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हाथरस : संक्रामक रोग फैलने के बाद ही चेतता है स्वास्थ्य विभाग
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अस्पताल में भर्ती मरीज।
- फोटो : HATHRAS
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
जिले में इस बार भी बुखार जानलेवा साबित हो रहा है। जिले में 1600 से ज्यादा लोग बुखार की चपेट में आ चुके हैं। एक दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत भी हो चुकी है। खेदजनक पहलू यह है कि जिले में संक्रामक रोगों से निपटने के लिए कोई ठोस कार्ययोजना पहले से नहीं बनाई गई।
बीमारी फैलने के बाद ही फॉगिंग कराई जाती है। ऐसे में पर्याप्त संसाधन व उपचार के अभाव में लोग अपना इलाज जिले से बाहर कराने को मजबूर हैं। जिले में तो डेंगू की जांच तक की व्यवस्था नहीं है। जिले में अब तक 21 लोगों को डेंगू की पुष्टि हो चुकी है।
हर साल जिले में वायरल बुखार, मलेरिया और डेंगू जैसे रोग फैलते हैं, लेकिन इनसे निपटने के लिए पहले से कोई ठोस कार्ययोजना नहीं बनाई जाती। सिकंदराराऊ और हसायन बेहद नमी वाले इलाके हैं। यह मलेरिया की दृष्टि से संवेदनशील इलाके हैं।
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इस बार भी जिले में वायरल बुखार, मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारी जब तेजी से फैली तो उसके बाद स्वास्थ्य विभाग चेता और विभाग ने उन इलाकों में फॉगिंग शुरू कराई, जहां रोगी मिलने शुरू हो गए। बुखार के रोगियों की खोजबीन भी तब करानी शुरू की, जब जिले में आधा दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी।
इससे ज्यादा खेदजनक पहलू क्या होगा कि जिले में डेंगू की जांच की ही व्यवस्था नहीं है। किसी व्यक्ति को डेंगू की पुष्टि के लिए सप्ताह भर का समय स्वास्थ्य विभाग को चाहिए। ऐसे में पीड़ित लोग जिले से बाहर इलाज कराने को मजबूर होते हैं।
डेंगू वार्ड पर लटका है ताला
बागला जिला अस्पताल में डेंगू वार्ड तो बना दिया गया है, लेकिन इस वार्ड पर ताला ही लटका हुआ है। गंभीर मरीजों के तीमारदारों को भी यह मालूम है कि जिले के सरकारी अस्पतालों में उनका इलाज नहीं होगा तो वह मरीजों को उपचार के लिए बाहर ही ले जाते हैं।
- जहां-जहां की बुखार के रोगी मिल रहे हैं, उनका उपचार कराया जा रहा है। जिले में टीमें बुखार के रोगियों को खोज रही हैं। पहले ही कीटनाशकों का छिड़काव करा दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग संक्रामक रोगों को लेकर हमेशा सतर्क रहता है। रही डेंगू की जांच की बात तो जल्द ही यहां इसकी जांच की व्यवस्था भी कराई जाएगी।
-डॉ. सीएम चतुर्वेदी, सीएमओ हाथरस
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जिले में इस बार भी बुखार जानलेवा साबित हो रहा है। जिले में 1600 से ज्यादा लोग बुखार की चपेट में आ चुके हैं। एक दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत भी हो चुकी है। खेदजनक पहलू यह है कि जिले में संक्रामक रोगों से निपटने के लिए कोई ठोस कार्ययोजना पहले से नहीं बनाई गई।
बीमारी फैलने के बाद ही फॉगिंग कराई जाती है। ऐसे में पर्याप्त संसाधन व उपचार के अभाव में लोग अपना इलाज जिले से बाहर कराने को मजबूर हैं। जिले में तो डेंगू की जांच तक की व्यवस्था नहीं है। जिले में अब तक 21 लोगों को डेंगू की पुष्टि हो चुकी है।
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हर साल जिले में वायरल बुखार, मलेरिया और डेंगू जैसे रोग फैलते हैं, लेकिन इनसे निपटने के लिए पहले से कोई ठोस कार्ययोजना नहीं बनाई जाती। सिकंदराराऊ और हसायन बेहद नमी वाले इलाके हैं। यह मलेरिया की दृष्टि से संवेदनशील इलाके हैं।
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इस बार भी जिले में वायरल बुखार, मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारी जब तेजी से फैली तो उसके बाद स्वास्थ्य विभाग चेता और विभाग ने उन इलाकों में फॉगिंग शुरू कराई, जहां रोगी मिलने शुरू हो गए। बुखार के रोगियों की खोजबीन भी तब करानी शुरू की, जब जिले में आधा दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी।
इससे ज्यादा खेदजनक पहलू क्या होगा कि जिले में डेंगू की जांच की ही व्यवस्था नहीं है। किसी व्यक्ति को डेंगू की पुष्टि के लिए सप्ताह भर का समय स्वास्थ्य विभाग को चाहिए। ऐसे में पीड़ित लोग जिले से बाहर इलाज कराने को मजबूर होते हैं।
डेंगू वार्ड पर लटका है ताला
बागला जिला अस्पताल में डेंगू वार्ड तो बना दिया गया है, लेकिन इस वार्ड पर ताला ही लटका हुआ है। गंभीर मरीजों के तीमारदारों को भी यह मालूम है कि जिले के सरकारी अस्पतालों में उनका इलाज नहीं होगा तो वह मरीजों को उपचार के लिए बाहर ही ले जाते हैं।
- जहां-जहां की बुखार के रोगी मिल रहे हैं, उनका उपचार कराया जा रहा है। जिले में टीमें बुखार के रोगियों को खोज रही हैं। पहले ही कीटनाशकों का छिड़काव करा दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग संक्रामक रोगों को लेकर हमेशा सतर्क रहता है। रही डेंगू की जांच की बात तो जल्द ही यहां इसकी जांच की व्यवस्था भी कराई जाएगी।
-डॉ. सीएम चतुर्वेदी, सीएमओ हाथरस