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Hathras News: मंडी में कच्ची परची पर पक्का गोलमाल
Wed, 30 Sep 2026 02:32 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Wed, 30 Sep 2026 02:32 AM IST
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मंडी के गेट से बिना तौल के ट्रैक्टरों में लदकर अंदर जाता धान। संवाद
- फोटो : Samvad
राघवेंद्र प्रताप सिंह
हाथरस। कृषि उत्पादन मंडी कच्ची परची पर गोलमाल का पक्का खेल चल रहा है। यहां सरकारी नियम दरकिनार हैं। मंडी आने वाली गाड़ियों के लिए मुख्य प्रवेश द्वार पर कोई गेट पास नहीं काटा जा रहा। किस गाड़ी में कितना माल आया, इसका कोई सरकारी रिकॉर्ड दर्ज नहीं हो रहा है। गाड़ी का धर्मकांटे पर तौल तक नहीं कराया जा रहा है। पूरी व्यवस्था कच्ची परची और व्यापारियों के अंदाजे पर चल रही है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट...
कृषि उत्पादन मंडी समिति के गेट पर प्रवेश परची की हकीकत जानने के लिए संवाद न्यूज एजेंसी की टीम सुबह 7 बजे पहुंची। धर्मकांटे के बगल में गार्ड कॉपी-पेन लिए बैठा था। गेट पर कोई बैरियर नहीं था।
आधा घंटे के बीच गेट से 23 ट्रैक्टर, लोडर व ई-रिक्शा धान व कपास लेकर अंदर गए लेकिन किसी ने न तो वाहनों को रोका, न ही प्रवेश की परची काटी। 7.30 बजे के बाद जैसे टीम ने फोटो खींचना शुरू किया तो मंडी के कर्मचारियों में खलबली मच गई। प्रवेश के दौरान हर वाहन को रोका जाने लगा। इसके बाद 15 मिनट में गार्ड ने आठ किसानों के नाम लिख डाले हालांकि, इसके बाद भी प्रवेश की पक्की परची नहीं काटी गई। (संवाद)
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कॉपी पर न तिथि और न समय
शुरुआत में गार्ड की कॉपी पर क्रम संख्या 53 लिखा था। आखिर में 61 तक एंट्री की गई। सादी कॉपी पर किसान और उसके गांव का नाम, माल का वजन दर्ज किया जा रहा था। बाहर खड़े किसान ने जो वजन बताया, गार्ड ने उसे दर्ज कर लिया। धर्मकांटा चालू होने के बावजूद वजन नहीं देखा गया। एक घंटे में 41 वाहन गुजरे, लेकिन किसी को प्रवेश परची नहीं दी गई। ऐसे में कुल माल का कोई रिकॉर्ड नहीं दर्ज हुआ। गार्ड ने तर्क दिया कि रजिस्टर देखकर बाद में परची काट जाती है।
एक दिन पहले कॉपी भी नदारद
मंगलवार से पहले सोमवार दोपहर को भी टीम व्यवस्था जांचने पहुंची थी। दोपहर को गार्ड पेड़ की छांव में बैठे हुए थे। धान व कपास लदे वाहन बेरोक-टोक अंदर जा रहे थे। 15 मिनट के अंतराल में पांच वाहन गुजरे थे, लेकिन किसी की एंट्री नहीं की गई और न ही प्रवेश परची काटी गई। जब मंडी सहायक विक्रम सिंह से प्रवेश परची के बारे में जानकारी की गई तो उन्होंने बताया था कि 70 परचियां काटी जा चुकी हैं।
इतने तरीके से मंडी में चल रहा है खेल
मंडी शुल्क की चोरी : मंडी समिति को हर बिक्री पर नियमानुसार एक से दो फीसदी तक मंडी शुल्क और विकास सेस मिलना चाहिए। गेट पास न बनने से मंडी में आने वाली आधी से ज्यादा गाड़ियों की आधिकारिक एंट्री ही नहीं होती। कागजों में माल कम दिखाकर व्यापारी सीधे तौर पर सरकार को मिलने वाले राजस्व (मंडी कर, जीएसटी और आयकर) की चोरी कर रहे हैं।
दाम गिराने का हथियार...आज आवक ज्यादा है : जब मंडी में आवक का कोई पारदर्शी और पक्का रिकॉर्ड नहीं होता। ऐसे में आढ़ती और व्यापारी इसे किसानों के खिलाफ हथियार की तरह इस्तेमाल करते हैं। सुबह मंडी पहुंचते ही किसान से कह दिया जाता है कि आज तो मंडी में माल की आवक ज्यादा है और खरीदार कम। इसके बाद मजबूरी में किसान अपनी उपज को औने-पौने दाम (कम भाव) पर बेचने के लिए मजबूर हो जाते हैं।
