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हाथरस : कार्तिक पूर्णिमा पर मनाई जाएगी देव दिवाली
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
देवोत्थान एकादशी के मौके पर देवों को जगाने के बाद कार्तिक पूर्णिमा को श्रद्धालु देवताओं को प्रसन्न करेंगे। इस दिन दीपदान का खासा महत्व है। इस दिन दीपदान करने से परिवार में सुख समृद्धि व लाभ प्राप्त होता है। शुक्रवार को कार्तिक पूर्णिमा को बड़ी संख्या में भक्त गंगा घाटों के अलावा वृंदावन व मांट स्थित राधारानी दर्शन के लिए जाएंगे।
आचार्य सुरेंद्रनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि पौराणिक मान्यता के अनुसार कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि के दिन भगवान विष्णु का मत्स्यावतार हुआ था। इस वजह से यह तिथि धार्मिक दृष्टि से खास मानी जाती है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने और दान पुण्य करने का शास्त्रों में विशेष महत्व है। ऐसा भी माना जाता है कि इस दिन ही भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का अंत किया था। इस वजह से कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरारी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।
सिख धर्म में इस दिन को इसलिए खास माना जाता है, क्योंकि इसी दिन सिखों के प्रथम गुरु गुरुनानक देव का अवतरण हुआ था। उन्होंने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा तिथि 18 नवंबर को 12 बजकर 10 मिनट से शुरू होगी, जो कि अगले दिन 19 नवंबर को दो बजकर 20 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि होने के कारण 19 नवंबर को श्रद्धालु दानपुण्य कर सकते हैं। कार्तिक पूर्णिमा को अपनी क्षमता के अनुसार दान जरूर करना चाहिए। फल, गुड़, अनाज और वस्त्रों का भी दान करना चाहिए। पूर्णिमा का दिन मां लक्ष्मी को समर्पित माना गया है, इसलिए इस दिन मां लक्ष्मी की प्रिय वस्तुओं जैसे अक्षत, नारियल और दूध की मिठाइयों का दान करना सबसे शुभ माना जाता है। ऐसा करने से मां लक्ष्मी का वास घर में होता है। संवाद
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तुलसी पूजन करें
आचार्य सुरेंद्रनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को तुलसी पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। यदि देवप्रबोधिनी एकादशी पर तुलसी विवाह न कर पाए हों तो कार्तिक पूर्णिमा पर मां तुलसी का पूजन करके उन्हें सुहाग की वस्तुएं भेंट कर सकते हैं। ऐसा करने से आपके घर में सुख समृद्धि का आगमन होगा। भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं। संवाद
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देवोत्थान एकादशी के मौके पर देवों को जगाने के बाद कार्तिक पूर्णिमा को श्रद्धालु देवताओं को प्रसन्न करेंगे। इस दिन दीपदान का खासा महत्व है। इस दिन दीपदान करने से परिवार में सुख समृद्धि व लाभ प्राप्त होता है। शुक्रवार को कार्तिक पूर्णिमा को बड़ी संख्या में भक्त गंगा घाटों के अलावा वृंदावन व मांट स्थित राधारानी दर्शन के लिए जाएंगे।
आचार्य सुरेंद्रनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि पौराणिक मान्यता के अनुसार कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि के दिन भगवान विष्णु का मत्स्यावतार हुआ था। इस वजह से यह तिथि धार्मिक दृष्टि से खास मानी जाती है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने और दान पुण्य करने का शास्त्रों में विशेष महत्व है। ऐसा भी माना जाता है कि इस दिन ही भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का अंत किया था। इस वजह से कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरारी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।
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सिख धर्म में इस दिन को इसलिए खास माना जाता है, क्योंकि इसी दिन सिखों के प्रथम गुरु गुरुनानक देव का अवतरण हुआ था। उन्होंने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा तिथि 18 नवंबर को 12 बजकर 10 मिनट से शुरू होगी, जो कि अगले दिन 19 नवंबर को दो बजकर 20 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि होने के कारण 19 नवंबर को श्रद्धालु दानपुण्य कर सकते हैं। कार्तिक पूर्णिमा को अपनी क्षमता के अनुसार दान जरूर करना चाहिए। फल, गुड़, अनाज और वस्त्रों का भी दान करना चाहिए। पूर्णिमा का दिन मां लक्ष्मी को समर्पित माना गया है, इसलिए इस दिन मां लक्ष्मी की प्रिय वस्तुओं जैसे अक्षत, नारियल और दूध की मिठाइयों का दान करना सबसे शुभ माना जाता है। ऐसा करने से मां लक्ष्मी का वास घर में होता है। संवाद
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तुलसी पूजन करें
आचार्य सुरेंद्रनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को तुलसी पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। यदि देवप्रबोधिनी एकादशी पर तुलसी विवाह न कर पाए हों तो कार्तिक पूर्णिमा पर मां तुलसी का पूजन करके उन्हें सुहाग की वस्तुएं भेंट कर सकते हैं। ऐसा करने से आपके घर में सुख समृद्धि का आगमन होगा। भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं। संवाद