{"_id":"603fd8ff8ebc3e769a3d9f3f","slug":"hathras-group-women-to-maintain-community-toilets-hathras-news-ali2577262134","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाथरस : सामुदायिक शौचालयों का रखरखाव करेंगी समूह की महिलाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाथरस : सामुदायिक शौचालयों का रखरखाव करेंगी समूह की महिलाएं
विज्ञापन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
स्वयं सहायता समूहों को अब सामुदायिक शौचालयों के रखरखाव की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। शासन के निर्देश पर अब स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को रखरखाव के लिए धनराशि भी दी जा रही है। स्वयं सहायता समूहों के खातों में सीधे धनराशि भेजी जा रही है।
जिले में संचालित स्वयं सहायता समूह की दीदियों को लगातार शासन की योजनाओं से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इन समूहों को लगातार जिम्मेदारियां सौंपकर आर्थिक रूप से भी मदद की जा रही है। अब ग्राम पंचायतों में बने सामुदायिक शौचालयों के रखरखाव की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है।
इन समूहों को इस रखरखाव की जिम्मेदारी के एवज में नौ हजार रुपया प्रतिमाह दिया जाएगा। इसमें तीन हजार रुपये का खर्चा शौचालयों के रखरखाव पर करना होगा। छह हजार रुपये प्रति माह पारिश्रमिक के रूप में दिया जाएगा। इन महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए यह शासन की ओर से पहल की गई है।
विज्ञापन
पंचायतराज विभाग की ओर से यह धनराशि स्वयं सहायता समूहों के खाते में भेजी जा रही है। इस धनराशि से सामुदायिक शौचालयों में साबुन, सफाई के लिए अन्य सामान आदि की खरीद भी जाएगी। इस संबंध में जिला समन्वयक रंजन कुमार ने बताया कि स्वयं सहायता समूहों के खाते में नौ हजार भेजे जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
विज्ञापन
स्वयं सहायता समूहों को अब सामुदायिक शौचालयों के रखरखाव की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। शासन के निर्देश पर अब स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को रखरखाव के लिए धनराशि भी दी जा रही है। स्वयं सहायता समूहों के खातों में सीधे धनराशि भेजी जा रही है।
जिले में संचालित स्वयं सहायता समूह की दीदियों को लगातार शासन की योजनाओं से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इन समूहों को लगातार जिम्मेदारियां सौंपकर आर्थिक रूप से भी मदद की जा रही है। अब ग्राम पंचायतों में बने सामुदायिक शौचालयों के रखरखाव की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है।
विज्ञापन
इन समूहों को इस रखरखाव की जिम्मेदारी के एवज में नौ हजार रुपया प्रतिमाह दिया जाएगा। इसमें तीन हजार रुपये का खर्चा शौचालयों के रखरखाव पर करना होगा। छह हजार रुपये प्रति माह पारिश्रमिक के रूप में दिया जाएगा। इन महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए यह शासन की ओर से पहल की गई है।
विज्ञापन
पंचायतराज विभाग की ओर से यह धनराशि स्वयं सहायता समूहों के खाते में भेजी जा रही है। इस धनराशि से सामुदायिक शौचालयों में साबुन, सफाई के लिए अन्य सामान आदि की खरीद भी जाएगी। इस संबंध में जिला समन्वयक रंजन कुमार ने बताया कि स्वयं सहायता समूहों के खाते में नौ हजार भेजे जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।