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हाथरस : बिना लाइसेंस चल रही थी फैक्टरी, सीज
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सासनी (हाथरस)
ग्रामीणों की शिकायत पर उपजिलाधिकारी विजय कुमार शर्मा ने शुक्रवार को खाद्य सुरक्षा विभाग एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम के साथ बिलखौरा एवं सहजपुरा के जंगलों में अवैध रूप से संचालित कलमी सोडा बनाने की फैक्टरी पर छापा मारा। छापे में काफी मात्रा में बना एवं अधबना कलमी सोडा एवं रासायनिक एसिड मौके पर मिला। टीम को देखकर संचालक मौके से फरार हो गए। मौके पर दो मजदूर मिले। कोई कागजात नहीं पाया गया। मौके पर मिले सामान की गिनती कर फैक्टरी को सीज कर दिया गया। बिना लाइसेंस के फैक्टरी को दिए गए कनेक्शन को भी काटने के निर्देश अधिशासी अभियंता विद्युत को दिए गए।
दरअसल, शुक्रवार को ग्रामीणों की शिकायत पर एसडीएम विजय शर्मा, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहायक विज्ञान अधिकारी बीके राजपूत एवं सहायक धीरेश कुमार तथा खाद्य विभाग के राकेश कुमार एवं मुनेंद्र सिंह की संयुक्त टीम ने कलमी सोडा बनाने की फैक्टरी पर छापा मारा। संचालकों के पास न तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एनओसी थी और न ही जिला उद्योग केंद्र का पंजीकरण प्रमाणपत्र था।
मौके पर अवैध रूप से फैक्टरी के अंदर गड्ढा खोदकर केमिकलयुक्त पानी जमीन के अंदर डाला जा रहा था। बिना किसी ट्रीटमेंट के गंदा पानी गंदे नाले में बहाया जा रहा था। मौके पर चिलर प्लांट भी संचालित मिला। सोडियम कारबोनेट के 34 पैकेट मौके पर पाए गए। करीब 10 टन लकड़ी भी मौके पर पड़ी थी। भट्ठियां भी संचालित थीं, जिनमें कलमी सोडा बनाया जा रहा था।
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अहम सवाल यह है कि बिना उद्योग प्रमाणपत्र के विद्युत विभाग द्वारा फैक्टरी को कनेक्शन कैसे दे दिया गया। फैक्ट्री में भारी मात्रा में खतरनाक केमिकल पाए गए। तेजाब युक्त पानी को भू गर्भ एवं गंदे नाले में बहाया जा रहा है। मौके पर सैकड़ों प्लास्टिक के ड्रम एसिड एवं रसायन से भरे हुए पाए गए। खतरनाक केमिकल जनजीवन के लिए घातक बताया जा रहा है। इस कारण फैक्टरी को सीज कर दिया गया। मौके पर 640 ड्राम रसायन युक्त तथा 100 ड्राम खाली पाए गए।
एसडीएम विजय शर्मा का कहना है कि फैक्टरी में घातक केमिकल का प्रयोग किया जा रहा था, जो जनजीवन के लिए घातक थे। संचालक कोई प्रमाणपत्र नहीं दिखा सके। इस कारण फैक्टरी को सीज कर दिया गया है। एक्सईएन विद्युत को फैक्टरी का कनेक्शन काटने के निर्देश दिए गए हैं। प्रदूषण नियत्रंण बोर्ड की टीम का कहना है कि फैक्टरी संचालकों पर विभाग का अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) भी नहीं थी।
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ग्रामीणों की शिकायत पर उपजिलाधिकारी विजय कुमार शर्मा ने शुक्रवार को खाद्य सुरक्षा विभाग एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम के साथ बिलखौरा एवं सहजपुरा के जंगलों में अवैध रूप से संचालित कलमी सोडा बनाने की फैक्टरी पर छापा मारा। छापे में काफी मात्रा में बना एवं अधबना कलमी सोडा एवं रासायनिक एसिड मौके पर मिला। टीम को देखकर संचालक मौके से फरार हो गए। मौके पर दो मजदूर मिले। कोई कागजात नहीं पाया गया। मौके पर मिले सामान की गिनती कर फैक्टरी को सीज कर दिया गया। बिना लाइसेंस के फैक्टरी को दिए गए कनेक्शन को भी काटने के निर्देश अधिशासी अभियंता विद्युत को दिए गए।
दरअसल, शुक्रवार को ग्रामीणों की शिकायत पर एसडीएम विजय शर्मा, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहायक विज्ञान अधिकारी बीके राजपूत एवं सहायक धीरेश कुमार तथा खाद्य विभाग के राकेश कुमार एवं मुनेंद्र सिंह की संयुक्त टीम ने कलमी सोडा बनाने की फैक्टरी पर छापा मारा। संचालकों के पास न तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एनओसी थी और न ही जिला उद्योग केंद्र का पंजीकरण प्रमाणपत्र था।
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मौके पर अवैध रूप से फैक्टरी के अंदर गड्ढा खोदकर केमिकलयुक्त पानी जमीन के अंदर डाला जा रहा था। बिना किसी ट्रीटमेंट के गंदा पानी गंदे नाले में बहाया जा रहा था। मौके पर चिलर प्लांट भी संचालित मिला। सोडियम कारबोनेट के 34 पैकेट मौके पर पाए गए। करीब 10 टन लकड़ी भी मौके पर पड़ी थी। भट्ठियां भी संचालित थीं, जिनमें कलमी सोडा बनाया जा रहा था।
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अहम सवाल यह है कि बिना उद्योग प्रमाणपत्र के विद्युत विभाग द्वारा फैक्टरी को कनेक्शन कैसे दे दिया गया। फैक्ट्री में भारी मात्रा में खतरनाक केमिकल पाए गए। तेजाब युक्त पानी को भू गर्भ एवं गंदे नाले में बहाया जा रहा है। मौके पर सैकड़ों प्लास्टिक के ड्रम एसिड एवं रसायन से भरे हुए पाए गए। खतरनाक केमिकल जनजीवन के लिए घातक बताया जा रहा है। इस कारण फैक्टरी को सीज कर दिया गया। मौके पर 640 ड्राम रसायन युक्त तथा 100 ड्राम खाली पाए गए।
एसडीएम विजय शर्मा का कहना है कि फैक्टरी में घातक केमिकल का प्रयोग किया जा रहा था, जो जनजीवन के लिए घातक थे। संचालक कोई प्रमाणपत्र नहीं दिखा सके। इस कारण फैक्टरी को सीज कर दिया गया है। एक्सईएन विद्युत को फैक्टरी का कनेक्शन काटने के निर्देश दिए गए हैं। प्रदूषण नियत्रंण बोर्ड की टीम का कहना है कि फैक्टरी संचालकों पर विभाग का अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) भी नहीं थी।