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हाथरस : हिंदी को रोजगार देने वाली भाषा बनाया जाए
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हाथरस : रतन प्रकाश उपाध्याय, शिक्षक। संवाद
- फोटो : HATHRAS
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हिंदी हमारे विचारों, भावनाओं और संवेदनाओं को व्यक्त करने का सबसे सशक्त माध्यम है। इसके जरिये हम अपनी बात को सहजता और सुगमता से दूसरों तक पहुंचा पाते हैं। हमें दूसरी भाषाएं भी सीखनी चाहिए, लेकिन बातचीत हिंदी में ही करनी चाहिए। विज्ञान तकनीक की पढ़ाई भी हिंदी में होनी चाहिए। हिंदी को रोजगार देने वाली भाषा बनाना होगा। हमें अपनी भाषा पर गर्व होना चाहिए। हिंदी को आगे बढ़ाने के लिए सभी को आगे आना होगा। हिंदी मातृभाषा नहीं, बल्कि उससे अपनी संस्कृति भी जुड़ी है। यदि भाषा को छोड़ देंगे तो संस्कृति भी छूट जाएगी। संवाद
हिंदी संस्कृति व संस्कारों से जुड़ी भाषा है। इसे आगे बढ़ाने के लिए जन-जन का सहयोग चाहिए, ताकि हमारे नौनिहालों के मन में अपनी मातृभाषा के प्रति सम्मान का भाव जागे। बच्चों को लगता है कि हिंदी की कोई आवश्यकता नहीं है। युवा पीढ़ी को आकर्षित करने के लिए हिंदी को रोजगार देने वाली भाषा बनाना होगा।
-रतन प्रकाश उपाध्याय, शिक्षक
हमें अपनी मातृभाषा पर गर्व होना चाहिए। हिंदी को संपूर्ण रूप से बढ़ाना होगा। हमें अपनी भाषा के प्रति संपूर्ण भाव दिखना चाहिए। कहीं भी किसी से बात करें तो हिंदी भाषा में करनी चाहिए। दूसरी भाषाओं का ज्ञान जरूरी है पर उसके प्रयोग से बचना चाहिए। शिक्षा में जितनी हिंदी भाषा सफल होगी, उतनी कोई भाषा नहीं हो सकती है।
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-सुरेंद्र कौशिक, शिक्षक
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हिंदी हमारे विचारों, भावनाओं और संवेदनाओं को व्यक्त करने का सबसे सशक्त माध्यम है। इसके जरिये हम अपनी बात को सहजता और सुगमता से दूसरों तक पहुंचा पाते हैं। हमें दूसरी भाषाएं भी सीखनी चाहिए, लेकिन बातचीत हिंदी में ही करनी चाहिए। विज्ञान तकनीक की पढ़ाई भी हिंदी में होनी चाहिए। हिंदी को रोजगार देने वाली भाषा बनाना होगा। हमें अपनी भाषा पर गर्व होना चाहिए। हिंदी को आगे बढ़ाने के लिए सभी को आगे आना होगा। हिंदी मातृभाषा नहीं, बल्कि उससे अपनी संस्कृति भी जुड़ी है। यदि भाषा को छोड़ देंगे तो संस्कृति भी छूट जाएगी। संवाद
हिंदी संस्कृति व संस्कारों से जुड़ी भाषा है। इसे आगे बढ़ाने के लिए जन-जन का सहयोग चाहिए, ताकि हमारे नौनिहालों के मन में अपनी मातृभाषा के प्रति सम्मान का भाव जागे। बच्चों को लगता है कि हिंदी की कोई आवश्यकता नहीं है। युवा पीढ़ी को आकर्षित करने के लिए हिंदी को रोजगार देने वाली भाषा बनाना होगा।
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-रतन प्रकाश उपाध्याय, शिक्षक
हमें अपनी मातृभाषा पर गर्व होना चाहिए। हिंदी को संपूर्ण रूप से बढ़ाना होगा। हमें अपनी भाषा के प्रति संपूर्ण भाव दिखना चाहिए। कहीं भी किसी से बात करें तो हिंदी भाषा में करनी चाहिए। दूसरी भाषाओं का ज्ञान जरूरी है पर उसके प्रयोग से बचना चाहिए। शिक्षा में जितनी हिंदी भाषा सफल होगी, उतनी कोई भाषा नहीं हो सकती है।
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-सुरेंद्र कौशिक, शिक्षक

हाथरस : सुरेंद्र कौशिक, शिक्षक। संवाद- फोटो : HATHRAS