्कृत की पुस्तक का विमोचन किया गया। दुर्गेश, गुंजन, लक्ष्मी पौनिया, रचना, पूनम, नेहा शर्मा आदि ने विचार व्यक्त किए और कविता भी प्रस्तुत की। संवाद
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अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के मौके पर श्री रामेश्वर दयाल कन्या महाविद्यालय में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन जनपद न्यायाधीश श्रीमती मृदुला कुमार के आदेश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव चेतना सिंह की अध्यक्षता में किया गया। इस मौके पर मानवाधिकारों की विस्तार से जानकारी दी गई।
चेतना सिंह ने मानवाधिकार की उत्पत्ति, आवश्यकता और मानवाधिकार हनन पर नियंत्रण के लिए सामाजिक एवं आध्यात्मिक पक्ष पर प्रकाश डालते हुए लोगों को ऐसा व्यवहार करने की सलाह दी, जो संयमित न्याय उचित, सामाजिक हो और स्वयं के लिए अपेक्षित हो। नागरिकों को यह ज्ञान होना चाहिए कि कब किस मामले में किस अधिकारी या कर्मचारी को सूचित करना है। यदि न्याय मिलने में देरी हो या कोई न सुन रहा हो तो अपनी बात तथ्य और प्रमाण सहित सही-सही लिखकर विधिक सेवा प्राधिकरण में प्रस्तुत करके मदद ले सकते हैं।
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प्राचार्या डॉ. इंदु वार्ष्णेय ने कहा कि 10 दिसंबर 1948 को ‘संयुक्त राष्ट्र महासभा‘ ने विश्व मानवाधिकार घोषणा पत्र जारी कर पहली बार मानवाधिकार व मानव की बुनियादी मुक्ति पर घोषणा की थी। इस मौके पर वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश कुमार शर्मा, डॉ. अंजू आर्या ने भी विचार व्यक्त किए। संचालन प्रवक्ता डॉ. नाहिद बी ने किया। इस अवसर पर दो हिंदी एवं संस्कृत की पुस्तक का विमोचन किया गया। दुर्गेश, गुंजन, लक्ष्मी पौनिया, रचना, पूनम, नेहा शर्मा आदि ने विचार व्यक्त किए और कविता भी प्रस्तुत की। संवाद
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