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हाथरस : आवास की आस में मायूस होकर लौट रहे आवेदक
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
गरीब और जरूरतमंद आवास पाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन उन्हें आवास नहीं मिल पा रहा है। झूठे आश्वासन देकर कार्यालयों से टरका दिया जाता है। गरीब होने के कारण यह जरूरतमंद न तो रोज सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा सकते हैं और न हीं आने-जाने के किराये का खर्चा कर सकते हैं। मजबूरन आवेदक को कार्यालयों से मायूस होकर लौटना पड़ता है।
किसी भी अधिकारी से वार्ता की जाए तो जवाब मिलता है कि पात्र हैं तो आवास जरूर मिलेगा, लेकिन कोई यह नहीं बताता कि कब तक मिल पाएगा। सुबह आवास मंजूर होने की आस लेकर संबंधित विभाग के दफ्तर पहुंचने वाला आवेदक शाम को मायूस होकर लौट जाता है। सहायक विकास अधिकारी (एडीओ) पंचायत दिनेश सिंघल का कहना है कि अभी वर्ष 2011 में हुए सर्वे में कई पात्र लोगों के आवास बनने बाकी हैं। 2011 की सूची पूरी होने पर ही अग्रिम कार्यवाही की जाएगी। संवाद
मेरे पति की मृत्यु हो गई है। गरीब पात्र श्रेणी में मेरा नाम है। मैं झोपड़ी डालकर गुजर-बसर कर रही हूं। बच्चों के रहने के लिए कोई जगह नहीं है। कई बार आवास के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटे हैं, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिलता है।
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-सोनिया, बसगोई
मैं अत्यंत गरीब व्यक्ति हूं। रहने के लिए गांव में कोई जगह नहीं है। पन्नी की झोपड़ी बनाकर गुजर-बसर करता हूं। सरकारी दफ्तरों में भटक-भटककर हार गया हूं, लेकिन झूठे आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिलता है। इस कारण मायूस होकर घर बैठा हूं।
-गफूर खां, गढ़ौआ
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गरीब और जरूरतमंद आवास पाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन उन्हें आवास नहीं मिल पा रहा है। झूठे आश्वासन देकर कार्यालयों से टरका दिया जाता है। गरीब होने के कारण यह जरूरतमंद न तो रोज सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा सकते हैं और न हीं आने-जाने के किराये का खर्चा कर सकते हैं। मजबूरन आवेदक को कार्यालयों से मायूस होकर लौटना पड़ता है।
किसी भी अधिकारी से वार्ता की जाए तो जवाब मिलता है कि पात्र हैं तो आवास जरूर मिलेगा, लेकिन कोई यह नहीं बताता कि कब तक मिल पाएगा। सुबह आवास मंजूर होने की आस लेकर संबंधित विभाग के दफ्तर पहुंचने वाला आवेदक शाम को मायूस होकर लौट जाता है। सहायक विकास अधिकारी (एडीओ) पंचायत दिनेश सिंघल का कहना है कि अभी वर्ष 2011 में हुए सर्वे में कई पात्र लोगों के आवास बनने बाकी हैं। 2011 की सूची पूरी होने पर ही अग्रिम कार्यवाही की जाएगी। संवाद
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मेरे पति की मृत्यु हो गई है। गरीब पात्र श्रेणी में मेरा नाम है। मैं झोपड़ी डालकर गुजर-बसर कर रही हूं। बच्चों के रहने के लिए कोई जगह नहीं है। कई बार आवास के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटे हैं, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिलता है।
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-सोनिया, बसगोई
मैं अत्यंत गरीब व्यक्ति हूं। रहने के लिए गांव में कोई जगह नहीं है। पन्नी की झोपड़ी बनाकर गुजर-बसर करता हूं। सरकारी दफ्तरों में भटक-भटककर हार गया हूं, लेकिन झूठे आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिलता है। इस कारण मायूस होकर घर बैठा हूं।
-गफूर खां, गढ़ौआ