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हाथरस : आलू की कम पैदावार व गिरते भाव से किसान चिंतित
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हाथरस : खेतों में आलू की खोदाई और छंटाई करते किसान। संवाद
- फोटो : SHAPHU
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहपऊ/ सादाबाद।
क्षेत्र में आलू की खुदाई की खुदाई व छंटाई का काम प्रारंभ हो चुका है। वहीं, आलू की पैदावार कम होने और बाजार में भाव कम होने से किसान काफी चिंतित दिखाई दे रहे हैं।
किसानों का कहना है कि खेतों में पहले तो आलू कम निकल रहा है। वहीं, इस बात का डर भी है कि पता नहीं मौसम कब करवट बदल ले। अगर, बारिश हुई तो पूरे मेहनत पर पानी फिर जाएगा। इधर, बाजार में भी आलू का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। मजबूर होकर आलू को शीतगृह में रखना पड़ रहा है।
- पहले तो खेतों में आलू कम निकल रहे हैं। इधर खेतों में आलू खोदने एवं छंटाई करने वाले मजदूर भी काफी पैसे ले रहे हैं। मजबूरी वश आलू तो खोदना ही पड़ेगा।
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- गंभीर सिंह, किसान मंस्या खुर्द
- अभी तो आलू की खुदाई में मिट्टी साथ निकल रही है। खेतों में औसतन 35-40 कट्टा प्रति बीघा निकल रहा है जो उम्मीद से काफी कम है। ऐसी पैदावर से हम लोगों की लागत भी नहीं निकल पा रही। - रंगेश, किसान, मंस्या
- आलू खुदाई के अब ट्रैक्टर भी मिलना मुश्किल हो रहा है। मजदूर भी नहीं मिल पा रहे। जो मिल रहे है वह मुंह मांगा पैसा मांगते हैं। मजबूरी में बढ़ी हुई मजदूरी पर लोगों से काम कराना पड़ रहा है।
- विनीश, किसान, मंस्या
- मजदूरों ने अपनी मजदूरी तो बढ़ा ही दी है। बाजार में भी आलू के दाम काफी गिर गए हैं। हम लोगों को इस समय काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। सरकार चुनाव में व्यस्त है। हमारी कोई सुनने वाला नहीं है। - राधेश्याम, किसान, मंस्या
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क्षेत्र में आलू की खुदाई की खुदाई व छंटाई का काम प्रारंभ हो चुका है। वहीं, आलू की पैदावार कम होने और बाजार में भाव कम होने से किसान काफी चिंतित दिखाई दे रहे हैं।
किसानों का कहना है कि खेतों में पहले तो आलू कम निकल रहा है। वहीं, इस बात का डर भी है कि पता नहीं मौसम कब करवट बदल ले। अगर, बारिश हुई तो पूरे मेहनत पर पानी फिर जाएगा। इधर, बाजार में भी आलू का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। मजबूर होकर आलू को शीतगृह में रखना पड़ रहा है।
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- पहले तो खेतों में आलू कम निकल रहे हैं। इधर खेतों में आलू खोदने एवं छंटाई करने वाले मजदूर भी काफी पैसे ले रहे हैं। मजबूरी वश आलू तो खोदना ही पड़ेगा।
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- गंभीर सिंह, किसान मंस्या खुर्द
- अभी तो आलू की खुदाई में मिट्टी साथ निकल रही है। खेतों में औसतन 35-40 कट्टा प्रति बीघा निकल रहा है जो उम्मीद से काफी कम है। ऐसी पैदावर से हम लोगों की लागत भी नहीं निकल पा रही। - रंगेश, किसान, मंस्या
- आलू खुदाई के अब ट्रैक्टर भी मिलना मुश्किल हो रहा है। मजदूर भी नहीं मिल पा रहे। जो मिल रहे है वह मुंह मांगा पैसा मांगते हैं। मजबूरी में बढ़ी हुई मजदूरी पर लोगों से काम कराना पड़ रहा है।
- विनीश, किसान, मंस्या
- मजदूरों ने अपनी मजदूरी तो बढ़ा ही दी है। बाजार में भी आलू के दाम काफी गिर गए हैं। हम लोगों को इस समय काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। सरकार चुनाव में व्यस्त है। हमारी कोई सुनने वाला नहीं है। - राधेश्याम, किसान, मंस्या