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Hathras News: कानपुर की फर्म से माल खरीदकर जांच में घिरी हाथरस की फर्म

Sat, 30 Nov 2024 01:51 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस Updated Sat, 30 Nov 2024 01:51 AM IST
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Hathras firm under investigation after purchasing goods from Kanpur firm
शहर के कमला बाजार स्थित हीरालाल मनीष कुमार की मेटल फर्म पर आयकर विभाग के सर्वे की कार्रवाई शुक्रवार को दूसरे दिन भी जारी रही। लगातार 24 घंटे से अधिक समय से चल रही इस कार्रवाई शहर के कारोबारियों में तरह-तरह की चर्चाएं रहीं। कहा जा रहा है कि फर्म ने कानपुर की फर्म से माल खरीदा था, जो जांच में फर्जी निकली है। इस कारण हाथरस के कारोबारी जांच के घेरे में आए हैं।
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गौरतलब है कि इस मेटल फर्म पर बृहस्पतिवार की सुबह आयकर विभाग की इन्वेस्टिंग विंग की टीम पहुंची थी। बृहस्पतिवार रात करीब 11 बजे तक फर्म पर आयकर विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। इसके बाद वहां दो पुलिस कर्मियों के साथ एक अधिकारी को छोड़कर अन्य अधिकारी कहीं चले गए।
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सुबह फिर फर्म स्वामी के साथ अधिकारी मौके पर पहुंच गए। सूत्र बताते हैं कि फर्म पर सर्वे की कार्रवाई लगभग पूरी हो चुकी है, लेकिन कानपुर में इस्पात फर्म पर चल रही कार्रवाई होने तक टीम यहीं मौजूद रहेगी। लगातार दूसरे दिन भी आयकर विभाग की टीम से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन अधिकारियों ने बात करने के लिए साफ तौर पर इंकार कर दिया। हालांकि इतने लंबे समय तक चली इस कार्रवाई को लेकर शहर के कारोबारियों में खलबली मची रही। कारोबारी एक-दूसरे से इसके बारे में जानकारी लेते रहे।
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हाथरस की फर्म ने कानपुर की मानू स्टील से की थी खरीद

हाथरस की हीरालाल मनीष कुमार नामक फर्म का सीधे तौर पर कानपुर की रिमझिम इस्पात फर्म से कोई नाता सामने नहीं आया, लेकिन सूत्र बताते हैं कि हाथरस की फर्म ने कानपुर की मानू स्टील नामक फर्म से माल की खरीद की थी। मानू स्टील व रिमझिम इस्पात के बीच बड़े स्तर पर व्यापार किया जा रहा था। माना जा रहा है कि इस क्रम में ही हाथरस की फर्म पर कार्रवाई की गई है। हालांकि सूत्र बताते हैं कि हाथरस की फर्म पर भी काफी कमियां मिली हैं।

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उच्चतम करदाता के रूप सम्मानित हुए थे कारोबारी

शहर की हीरालाल मनीष कुमार फर्म पिछले तीन वर्षों से सुर्खियों में रही। कमला बाजार की एक छोटी सी गली में संचालित होने वाली यह फर्म वर्ष 2021 में उच्चतम करदाता के रूप में सम्मानित की गई। इस फर्म के मालिक दीपक अग्रवाल को राज्य कर कार्यालय में बुलाकर जिले में दूसरे स्थान पर अधिकतम कर देने के लिए प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया। महाराजा ऑटो वर्ल्ड पहले स्थान पर रहा था।

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एक फर्म पर दो साल में तीन बड़ी कार्रवाई

हीरालाल मनीष कुमार नामक फर्म पर पहली बार वर्ष 2022 में राज्य कर की विशेष अनुसंधान शाखा मथुरा की ओर से कार्रवाई की गई। राज्य कर की कार्रवाई पूरी होने से पहले ही सेंट्रल जीएसटी की टीम ने वर्ष 2023 के शुरुआती दिनों में इस फर्म पर जांच की। अब वर्ष 2024 के अंतिम दिनों में आयकर विभाग के सर्वे की कार्रवाई ने इस फर्म को फिर सुर्खियों में ला दिया है।

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छह फीसदी की जीएसटी से खड़ी होती है बड़ी आईटीसी

मेटल कारोबार में कच्चे माल पर 18 फीसदी जीएसटी लगाया जाता है, लेकिन अगर इस कच्चे माल से हैंडीक्राफ्ट या अन्य प्रकार के बर्तन आदि तैयार कराए जाएं तो जीएसटी की दर घटकर 12 फीसदी हो जाती है। कच्चे माल की खरीद के बाद उसे तैयार कराकर बेचने पर छह फीसदी जीएसटी का अंतर आता है। यह अंतर कारोबारी को इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के रूप में कारोबारी को वापस मिलता है। यही कारण है कि मेटल फर्म की ओर से अच्छी-खासी आईटीसी क्लेम की जाती है, जो अक्सर जांच के घेरे में आ जाती है।


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बातचीत,,,,,,,,,

आयकर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि हीरालाल मनीष कुमार ने जिस फर्म से माल की खरीद की है, वह बोगस है। अगर यह बात सच भी है तो व्यापारी कैसे पता लगाए कि वह जिससे माल की खरीद कर रहा है, वह बोगस फर्म है। क्या सरकारी महकमे की जिम्मेदारी नहीं है कि वह पंजीयन देने से पहले व बाद में भली भांति फर्म की जांच कर ले। विभाग अपनी लापरवाही के लिए भी कारोबारी को दोषी ठहरा रहा है, जो गलत है। अगर पीछे की फर्म उनका कर लेकर भाग गई तो आगे के कारोबारी से जबरन उसकी भरपाई को सही कैसे कहा जा सकता है।
-प्रेमप्रकाश शर्मा, संरक्षक, मेटल एसोसिएशन हाथरस।
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