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हाथरस: सफल जीवन के लिए किसी की परीक्षा मत लो: रामभद्राचार्य महाराज
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हाथरस: 22 हाथरस में सनातन धर्म रत्न से स्वामी रामभद्राचार्य जी को सम्मानित करते सनातन मंदिर चेतना ?
- फोटो : HATHRAS
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सफल जीवन के लिए किसी की परीक्षा मत लो: रामभद्राचार्य महाराज
शहर के बागला कॉलेज के मैदान हो रहा श्रीरामकथा का आयोजन, उमड़ रही भीड़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हाथरस। शहर के बागला कालेज के मैदान पर पं. गयाप्रसाद जी की स्मृति में राष्ट्र को समर्पित श्रीराधा माधव सेवा समिति के तत्वावधान में चल रहे रामकथा महोत्सव में व्यासपीठ से तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज द्वारा विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया। कथा सुनकर श्रद्धालु भक्तिभाव मेें डूब गए। इस दौरान भक्ति से जुड़े सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए।
उन्होंने व्यासपीठ से प्रवचन करते हुए कहा कि संसार में सफल जीवन के लिए किसी की परीक्षा मत लो। परीक्षा करनी है तो संसार की करो अपनी समीक्षा करो। ताकि सुधर सको और दुर्गुणों से मुक्त होकर परम प्रभु की प्रतीक्षा करो वह निश्चित रूप से कृपा करेंगे। उन्होंने कहा कि इष्ट के प्रति निष्ठा ही फल प्रदान करती है। राघव को सहायता के लिए बाध्य करती है। जिनके जीवन में प्रेम और भक्ति है, उसी का जीवन चकाचक है बाकी तो सब कचाकच है।
जन मन गण की अद्भुत व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि अब देश में अधिनायकवाद नहीं है। यदि भारत माता का कोई अधिनायक है तो भारत भाग्य विधाता है। केवल राघवेंद्र सरकार भगवान श्रीराम है। इस राष्ट्रगीत में भी उन्हीं की स्तुति की गई है। उन्हीं के शुभ नाम से उनसे शुभ आशीष और जय की कामना की गई है।
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शहर के बागला कॉलेज के मैदान हो रहा श्रीरामकथा का आयोजन, उमड़ रही भीड़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हाथरस। शहर के बागला कालेज के मैदान पर पं. गयाप्रसाद जी की स्मृति में राष्ट्र को समर्पित श्रीराधा माधव सेवा समिति के तत्वावधान में चल रहे रामकथा महोत्सव में व्यासपीठ से तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज द्वारा विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया। कथा सुनकर श्रद्धालु भक्तिभाव मेें डूब गए। इस दौरान भक्ति से जुड़े सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए।
उन्होंने व्यासपीठ से प्रवचन करते हुए कहा कि संसार में सफल जीवन के लिए किसी की परीक्षा मत लो। परीक्षा करनी है तो संसार की करो अपनी समीक्षा करो। ताकि सुधर सको और दुर्गुणों से मुक्त होकर परम प्रभु की प्रतीक्षा करो वह निश्चित रूप से कृपा करेंगे। उन्होंने कहा कि इष्ट के प्रति निष्ठा ही फल प्रदान करती है। राघव को सहायता के लिए बाध्य करती है। जिनके जीवन में प्रेम और भक्ति है, उसी का जीवन चकाचक है बाकी तो सब कचाकच है।
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जन मन गण की अद्भुत व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि अब देश में अधिनायकवाद नहीं है। यदि भारत माता का कोई अधिनायक है तो भारत भाग्य विधाता है। केवल राघवेंद्र सरकार भगवान श्रीराम है। इस राष्ट्रगीत में भी उन्हीं की स्तुति की गई है। उन्हीं के शुभ नाम से उनसे शुभ आशीष और जय की कामना की गई है।
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