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हाथरस : मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म करने वाले दुराचारी को कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद और अर्थदंड की सजा

Fri, 04 Dec 2020 11:13 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 04 Dec 2020 11:13 PM IST
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Hathras: Court sentenced to life imprisonment for imprisonment for raping innocent girl
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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चार वर्ष की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म करने वाले एक आरोपी को दोषी मानते हुए न्यायालय ने उसको आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड न देने पर उसे अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। पूरी न्यायिक प्रक्रिया में त्वरित गति अपनाई गई और न्यायालय ने अपराध होने के उपरांत महज 50 दिन के अंदर ही दोषी को सजा सुनाई है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार सासनी क्षेत्र के एक गांव में चार साल की एक बच्ची 13 अक्तूबर 2020 को जब अपने घर के बाहर खेल रही थी तो उसी समय वहां अरविंद उर्फ भूरा पुत्र नाथूराम वहां आ गया। वह टॉफी व पैसे का प्रलोभन देकर बच्ची को अपने घर पर ले गया। वहां आरोपी भूरा ने इस बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। बच्ची के कपड़े खून से सने हुए थे। पीड़िता की मां के पूछने पर बच्ची ने बताया कि भूरा ने उसके साथ गलत काम किया है।
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सूचना मिलने पर पुलिस भी गांव आ गई। पुलिस ने आरोपी भूरा के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया और बच्ची का डॉक्टरी परीक्षण भी कराया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार भी कर लिया। इस मामले में पुलिस ने आरोप पत्र भी दाखिल कर दिया। मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विशेष न्यायाधीश (पोक्सो अधिनियम) प्रथम प्रतिभा सक्सेना के न्यायालय में हुई। कोर्ट ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद आरोपी को दोषी माना।
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उसे धारा 376 ए.बी. भा.द.स.में सश्रम कारावास (अभियुक्त के शेष प्राकृतिक जीवन तक) व 50 हजार रुपये अर्थदंड, धारा 342 में एक साल के सश्रम कारावास व एक हजार रुपये के अर्थदंड, धारा 323 में एक साल की कैद और एक हजार रुपये अर्थदंड के अलावा धारा 5एम-6 यौन अपराध शिशु संरक्षण अधिनियम 2012 के तहत सश्रम कारावास और 50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड न देने पर उसे अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि अर्थदंड में से एक लाख रुपये की धनराशि पीड़िता को दी जाएगी। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी राजपाल सिंह दिसवार ने इस मामले में पैरवी की। पुलिस की त्वरित कार्रवाई और फिर सशक्त पैरवी के बाद तेजी से न्यायिक प्रक्रिया के चलते अपराध होने के महज 50 दिन के अंदर ही अपराधी को सजा सुनाई है।
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