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हाथरस : दुश्वारी : न ट्रेनें रुकती हैं, न बसें चलती हैं, कैसे पनपें उद्योग

Tue, 20 Dec 2022 11:15 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 20 Dec 2022 11:15 PM IST
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Hathras: Dushwari: Neither trains stop, nor buses run, how the industry flourishes
हाथरस : हाथरस जंक्शन स्टेशन। संवाद - फोटो : HATHRAS
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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पूरे साल यह जिला परिवहन की बेहतर व्यवस्थाओं का मोहताज रहा। कई अहम ट्रेनों का इस साल की जिले में ठहराव नहीं हुआ तो रोडवेज बसें भी पर्याप्त संख्या में यहां से संचालित नहीं हुईं। इसकी वजह से यात्री पूरी साल परेशान रहे। यहां के लोगों के दूरस्थ बड़े शहर जाने के लिए निकट के जिलों में जाना पड़ा। वहीं से उन्हें ट्रेनें व बसें मिलीं।
हाथरस औद्योगिक शहर है, लेकिन यहां परिवहन के पर्याप्त साधन नहीं है। रेलवे यहां के कारोबारियों को पर्याप्त पार्सल सेवा भी नहीं दे पा रहा है। इस कारण माल की डिलीवरी भी देरी से हो रही है। इस कारण यहां के उद्योग रफ्तार नहीं पकड़ पा रहे हैं। संवाद
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12 रोडवेज बसें खराब खड़ी हैं कार्यशाला में
हाथरस डिपो में वर्तमान में 77 बसें हैं। इसमें से एक दर्जन बसें सामान के अभाव में कार्यशाला से बाहर नहीं निकल पा रही हैं। जो बसें मार्गों पर चल रही हैं, वह आए-दिन बीच रास्ते में धोखा दे रही हैं। अधिकांश बसों में सेल्फ व बैटरी की दिक्कत हैं। इस कारण यात्रियों को बसों में धक्का भी लगाना पड़ता है। राजस्थान अन्य प्रदेशों में परमिट के चलते संचालन नहीं हो रहा है। यह स्थिति पूरी साल रही और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
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हाथरस जंक्शन रेलवे स्टेशन पर नहीं रुकीं महत्वपूर्ण ट्रेनें
हाथरस जंक्शन स्टेशन पर कोरोना काल से पहले महानंदा, कालका और मूरी आदि ट्रेनों का ठहराव होता था। कोरोना काल के सालों गुजरने के बाद आज तक एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव नहीं हो सका है। इसके अलावा हाथरस सिटी रेलवे स्टेशन से बांद्रा टर्मिनल और छपरा का संचालन हो रहा है। अब सर्दी के चलते छपरा एक्सप्रेस को भी बुधवार रद कर दिया गया। इस कारण जिले के लोगों को ट्रेनों में सवार होने के लिए पड़ोसी जिलों की दूरी तय करनी पड़ रही है। ऐसे में साल भर यहां के लोगों को दूर के बड़े शहर जाने के लिए अलीगढ़ या मथुरा ही जाना पड़ा।
शहर के अंदर नहीं आईं रोडवेज बसें, यात्री रहे परेशान
शहर के लोग इस वजह से भी परेशान रहे कि काफी रोडवेज बसें शहर के अंदर नहीं आईं। बाईपास से ही इन बसों को निकाला जाता रहा। यहां के यात्रियों के सामने यह अहम समस्या रही। इसे लेकर कई बार हंगामा भी हुआ। यात्रियों को बसों की किल्लत का सामना करना पड़ा। इसके अलावा सिकंदराराऊ में इस साल भी रोडवेज बस स्टैंड का निर्माण नहीं हुआ। वहां के लोग भी इसकी वजह से काफी परेशान रहे।
मुसाफिरों का दर्द
हाथरस से लंबी दूरी तय करने के लिए हाथरस जंक्शन से ट्रेन मिलती थी। अब कोरोना काल से ट्रेनों का ठहराव बंद हो गया है। इस कारण गंतव्य की दूरी तय करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
-राहुल चौधरी
कोरोना काल से पहले मूरी और कालका आदि ट्रेनों का संचालन होता था। अब कोरोना काल खत्म होने के बाद भी ट्रेनें वही पुराने ढर्रे पर चल रही है। इस कारण पड़ोसी जिलो से ट्रेनों में सवार होना पड़ रहा है।
-लक्ष्मीराज सिंह।
रोडवेज बसों के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। जो बसें चल रही हैं, वह भी आए-दिन बीच रास्ते में साथ छोड़ देती हैं। गंतव्य तक जाने के लिए बसों का कई घंटे इंतजार करना पड़ता है। तब जाकर बस मिलती है।
-मतेंद्र सिंह गहलोत
हाथरस डिपो की बसें भगवान भरोसे चल रही हैं। अन्य डिपो की बसें बाईपास से गुजर जाती हैं। इस कारण लंबे व लोकल रूटों पर दूरी तय करने के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

-राघवेंद्र सिंह
कालका, महानंदा और मूरी एक्सप्रेस के ठहराव के लिए रेलवे अधिकारियों को पत्र लिखा गया है। कोलकाता, आगरा कैंट, भागलपुर-गांधीधाम एक्सप्रेस, टनकपुर से मथुरा जंक्शन की अवधि को आगे बढ़ाने के लिए रेलवे अधिकारियों को पत्र लिखा गया है। यात्री सुविधाओं के लिए पूरे प्रयास किए जा रहे हैं।
-राजवीर दिलेर, सांसद
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