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हाथरस: सीएम कार्यक्रम में जाने से रोका, कोर्ट ने मांगी रिपोर्ट, अधिकारियों पर जांच-कार्रवाई के निर्देश

Sun, 01 Nov 2026 11:48 AM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Sun, 01 Nov 2026 11:48 AM IST
सार

अदालत ने मामले की सुनवाई और धाराओं के प्रावधानों (विशेषकर धारा 175(4) बीएनएसएस 2023) का अवलोकन करने के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, उपजिला मजिस्ट्रेट, क्षेत्राधिकारी और सिकंदराराऊ थाने के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक व अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्रस्तुत प्रार्थना पत्र पर संज्ञान लिया है।

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Hathras court orders probe against stopping CM event entry
कोर्ट (प्रतीकात्मक फोटो) - फोटो : एएनआई

विस्तार

मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में जाने से रोकने और हिरासत के मामले में एक प्रार्थना पत्र पर हाथरस के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में सुनवाई हुई। न्यायालय ने स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ बीएनएसएस की धारा 173(4) के तहत संज्ञान लेते हुए जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

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सिकंदराराऊ के मोहल्ला हुरमतगंज निवासी सेक्रेटरी यादव ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करते हुए कहा कि 28 जून को सिकंदराराऊ में मुख्यमंत्री की जनसभा थी। वह स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए ज्ञापन तैयार कर रहे थे।
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आरोप है कि स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें मुख्यमंत्री तक अपनी बात या ज्ञापन पहुंचाने से रोकने के लिए दिनांक 27 जून की रात करीब आठ बजे उन्हें घर से अवैध रूप से हिरासत में ले लिया। उन्हें लगभग 17 घंटे बाद मुक्त किया गया। सेक्रेटरी सिंह यादव ने कहा कि वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व प्रचारक और भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता रहे हैं।
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अदालत ने मामले की सुनवाई और धाराओं के प्रावधानों (विशेषकर धारा 175(4) बीएनएसएस 2023) का अवलोकन करने के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, उपजिला मजिस्ट्रेट, क्षेत्राधिकारी और सिकंदराराऊ थाने के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक व अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्रस्तुत प्रार्थना पत्र पर संज्ञान लिया है।


अदालत ने निर्देश दिया है कि इस आदेश की प्रमाणित प्रति संबंधित लोकसेवक को भेजी जाए, ताकि वे नियत तिथि तक अदालत के समक्ष अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकें। मामले की अगली सुनवाई के लिए 19 नवंबर को तय की गई है, जिसमें संबंधित पक्षों को अपनी पैरवी और रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।

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