{"_id":"609049ed8ebc3e8da90d7a59","slug":"hathras-every-team-battling-rebels-and-murderers-hathras-news-ali262386986","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाथरस : हर दल जूझा बागियों और भितघातियों से","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाथरस : हर दल जूझा बागियों और भितघातियों से
विज्ञापन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हर पार्टी पंचायत चुनाव में बागियों से जूझी और बागी नेताओं ने पार्टी समर्थित कई प्रत्याशियों की नैया डुबो दी। भाजपा, सपा और बसपा सभी दल इस चुनाव में भितरघात से जूझे। स्थिति यह हो गई कि कई दलों के तो बागी नेता जीत गए, लेकिन पार्टी समर्थित उम्मीदवार हार गए। कुछ बागी नेता खुद भी हार गए और साथ में पार्टी समर्थित उम्मीदवारों को भी हरा दिया। भाजपा के तो कई बागी प्रत्याशी जीत भी गए।
जिले की सबसे हॉट सीट वार्ड नंबर 14 पर लंबे समय से डॉ. अविन शर्मा अपनी पत्नी क्षमा शर्मा के लिए टिकट मांग रहे थे, लेकिन क्षमा शर्मा को जब पार्टी ने अपना समर्थन नहीं दिया तो अविन ने बगावत कर अपनी पत्नी को मैदान में उतार दिया। पार्टी ने मुकुल उपाध्याय की पत्नी ऋतु को टिकट दे दिया। इसका नतीजा यह हुआ कि वहां से न क्षमा शर्मा जीतीं और न ही ऋतु। सीमा उपाध्याय का जादू बरकरार रहा और निर्दलीय होते हुई भी उन्होंने अपनी सीट निकाल ली।
सपा में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष ओमवती यादव के सामने पार्टी के ही नेता युवराज यादव मैदान में खड़े हो गए। नतीजा यह हो गया कि न युवराज जीते और न ओमवती। जीत तीसरे उम्मीदवार को मिली। भाजपा ने बगावत कर वार्ड नंबर तीन से चुनाव लड़ रहे सोनू चौहान को पार्टी से निष्कासित कर दिया, लेकिन सोनू पार्टी से बगावत कर भी जीत गए। इसी तरह पार्टी की बागी प्रत्याशी रानू जादौन भी चुनाव जीत गईं। वार्ड नंबर पांच से पार्टी के बागी नेता सोमेश यादव की मां सुशीला देवी चुनाव जीत गईं। अन्य दलों में भी ऐसा ही हुआ। यह दल अपने कार्यकर्ताओं व क्षेत्र की जनता की नब्ज नहीं पहचान पाए और इन्हें नुकसान उठाना पड़ा।
विज्ञापन
विज्ञापन
हर पार्टी पंचायत चुनाव में बागियों से जूझी और बागी नेताओं ने पार्टी समर्थित कई प्रत्याशियों की नैया डुबो दी। भाजपा, सपा और बसपा सभी दल इस चुनाव में भितरघात से जूझे। स्थिति यह हो गई कि कई दलों के तो बागी नेता जीत गए, लेकिन पार्टी समर्थित उम्मीदवार हार गए। कुछ बागी नेता खुद भी हार गए और साथ में पार्टी समर्थित उम्मीदवारों को भी हरा दिया। भाजपा के तो कई बागी प्रत्याशी जीत भी गए।
जिले की सबसे हॉट सीट वार्ड नंबर 14 पर लंबे समय से डॉ. अविन शर्मा अपनी पत्नी क्षमा शर्मा के लिए टिकट मांग रहे थे, लेकिन क्षमा शर्मा को जब पार्टी ने अपना समर्थन नहीं दिया तो अविन ने बगावत कर अपनी पत्नी को मैदान में उतार दिया। पार्टी ने मुकुल उपाध्याय की पत्नी ऋतु को टिकट दे दिया। इसका नतीजा यह हुआ कि वहां से न क्षमा शर्मा जीतीं और न ही ऋतु। सीमा उपाध्याय का जादू बरकरार रहा और निर्दलीय होते हुई भी उन्होंने अपनी सीट निकाल ली।
विज्ञापन
सपा में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष ओमवती यादव के सामने पार्टी के ही नेता युवराज यादव मैदान में खड़े हो गए। नतीजा यह हो गया कि न युवराज जीते और न ओमवती। जीत तीसरे उम्मीदवार को मिली। भाजपा ने बगावत कर वार्ड नंबर तीन से चुनाव लड़ रहे सोनू चौहान को पार्टी से निष्कासित कर दिया, लेकिन सोनू पार्टी से बगावत कर भी जीत गए। इसी तरह पार्टी की बागी प्रत्याशी रानू जादौन भी चुनाव जीत गईं। वार्ड नंबर पांच से पार्टी के बागी नेता सोमेश यादव की मां सुशीला देवी चुनाव जीत गईं। अन्य दलों में भी ऐसा ही हुआ। यह दल अपने कार्यकर्ताओं व क्षेत्र की जनता की नब्ज नहीं पहचान पाए और इन्हें नुकसान उठाना पड़ा।
विज्ञापन