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हाथरस : धमकी देने और भयभीत करने का आरोप झूठा और मनगढ़ंत
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हाथरस : पत्रकारों से वार्ता करते स्थानीय अधिवक्ता।
- फोटो : HATHRAS
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश कुमार शर्मा, डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष लक्ष्मीकांत सारस्वत व मुन्ना सिंह पुंढीर ने कहा है कि बहुचर्चित प्रकरण में मृतका के भाई व इस पक्ष की अधिवक्ता सीमा कुशवाहा द्वारा स्थानीय अधिवक्ताओं पर धमकी देने और भयभीत करने का जो आरोप लगाया गया है, वह पूरी तरह से आधारहीन और मनगढ़ंत है। यह अधिवक्ता यहां बार सभागार में पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। यह तीनों अधिवक्ता अभियुक्त पक्ष के भी वकील हैं।
पत्रकारों से वार्ता करते हुए इन अधिवक्ताओं ने कहा कि पांच मार्च को इस तरह की कोई घटना न्यायालय में नहीं हुई। न्यायालय में इस तरह की घटना संभव भी नहीं है। सीआरपीएफ की भारी सुरक्षा और स्थानीय पुलिस के प्रबंधों के तहत शाम पौने छह बजे तक वादी का बयान न्यायालय में रिकॉर्ड हुआ है।
इन अधिवक्ताओं का कहना है कि सीमा कुशवाहा इस प्रकरण को हाथरस न्यायालय से बाहर ट्रांसफर कराना चाहती हैं, इसलिए 18 मार्च को फर्जी घटना को लेकर कोई पत्र सौंपा गया है। यदि पांच मार्च को कोई घटना हुई होती तो सीमा कुशवाहा द्वारा न्यायालय अथवा पुलिस प्रशासन को कोई पत्र प्रेषित कर, मिलकर, मौखिक अथवा टेलीफोन के माध्यम से शिकायत की गई होती, इसलिए स्थानीय अधिवक्ताओं पर यह आरोप झूठे और बेबुनियाद हैं।
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वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश कुमार शर्मा, डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष लक्ष्मीकांत सारस्वत व मुन्ना सिंह पुंढीर ने कहा है कि बहुचर्चित प्रकरण में मृतका के भाई व इस पक्ष की अधिवक्ता सीमा कुशवाहा द्वारा स्थानीय अधिवक्ताओं पर धमकी देने और भयभीत करने का जो आरोप लगाया गया है, वह पूरी तरह से आधारहीन और मनगढ़ंत है। यह अधिवक्ता यहां बार सभागार में पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। यह तीनों अधिवक्ता अभियुक्त पक्ष के भी वकील हैं।
पत्रकारों से वार्ता करते हुए इन अधिवक्ताओं ने कहा कि पांच मार्च को इस तरह की कोई घटना न्यायालय में नहीं हुई। न्यायालय में इस तरह की घटना संभव भी नहीं है। सीआरपीएफ की भारी सुरक्षा और स्थानीय पुलिस के प्रबंधों के तहत शाम पौने छह बजे तक वादी का बयान न्यायालय में रिकॉर्ड हुआ है।
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इन अधिवक्ताओं का कहना है कि सीमा कुशवाहा इस प्रकरण को हाथरस न्यायालय से बाहर ट्रांसफर कराना चाहती हैं, इसलिए 18 मार्च को फर्जी घटना को लेकर कोई पत्र सौंपा गया है। यदि पांच मार्च को कोई घटना हुई होती तो सीमा कुशवाहा द्वारा न्यायालय अथवा पुलिस प्रशासन को कोई पत्र प्रेषित कर, मिलकर, मौखिक अथवा टेलीफोन के माध्यम से शिकायत की गई होती, इसलिए स्थानीय अधिवक्ताओं पर यह आरोप झूठे और बेबुनियाद हैं।
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