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हाथरस : तहसील में आधा दर्जन सहकारी समितियां, किसी पर खाद उपलब्ध नहीं
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सहकारी समिति का गेट बंद होने की वजह से बाहर खड़े किसान। संवाद
- फोटो : SASNI
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संवाद न्यूज एजेंसी, सासनी।
सासनी तहसील क्षेत्र में खाद की किल्लत अभी भी दूर नहीं हुई है। क्षेत्र में आधा दर्जन से अधिक सहकारी समिति होने के बावजूद किसानों को खाद नहीं मिल रही है। प्रशासन ने जो खाद भेजे भी हैं वे ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहे हैं। किसान रोजाना सहकारी समितियों पर आ रहे हैं और शाम को मायूस लौट रहे हैं। अधिकतर सहकारी समितियों पर ताले लटक रहे हैं।
दरअसल, किसानों को आलू एवं गेहूं की फसल के लिए यूरिया की जरूरत है। लेकिन, उन्हें खाद नहीं मिल पा रही है। इससे किसान काफी परेशान हैं। उनका कहना है कि न तो किसानों को फसलीय ऋण मिल पा रहा है और न ही नकद खरीद कर अपने आवश्यकता की पूर्ति कर पा रहे हैं।
- रामप्रकाश शर्मा का कहना है कि यूरिया खाद लेने के लिए सहकारी समितियों पर खड़ा हूं लेकिन खाद नहीं मिल पा रही है। किसानों को खाद लेने के लिए भारी परेशानी हो रही है। छोटा एवं गरीब किसान पैसे के अभाव में खाद नहीं खरीद पा रहा है। इसका खेतों की पैदावार पर बुरा असर पड़ेगा।
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- हरिओम का कहना है कि किसानों को खाद के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। लेकिन खाद नहीं मिल पा रहा है। शासन प्रशासन किसानों को झूठे आश्वासन दे रहा है। वास्तव में खाद की कमी किसानों को खल रही है। पहले डीएपी के लिए अब यूरिया के लिए मारामारी मची है।
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सासनी तहसील क्षेत्र में खाद की किल्लत अभी भी दूर नहीं हुई है। क्षेत्र में आधा दर्जन से अधिक सहकारी समिति होने के बावजूद किसानों को खाद नहीं मिल रही है। प्रशासन ने जो खाद भेजे भी हैं वे ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहे हैं। किसान रोजाना सहकारी समितियों पर आ रहे हैं और शाम को मायूस लौट रहे हैं। अधिकतर सहकारी समितियों पर ताले लटक रहे हैं।
दरअसल, किसानों को आलू एवं गेहूं की फसल के लिए यूरिया की जरूरत है। लेकिन, उन्हें खाद नहीं मिल पा रही है। इससे किसान काफी परेशान हैं। उनका कहना है कि न तो किसानों को फसलीय ऋण मिल पा रहा है और न ही नकद खरीद कर अपने आवश्यकता की पूर्ति कर पा रहे हैं।
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- रामप्रकाश शर्मा का कहना है कि यूरिया खाद लेने के लिए सहकारी समितियों पर खड़ा हूं लेकिन खाद नहीं मिल पा रही है। किसानों को खाद लेने के लिए भारी परेशानी हो रही है। छोटा एवं गरीब किसान पैसे के अभाव में खाद नहीं खरीद पा रहा है। इसका खेतों की पैदावार पर बुरा असर पड़ेगा।
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- हरिओम का कहना है कि किसानों को खाद के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। लेकिन खाद नहीं मिल पा रहा है। शासन प्रशासन किसानों को झूठे आश्वासन दे रहा है। वास्तव में खाद की कमी किसानों को खल रही है। पहले डीएपी के लिए अब यूरिया के लिए मारामारी मची है।