कच्ची परची से किसानों को नुकसान : किसानों को फसल बेचने के बाद सरकारी जे-फार्म (पक्की बिक्री रसीद) देने के बजाय हाथ से लिखी कच्ची परची थमाई जा रही है। इसका सबसे बड़ा नुकसान ये है कि यदि किसान से कोई धोखाधड़ी होती है तो उसके पास मंडी समिति में शिकायत करने के लिए कोई पुख्ता सबूत ही नहीं होता।
डिजिटल सिस्टम पर ताला : मंडी में पारदर्शिता और पक्का लेखा-जोखा के लिए लाखों रुपये की लागत से डिजिटल सिस्टम बनाया गया। फिलहाल इस सिस्टम के तहत लगे इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले बोर्ड, वे-ब्रिज (धर्मकांटा) और कंप्यूटर केवल नाम के हैं। आज भी मैनुअल और कच्चा काम चल रहा है जिससे व्यापारी कमा रहे हैं लेकिन सरकार को राजस्व का चूना लग रहा है।
ये है मंडी में प्रवेश का नियम
जब कोई किसान अपनी फसल लेकर मंडी के प्रवेश द्वार पर पहुंचता है तो सबसे पहले उसकी गाड़ी के लिए आधिकारिक गेट पास जारी किया जाता है। फिर इलेक्ट्रॉनिक धर्मकांटे पर माल का वजन दर्ज होता है। मंडी समिति के डिजिटल बोर्ड पर दैनिक आवक का सटीक आंकड़ा जारी किया जाता है, जिससे किसान को पता रहे कि आज मंडी में क्या और कितना आया है। इसका उद्देश्य है कि आवक की जानकारी पर किसान अपने माल का उचित मूल्य लगाए और बेच। इसके साथ ही सौदे के बाद सरकार को सही मंडी शुल्क मिले।
गोलमोल जवाब देते रहे मंडी सचिव
मंडी सचिव अनिल कुमार यह मानने को तैयार ही नहीं हैं कि एंट्री, तौल और परची में खेल चल रहा है। संवाद न्यूज एजेंसी ने जब दावा किया कि उन्होंने यह पूरा खेल देखा है और इसके प्रमाण हैं तो उन्होंने कहा कि हो सकता है कोई किसान एक-दो बोरी लेकर बिना एंट्री कराए चला गया हो। अन्य गड़बड़ियों पर मंडी सचिव गोलमोल जवाब देते रहे। उन्होंने दावा किया कि मुख्य गेट से माल ले जाने वालों की परची काटी जा रही है। पीछे का गेट बंद रखा जाता है। उन्होंने ये भी कहा कि प्रत्येक किसान को पक्का बिल देने का प्रावधान है। यदि किसी को परची नहीं मिल रही तो वह शिकायत कर सकता है।
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हाथरस। कृषि उत्पादन मंडी कच्ची परची पर गोलमाल का पक्का खेल चल रहा है। यहां सरकारी नियम दरकिनार हैं। मंडी आने वाली गाड़ियों के लिए मुख्य प्रवेश द्वार पर कोई गेट पास नहीं काटा जा रहा। किस गाड़ी में कितना माल आया, इसका कोई सरकारी रिकॉर्ड दर्ज नहीं हो रहा है। गाड़ी का धर्मकांटे पर तौल तक नहीं कराया जा रहा है। पूरी व्यवस्था कच्ची परची और व्यापारियों के अंदाजे पर चल रही है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट...
कृषि उत्पादन मंडी समिति के गेट पर प्रवेश परची की हकीकत जानने के लिए संवाद न्यूज एजेंसी की टीम सुबह 7 बजे पहुंची। धर्मकांटे के बगल में गार्ड कॉपी-पेन लिए बैठा था। गेट पर कोई बैरियर नहीं था।
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आधा घंटे के बीच गेट से 23 ट्रैक्टर, लोडर व ई-रिक्शा धान व कपास लेकर अंदर गए लेकिन किसी ने न तो वाहनों को रोका, न ही प्रवेश की परची काटी। 7.30 बजे के बाद जैसे टीम ने फोटो खींचना शुरू किया तो मंडी के कर्मचारियों में खलबली मच गई। प्रवेश के दौरान हर वाहन को रोका जाने लगा। इसके बाद 15 मिनट में गार्ड ने आठ किसानों के नाम लिख डाले हालांकि, इसके बाद भी प्रवेश की पक्की परची नहीं काटी गई। (संवाद)
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कॉपी पर न तिथि और न समय
