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हाथरस : विस-लोस चुनाव में हाशिए पर रही आधी आबादी
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
जिले में विधानसभा और लोकसभा चुनाव में आधी आबादी अभी तक हाशिए पर ही रही है। आजादी के 75 साल में जिले की तीनों विधानसभा सीट से अभी तक केवल एक महिला ही विधायक बन सकी है और इस सीट से केवल एक महिला ही संसद पहुंच सकी है। इस बार भी अभी तक जिन प्रमुख दलों ने अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं, उनमें कोई भी महिला नहीं हैं, अलबत्ता कुछ दलोें में कई दावेदार महिलाएं हैं।
जिले में इस समय तीन विधानसभा सीटें हैं। यदि इन तीनों सीटों का इतिहास उठाकर देखें तो अभी तक हाथरस और सादाबाद सीट से कोई महिला विधानसभा में नहीं पहुंची है। सिकंदराराऊ से जरूर वर्ष 1980 में कांग्रेस ने पुष्पा चौहान को टिकट दिया और पुष्पा चौहान ने जीत हासिल की। इसके बाद वर्ष 2007 में इस सीट से वर्तमान में केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल की पत्नी मधु बघेल को सपा ने चुनाव ल़ड़ाया था, लेकिन बघेल को तत्कालीन भाजपा प्रत्याशी यशपाल सिंह चौहान ने परास्त कर दिया था। इसी तरह हाथरस संसदीय सीट से अभी तक केवल वर्ष 2009 में रालोद ने सारिका सिंह बघेल को चुनाव मैदान में उतारा और सारिका सिंह बघेल ने इस चुनाव में भाजपा के समर्थन से जीत हासिल की।
ऐसे में अन्य कोई महिला यहां से सांसद भी नहीं बन सकी। आरक्षण के चलते जरूर पंचायत और नगर निकाय चुनावों की महिलाओं को अहम पद हासिल हुए। इस बार भी बसपा सहित कई प्रमुख दलों ने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। इसमें कोई भी महिला नहीं हैं। भाजपा, सपा, कांग्रेस ने अभी उम्मीदवार घोषित नहीं किए हैं। इन दलों में कई महिलाएं टिकट मांग रही हैं। देखना वाली बात यह होगी कि इनमें से कौन सा दल किसी महिला को उम्मीदवार बनाएगा। संवाद
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जिले में विधानसभा और लोकसभा चुनाव में आधी आबादी अभी तक हाशिए पर ही रही है। आजादी के 75 साल में जिले की तीनों विधानसभा सीट से अभी तक केवल एक महिला ही विधायक बन सकी है और इस सीट से केवल एक महिला ही संसद पहुंच सकी है। इस बार भी अभी तक जिन प्रमुख दलों ने अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं, उनमें कोई भी महिला नहीं हैं, अलबत्ता कुछ दलोें में कई दावेदार महिलाएं हैं।
जिले में इस समय तीन विधानसभा सीटें हैं। यदि इन तीनों सीटों का इतिहास उठाकर देखें तो अभी तक हाथरस और सादाबाद सीट से कोई महिला विधानसभा में नहीं पहुंची है। सिकंदराराऊ से जरूर वर्ष 1980 में कांग्रेस ने पुष्पा चौहान को टिकट दिया और पुष्पा चौहान ने जीत हासिल की। इसके बाद वर्ष 2007 में इस सीट से वर्तमान में केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल की पत्नी मधु बघेल को सपा ने चुनाव ल़ड़ाया था, लेकिन बघेल को तत्कालीन भाजपा प्रत्याशी यशपाल सिंह चौहान ने परास्त कर दिया था। इसी तरह हाथरस संसदीय सीट से अभी तक केवल वर्ष 2009 में रालोद ने सारिका सिंह बघेल को चुनाव मैदान में उतारा और सारिका सिंह बघेल ने इस चुनाव में भाजपा के समर्थन से जीत हासिल की।
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ऐसे में अन्य कोई महिला यहां से सांसद भी नहीं बन सकी। आरक्षण के चलते जरूर पंचायत और नगर निकाय चुनावों की महिलाओं को अहम पद हासिल हुए। इस बार भी बसपा सहित कई प्रमुख दलों ने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। इसमें कोई भी महिला नहीं हैं। भाजपा, सपा, कांग्रेस ने अभी उम्मीदवार घोषित नहीं किए हैं। इन दलों में कई महिलाएं टिकट मांग रही हैं। देखना वाली बात यह होगी कि इनमें से कौन सा दल किसी महिला को उम्मीदवार बनाएगा। संवाद
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