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हाथरस : पांच युवकों की अभी तक नहीं हो पाई घर वापसी
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हाथरस : यूक्रेन में फंसे छात्र अमन प्रताप सिंह। संवाद
- फोटो : SHAPHU
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहपऊ (हाथरस)
यूक्रेन में हुए युद्ध के बार जिले के पांच युवक अभी वापस घर नहीं लौटे हैं। इनमें चार विद्यार्थी हैं। इन सभी के परिजन काफी चिंतित हैं और उनके लगातार संपर्क में हैं। वैसे अगले एक-दो दिन में दो विद्यार्थियों के वापस आने की संभावना है। इनमें से कुछ यूक्रेन में फंसे हैं तो कुछ यूक्रेन के सीमावर्ती देशों में पहुंच गए हैं।
कस्बा सादाबाद के प्रगतिपुरम निवासी अनुज प्रताप सिंह के बेटा दक्ष चौधरी अभी तक
यूक्रेन में फंसे हैं। रूस ने सबसे पहले जिस इलाके में बम धमाके किए थे, दक्ष उस इलाके के निकट
ही फंसे हुए थे। भारतीय दूतावास से मिले निर्देशों के बाद दक्ष ने जैसे-तैसे जान बचाई।
परिजनों से हुई बातचीत के अनुसार फिलहाल दक्ष खारकीव के नजदीकी शहर पेसोचिन में फंसे
हैं। यह शहर खारकीव से करीब 11 किलोमीटर दूर है। यहां एक हजार से ज्यादा
छात्र-छात्राएं स्कूल और अन्य इमारतों में ठहरे हुए हैं। भारत सरकार यहां से विद्यार्थियों को
निकालने के लिए यूक्रेन और रूस के लगातार संपर्क में हैं, जबकि क्षेत्र के गांव चिरावली
निवासी पोप सिंह के बेटे ललित कुमार काफी जद्दोजहद के बाद यूक्रेन से रोमानिया पहुंच
गए हैं। परिजन दुआ कर रहे हैं कि ललित जल्द ही घर लौट आएं।
गढ़ी एवरन निवासी अमन प्रताप भी यूक्रेन में ही फंसे हैं। उसके परिजन काफी चिंतित हैं। इधर, अभी शहर की आवास-विकास कॉलोनी निवासी आशीष भी वहां से वापस नहीं आए हैं। हालांकि उसके शनिवार को आने की उम्मीद है। इधर, यूक्रेन की एक महिला से शादी करने के बाद वहीं बस गए सहपऊ के गांव सेंदरिया का राकेश गौतम भी अपने परिवार के साथ भारत आना चाहते हैं। उनके परिजन भी ननकी सलामती और स्वदेश वापसी की दुआ कर रहे हैं। संवाद
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यूक्रेन में हुए युद्ध के बार जिले के पांच युवक अभी वापस घर नहीं लौटे हैं। इनमें चार विद्यार्थी हैं। इन सभी के परिजन काफी चिंतित हैं और उनके लगातार संपर्क में हैं। वैसे अगले एक-दो दिन में दो विद्यार्थियों के वापस आने की संभावना है। इनमें से कुछ यूक्रेन में फंसे हैं तो कुछ यूक्रेन के सीमावर्ती देशों में पहुंच गए हैं।
कस्बा सादाबाद के प्रगतिपुरम निवासी अनुज प्रताप सिंह के बेटा दक्ष चौधरी अभी तक
यूक्रेन में फंसे हैं। रूस ने सबसे पहले जिस इलाके में बम धमाके किए थे, दक्ष उस इलाके के निकट
ही फंसे हुए थे। भारतीय दूतावास से मिले निर्देशों के बाद दक्ष ने जैसे-तैसे जान बचाई।
परिजनों से हुई बातचीत के अनुसार फिलहाल दक्ष खारकीव के नजदीकी शहर पेसोचिन में फंसे
हैं। यह शहर खारकीव से करीब 11 किलोमीटर दूर है। यहां एक हजार से ज्यादा
छात्र-छात्राएं स्कूल और अन्य इमारतों में ठहरे हुए हैं। भारत सरकार यहां से विद्यार्थियों को
निकालने के लिए यूक्रेन और रूस के लगातार संपर्क में हैं, जबकि क्षेत्र के गांव चिरावली
निवासी पोप सिंह के बेटे ललित कुमार काफी जद्दोजहद के बाद यूक्रेन से रोमानिया पहुंच
गए हैं। परिजन दुआ कर रहे हैं कि ललित जल्द ही घर लौट आएं।
गढ़ी एवरन निवासी अमन प्रताप भी यूक्रेन में ही फंसे हैं। उसके परिजन काफी चिंतित हैं। इधर, अभी शहर की आवास-विकास कॉलोनी निवासी आशीष भी वहां से वापस नहीं आए हैं। हालांकि उसके शनिवार को आने की उम्मीद है। इधर, यूक्रेन की एक महिला से शादी करने के बाद वहीं बस गए सहपऊ के गांव सेंदरिया का राकेश गौतम भी अपने परिवार के साथ भारत आना चाहते हैं। उनके परिजन भी ननकी सलामती और स्वदेश वापसी की दुआ कर रहे हैं। संवाद
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