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हाथरस : राज्यपाल ने प्रीतिका को पीएचडी की उपाधि से किया अलंकृत
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हाथरस : डॉ. प्रीतिका शर्मा। संवाद
- फोटो : HATHRAS
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
आगरा में मंगलवार को 86वें दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया। इस मौके पर हाथरस की डॉ. प्रीतिका शर्मा को पीएचडी की उपाधि से राज्यपाल ने सम्मानित किया।
वर्ष 2014-15 (अंग्रेजी बेच) के सत्र की एकमात्र महिला डॉ. प्रीतिका शर्मा को सोमवार को आगरा में हुए 86वें दीक्षांत समारोह राज्यपाल आनंदी बेन ने पीएचडी की उपाधि से अलंकृत किया। उन्होंने अपने बेच में प्री पीएचडी कोर्स वर्क में सर्वोच्च 75 फीसदी अंक प्राप्त किए। उन्होंने अपनी थीसिस 80 के दशक के जाने माने हीरो प्रताप शर्मा पर लिखी है। डॉ. शर्मा ने अपनी थीसिस में उनके फ़ेमस नाटक ‘द टच ऑफ ब्रायट्नेस’ के अलावा सभी नाटकों को समाहित किया है।
‘द टच ऑफ ब्रायट्नेस‘ मुंबई के रेड लाइट एरिया को हाइलाइट करता है। इसकी वजह से इस नाटक को भारत सरकार द्वारा बैन भी किया गया। बाद में यही नाटक साहित्य अकादमी द्वारा छापा गया। नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा के साथ विदेशों में भी इसका मंचन किया गया। देश में प्रताप शर्मा पर यह पहली थीसिस है, जो भविष्य में शोधार्थियों को लाभ देगी। प्रीतिका ने अपनी थीसिस में उन दुर्लभ नाटकों को भी समाहित किया है, जो बाजार में उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए ये थीसिस शोधार्थियों को नया पढ़ने और नया करने के लिए प्रेरित करेगी। संवाद
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आगरा में मंगलवार को 86वें दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया। इस मौके पर हाथरस की डॉ. प्रीतिका शर्मा को पीएचडी की उपाधि से राज्यपाल ने सम्मानित किया।
वर्ष 2014-15 (अंग्रेजी बेच) के सत्र की एकमात्र महिला डॉ. प्रीतिका शर्मा को सोमवार को आगरा में हुए 86वें दीक्षांत समारोह राज्यपाल आनंदी बेन ने पीएचडी की उपाधि से अलंकृत किया। उन्होंने अपने बेच में प्री पीएचडी कोर्स वर्क में सर्वोच्च 75 फीसदी अंक प्राप्त किए। उन्होंने अपनी थीसिस 80 के दशक के जाने माने हीरो प्रताप शर्मा पर लिखी है। डॉ. शर्मा ने अपनी थीसिस में उनके फ़ेमस नाटक ‘द टच ऑफ ब्रायट्नेस’ के अलावा सभी नाटकों को समाहित किया है।
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‘द टच ऑफ ब्रायट्नेस‘ मुंबई के रेड लाइट एरिया को हाइलाइट करता है। इसकी वजह से इस नाटक को भारत सरकार द्वारा बैन भी किया गया। बाद में यही नाटक साहित्य अकादमी द्वारा छापा गया। नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा के साथ विदेशों में भी इसका मंचन किया गया। देश में प्रताप शर्मा पर यह पहली थीसिस है, जो भविष्य में शोधार्थियों को लाभ देगी। प्रीतिका ने अपनी थीसिस में उन दुर्लभ नाटकों को भी समाहित किया है, जो बाजार में उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए ये थीसिस शोधार्थियों को नया पढ़ने और नया करने के लिए प्रेरित करेगी। संवाद
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