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हाथरस: गांव पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम, नहीं मिला संदिग्ध रोगी
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
शहर से सटे एक गांव में कोरोना के संदिग्ध मरीज होने की सूचना पर स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंची, लेकिन यहां पर मरीज नहीं मिला। परिजनों पूछताछ में पता चला कि वह कोरोना का रोगी नहीं था। लोग उसे परेशान कर रहे थे।
पास ही के एक गांव निवासी व्यक्ति फरीदाबाद में प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता है। वहां पर वह वायरल फीवर की चपेट में आ गया। जिसके चलते वह अपने घर आ गया, लेकिन गांव के लोगों ने उसे लेकर अफवाह उड़ा दी कि उसे कोरोना है। इस बात की जानकारी जब सीएमओ डॉ.बृजेश राठौर को हुई तो उन्होंने अपनी टीम को गांव भेजा और इस मामले की जानकारी की।
वहां पर टीम को वह व्यक्ति तो मिला नहीं, उसके परिजन मिले, जिनसे पूछताछ में पता चला कि वह सामान्य तौर पर बीमार हो गया था, लेकिन अब पूरी तरह से ठीक है। कोरोना का संदिग्ध मरीज नहीं था। वह अपनी नौकरी पर वापस फरीदाबाद चला गया है। यहां पर जिला एपेडेमियोलॉजिस्ट डॉ.पवन कुमार ने इस संबंध में गांव के अन्य लोगों से भी पूछताछ की और लोगों को जागरुक किया।
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शहर से सटे एक गांव में कोरोना के संदिग्ध मरीज होने की सूचना पर स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंची, लेकिन यहां पर मरीज नहीं मिला। परिजनों पूछताछ में पता चला कि वह कोरोना का रोगी नहीं था। लोग उसे परेशान कर रहे थे।
पास ही के एक गांव निवासी व्यक्ति फरीदाबाद में प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता है। वहां पर वह वायरल फीवर की चपेट में आ गया। जिसके चलते वह अपने घर आ गया, लेकिन गांव के लोगों ने उसे लेकर अफवाह उड़ा दी कि उसे कोरोना है। इस बात की जानकारी जब सीएमओ डॉ.बृजेश राठौर को हुई तो उन्होंने अपनी टीम को गांव भेजा और इस मामले की जानकारी की।
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वहां पर टीम को वह व्यक्ति तो मिला नहीं, उसके परिजन मिले, जिनसे पूछताछ में पता चला कि वह सामान्य तौर पर बीमार हो गया था, लेकिन अब पूरी तरह से ठीक है। कोरोना का संदिग्ध मरीज नहीं था। वह अपनी नौकरी पर वापस फरीदाबाद चला गया है। यहां पर जिला एपेडेमियोलॉजिस्ट डॉ.पवन कुमार ने इस संबंध में गांव के अन्य लोगों से भी पूछताछ की और लोगों को जागरुक किया।
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