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हाथरस: बीते वर्ष में लगे पौधों का वन के पास नहीं आया डाटा कितने जीवित
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
जिले में बीते वर्ष में लगे पौधों का अन्य विभागों से कोई डाटा नहीं आया है। पूर्व में लगे कितने पौधे जीवित हैं। 23 विभागों की मदद से 16 लाख पौधों का रोपण किया गया था। फरवरी माह में थर्ड पार्टी ने इन पौधों का सर्वे किया था। इस संबध में मंडलायुक्त ने पौधरोपण की रिपोर्ट मांगी है। वन विभाग के अधिकारी पौधरोपण की रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार साल दर साल पौधरोपण कर हरियाली का अलख जगा रही है। जिले में शासन के आदेशों का पालन भी हो रहा है। लेकिन आंकड़ों की बात करें तो वन विभाग के पास यह डाटा नहीं है कि बीते वर्ष लगे पौधों में कितने जीवित है। अधिकारियों की मानें तो चालीस से पचास प्रतिशत पौधे मर चुके हैं। फरवरी माह में देहरादून की एक संस्था ने पौधरोपण का सर्वे किया था। जिसकी रिपोर्ट जिले की मशीनरी को नहीं मिल पाई है।
इस कारण यह पता नहीं लग पा रहा है कितने पौधे इस समय सही स्थिति में है। इस मामले में डीएफओ एमके शुक्ला का कहना है कि बीते वर्ष 16 लाख पौधे लगाए गए थे। जिसका देहादून की एक संस्था ने सर्वे किया था। सर्वे रिपोर्ट लखनऊ में संस्था देगी। उसके बाद जिले में आएगी। तब पता चल पाएगा कि कितने पौधे जीवित है।
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जिले में बीते वर्ष में लगे पौधों का अन्य विभागों से कोई डाटा नहीं आया है। पूर्व में लगे कितने पौधे जीवित हैं। 23 विभागों की मदद से 16 लाख पौधों का रोपण किया गया था। फरवरी माह में थर्ड पार्टी ने इन पौधों का सर्वे किया था। इस संबध में मंडलायुक्त ने पौधरोपण की रिपोर्ट मांगी है। वन विभाग के अधिकारी पौधरोपण की रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार साल दर साल पौधरोपण कर हरियाली का अलख जगा रही है। जिले में शासन के आदेशों का पालन भी हो रहा है। लेकिन आंकड़ों की बात करें तो वन विभाग के पास यह डाटा नहीं है कि बीते वर्ष लगे पौधों में कितने जीवित है। अधिकारियों की मानें तो चालीस से पचास प्रतिशत पौधे मर चुके हैं। फरवरी माह में देहरादून की एक संस्था ने पौधरोपण का सर्वे किया था। जिसकी रिपोर्ट जिले की मशीनरी को नहीं मिल पाई है।
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इस कारण यह पता नहीं लग पा रहा है कितने पौधे इस समय सही स्थिति में है। इस मामले में डीएफओ एमके शुक्ला का कहना है कि बीते वर्ष 16 लाख पौधे लगाए गए थे। जिसका देहादून की एक संस्था ने सर्वे किया था। सर्वे रिपोर्ट लखनऊ में संस्था देगी। उसके बाद जिले में आएगी। तब पता चल पाएगा कि कितने पौधे जीवित है।
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