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Hathras News: बढ़ती ठंड से बढ़ी किसान की चिंता, फसल में झुलसा रोग का सताने लगा डर
Sun, 26 Dec 2021 12:40 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
Published by: अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 26 Dec 2021 12:40 AM IST
सार
बढ़ती ठंड का यह मौसम आलू के लिए बेहतर नहीं है। ऐसे में अगर आलू में झुलसा रोग फैल जाता है, तो किसानों के लिए मुश्किल खड़ी हो जाएगी। किसानों के लिए आलू की लागत भी निकालना मुश्किल होगा।
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आलू की फसल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कच्ची फसल में माटी के मोल बिक रहे आलू से परेशान किसान को पक्की फसल में झुलसा लगने की चिंता सताने लगी है। पाले का भी आलू की फसल पर डर किसानों को सताने लगा है। अचानक से से मौसम में बढ़ी ठंड से किसान परेशानी में आ गए हैं। तीन-चार दिनों से लगातार बर्फीली हवाएं चल रही हैं। पाला भी गिरने लगा है। ऐसे में किसानों को फसल में झुलसा लगने की चिंता होने लगी है।
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आलू की पत्तियां काली पड़ने लगी हैं। अब इसके लिए किसान दवा आदि के इंतजाम में जुट गए हैं। पाला गिरने से आलू की फसल में झुलसा शुरू हो गई है। सबसे अधिक नुकसान उस आलू में होगा, जिसकी बुवाई देरी से हुई है। अगर जल्द ही मौसम साफ न हुआ तो आलू में नुकसान होगा। आलू में सबसे बड़ा रोग झुलसा रोग होता है। इसमें सर्दी के चलते आलू की बेल खराब होने लगती है। सबसे पहले बेल के कुछ पत्ते सिकुड़ने लगते हैं। धीरे-धीरे पूरी बेल सूख जाती है और आलू का विकास रुक जाता है। ऐसे में आलू पूरी तरह खराब हो जाता है।
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जानकारों के अनुसार मौसम आलू के लिए बेहतर नहीं है। ऐसे में अगर आलू में झुलसा रोग फैल जाता है, तो किसानों के लिए मुश्किल खड़ी हो जाएगी। किसानों के लिए आलू की लागत भी निकालना मुश्किल होगा। आलू की बुवाई में अब तक सात से नौ हजार रुपये प्रति बीघा का खर्च आ चुका है। ऐसे में अब किसान कहीं के नहीं रहेंगे।
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वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. एके सिंह ने कहा कि झुलसा से आलू का बचाव करने के लिए हल्की सिंचाई सबसे बेहतर साधन है। जब तक खेत में नमी बनी रहती है, तब तक पाले का प्रभाव नहीं पड़ता।