शुरुआत में गार्ड की कॉपी पर क्रम संख्या 53 लिखा था। आखिर में 61 तक एंट्री की गई। सादी कॉपी पर किसान और उसके गांव का नाम, माल का वजन दर्ज किया जा रहा था। बाहर खड़े किसान ने जो वजन बताया, गार्ड ने उसे दर्ज कर लिया। धर्मकांटा चालू होने के बावजूद वजन नहीं देखा गया। एक घंटे में 41 वाहन गुजरे, लेकिन किसी को प्रवेश परची नहीं दी गई। ऐसे में कुल माल का कोई रिकॉर्ड नहीं दर्ज हुआ। गार्ड ने तर्क दिया कि रजिस्टर देखकर बाद में परची काट जाती है।
एक दिन पहले कॉपी भी नदारद
मंगलवार से पहले सोमवार दोपहर को भी टीम व्यवस्था जांचने पहुंची थी। दोपहर को गार्ड पेड़ की छांव में बैठे हुए थे। धान व कपास लदे वाहन बेरोक-टोक अंदर जा रहे थे। 15 मिनट के अंतराल में पांच वाहन गुजरे थे, लेकिन किसी की एंट्री नहीं की गई और न ही प्रवेश परची काटी गई। जब मंडी सहायक विक्रम सिंह से प्रवेश परची के बारे में जानकारी की गई तो उन्होंने बताया था कि 70 परचियां काटी जा चुकी हैं।
इतने तरीके से मंडी में चल रहा है खेल
मंडी शुल्क की चोरी : मंडी समिति को हर बिक्री पर नियमानुसार एक से दो फीसदी तक मंडी शुल्क और विकास सेस मिलना चाहिए। गेट पास न बनने से मंडी में आने वाली आधी से ज्यादा गाड़ियों की आधिकारिक एंट्री ही नहीं होती। कागजों में माल कम दिखाकर व्यापारी सीधे तौर पर सरकार को मिलने वाले राजस्व (मंडी कर, जीएसटी और आयकर) की चोरी कर रहे हैं।
दाम गिराने का हथियार...आज आवक ज्यादा है : जब मंडी में आवक का कोई पारदर्शी और पक्का रिकॉर्ड नहीं होता। ऐसे में आढ़ती और व्यापारी इसे किसानों के खिलाफ हथियार की तरह इस्तेमाल करते हैं। सुबह मंडी पहुंचते ही किसान से कह दिया जाता है कि आज तो मंडी में माल की आवक ज्यादा है और खरीदार कम। इसके बाद मजबूरी में किसान अपनी उपज को औने-पौने दाम (कम भाव) पर बेचने के लिए मजबूर हो जाते हैं।
कच्ची परची से किसानों को नुकसान : किसानों को फसल बेचने के बाद सरकारी जे-फार्म (पक्की बिक्री रसीद) देने के बजाय हाथ से लिखी कच्ची परची थमाई जा रही है। इसका सबसे बड़ा नुकसान ये है कि यदि किसान से कोई धोखाधड़ी होती है तो उसके पास मंडी समिति में शिकायत करने के लिए कोई पुख्ता सबूत ही नहीं होता।
डिजिटल सिस्टम पर ताला : मंडी में पारदर्शिता और पक्का लेखा-जोखा के लिए लाखों रुपये की लागत से डिजिटल सिस्टम बनाया गया। फिलहाल इस सिस्टम के तहत लगे इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले बोर्ड, वे-ब्रिज (धर्मकांटा) और कंप्यूटर केवल नाम के हैं। आज भी मैनुअल और कच्चा काम चल रहा है जिससे व्यापारी कमा रहे हैं लेकिन सरकार को राजस्व का चूना लग रहा है।
ये है मंडी में प्रवेश का नियम
जब कोई किसान अपनी फसल लेकर मंडी के प्रवेश द्वार पर पहुंचता है तो सबसे पहले उसकी गाड़ी के लिए आधिकारिक गेट पास जारी किया जाता है। फिर इलेक्ट्रॉनिक धर्मकांटे पर माल का वजन दर्ज होता है। मंडी समिति के डिजिटल बोर्ड पर दैनिक आवक का सटीक आंकड़ा जारी किया जाता है, जिससे किसान को पता रहे कि आज मंडी में क्या और कितना आया है। इसका उद्देश्य है कि आवक की जानकारी पर किसान अपने माल का उचित मूल्य लगाए और बेच। इसके साथ ही सौदे के बाद सरकार को सही मंडी शुल्क मिले।
गोलमोल जवाब देते रहे मंडी सचिव
मंडी सचिव अनिल कुमार यह मानने को तैयार ही नहीं हैं कि एंट्री, तौल और परची में खेल चल रहा है। संवाद न्यूज एजेंसी ने जब दावा किया कि उन्होंने यह पूरा खेल देखा है और इसके प्रमाण हैं तो उन्होंने कहा कि हो सकता है कोई किसान एक-दो बोरी लेकर बिना एंट्री कराए चला गया हो। अन्य गड़बड़ियों पर मंडी सचिव गोलमोल जवाब देते रहे। उन्होंने दावा किया कि मुख्य गेट से माल ले जाने वालों की परची काटी जा रही है। पीछे का गेट बंद रखा जाता है। उन्होंने ये भी कहा कि प्रत्येक किसान को पक्का बिल देने का प्रावधान है। यदि किसी को परची नहीं मिल रही तो वह शिकायत कर सकता है।