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हाथरस : बसपा का खाता नहीं खुला लेकिन रामवीर की हार का कारण बनी
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आगरा रोड रामवीर उपाध्याय की कोठी के सामने लगी भीड़। संवाद
- फोटो : HATHRAS
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
वर्ष 1996 के बाद यह ऐसा विधानसभा चुनाव है, जब बसपा का जिले में खाता नहीं खुला। पार्टी को इस विधानसभा चुनाव में एक भी सीट हासिल नहीं हुई। हालांकि बसपा सादाबाद में भाजपा प्रत्याशी और दिग्गज नेता रामवीर उपाध्याय की हार का कारण बनी। वहीं सिकंदराराऊ में भी भाजपा प्रत्याशी की जीत की राह कठिन कर दी।
वर्ष 1996 से लेकर पिछले चुनाव तक पूर्व ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय इस जिले में बसपा के सबसे बड़े नेता थे। हमेशा बसपा के सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले पर जीत हासिल करते रहे। पिछली बार भी रामवीर के दम पर सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले पर बसपा ने सादाबाद की सीट जीत ली थी।
रामवीर ने जब भाजपा का दामन थामा तो पार्टी ने सादाबाद सीट से उन्हीं के सजातीय डॉ. अविन शर्मा को उम्मीदवार बना दिया। डॉ. शर्मा तीसरे स्थान पर रहे। अविन ने पार्टी के परंपरागत मतों के अलावा ब्राह्मण मतों में भी सेंध लगाई। डॉ. शर्मा को इस सीट पर 32,555 वोट मिले।
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जबकि इस सीट पर रामवीर उपाध्याय महज 6,437 वोटों से हारे। ऐसे में रामवीर उपाध्याय को हराने में बसपा की भी अहम भूमिका मानी जा रही है। वहीं सिकंदराराऊ सीट पर भाजपा विधायक वीरेंद्र सिंह राना के सजातीय अवधेश सिंह को बसपा ने मैदान में उतारा।
अवधेश सिंह को वहां से 41,718 वोट मिले। अवधेश सिंह ने भी भाजपा प्रत्याशी के वोटों में सेंध लगाई। हाथरस सदर सीट पर बसपा ने दूसरा स्थान हासिल किया। हालांकि पहले के मुकाबले उसे काफी कम वोट मिले।
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वर्ष 1996 के बाद यह ऐसा विधानसभा चुनाव है, जब बसपा का जिले में खाता नहीं खुला। पार्टी को इस विधानसभा चुनाव में एक भी सीट हासिल नहीं हुई। हालांकि बसपा सादाबाद में भाजपा प्रत्याशी और दिग्गज नेता रामवीर उपाध्याय की हार का कारण बनी। वहीं सिकंदराराऊ में भी भाजपा प्रत्याशी की जीत की राह कठिन कर दी।
वर्ष 1996 से लेकर पिछले चुनाव तक पूर्व ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय इस जिले में बसपा के सबसे बड़े नेता थे। हमेशा बसपा के सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले पर जीत हासिल करते रहे। पिछली बार भी रामवीर के दम पर सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले पर बसपा ने सादाबाद की सीट जीत ली थी।
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रामवीर ने जब भाजपा का दामन थामा तो पार्टी ने सादाबाद सीट से उन्हीं के सजातीय डॉ. अविन शर्मा को उम्मीदवार बना दिया। डॉ. शर्मा तीसरे स्थान पर रहे। अविन ने पार्टी के परंपरागत मतों के अलावा ब्राह्मण मतों में भी सेंध लगाई। डॉ. शर्मा को इस सीट पर 32,555 वोट मिले।
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जबकि इस सीट पर रामवीर उपाध्याय महज 6,437 वोटों से हारे। ऐसे में रामवीर उपाध्याय को हराने में बसपा की भी अहम भूमिका मानी जा रही है। वहीं सिकंदराराऊ सीट पर भाजपा विधायक वीरेंद्र सिंह राना के सजातीय अवधेश सिंह को बसपा ने मैदान में उतारा।
अवधेश सिंह को वहां से 41,718 वोट मिले। अवधेश सिंह ने भी भाजपा प्रत्याशी के वोटों में सेंध लगाई। हाथरस सदर सीट पर बसपा ने दूसरा स्थान हासिल किया। हालांकि पहले के मुकाबले उसे काफी कम वोट मिले।