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हाथरस: जख्मी बेटे के साथ बस के इंतजार में तीन दिन से रुका हुआ है अनिल
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हाथरस: सूरत से पैदल चलकर आया रायबरेली के अनिल शुक्ला का परिवार।
- फोटो : HATHRAS
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
मुरसान (हाथरस)। मुरसान के स्पोर्ट्स स्टेडियम में मौजूद अनिल शुक्ला निवासी ऊंचाघर रायबरेली की आपबीती बेहद दर्द भरी है। वह अपने परिवार के साथ पिछले तीन दिन से यहां रुका हुआ है। चलते-चलते उसके बेटे के पांव में भी जख्म हो गए हैं। अब वह स्टेडियम में मौजूद है तो पिछले तीन दिन से उसे यही कहा जा रहा है कि जब तक एक बस की सवारी पूरी नहीं हो जाती। उसे यहीं रहना पडे़गा।
अनिल शुक्ला निवासी ऊंचाघर रायबरेली ने बताया कि वह सूरत में कपड़ों में छपाई करने का काम करता था। वह पिछले कई महीनों से सूरत में अपने परिवार के साथ रह रहा था। लॉकडाउन होने के बाद कंपनी के मालिक ने उसे कंपनी से बाहर कर दिया। वह कुछ दिन अपने पैसे से ही अपने परिवार का भरण-पोषण करने लगा, लेकिन जब उसे लगा कि इस तरह उसकी गुजर-बसर नहीं होगी तो वह काफी दूर तक पैदल पैदल अपने शहर के लिए परिवार के साथ चल दिया।
रास्ते में जैसे ही उसे वाहनों का सहारा मिला। वह उन वाहनों में बैठकर हाथरस स्टेडियम तक सोमवार को पहुंच गए, लेकिन यहां पर उसने प्रशासन से रायबरेली जाने के लिए कहा तो उससे कहा गया है कि जब तक एक बस की सवारी पूरी नहीं हो जाती तब तक उसे परिवार के साथ यही रहना पड़ेगा। कई दिनों पैदल चलने के कारण उसके बेटे के पैर में जख्म हो गए है उसका इलाज उसने हॉस्पिटल में प्रशासन की देखरेख में कराया है।
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मुरसान (हाथरस)। मुरसान के स्पोर्ट्स स्टेडियम में मौजूद अनिल शुक्ला निवासी ऊंचाघर रायबरेली की आपबीती बेहद दर्द भरी है। वह अपने परिवार के साथ पिछले तीन दिन से यहां रुका हुआ है। चलते-चलते उसके बेटे के पांव में भी जख्म हो गए हैं। अब वह स्टेडियम में मौजूद है तो पिछले तीन दिन से उसे यही कहा जा रहा है कि जब तक एक बस की सवारी पूरी नहीं हो जाती। उसे यहीं रहना पडे़गा।
अनिल शुक्ला निवासी ऊंचाघर रायबरेली ने बताया कि वह सूरत में कपड़ों में छपाई करने का काम करता था। वह पिछले कई महीनों से सूरत में अपने परिवार के साथ रह रहा था। लॉकडाउन होने के बाद कंपनी के मालिक ने उसे कंपनी से बाहर कर दिया। वह कुछ दिन अपने पैसे से ही अपने परिवार का भरण-पोषण करने लगा, लेकिन जब उसे लगा कि इस तरह उसकी गुजर-बसर नहीं होगी तो वह काफी दूर तक पैदल पैदल अपने शहर के लिए परिवार के साथ चल दिया।
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रास्ते में जैसे ही उसे वाहनों का सहारा मिला। वह उन वाहनों में बैठकर हाथरस स्टेडियम तक सोमवार को पहुंच गए, लेकिन यहां पर उसने प्रशासन से रायबरेली जाने के लिए कहा तो उससे कहा गया है कि जब तक एक बस की सवारी पूरी नहीं हो जाती तब तक उसे परिवार के साथ यही रहना पड़ेगा। कई दिनों पैदल चलने के कारण उसके बेटे के पैर में जख्म हो गए है उसका इलाज उसने हॉस्पिटल में प्रशासन की देखरेख में कराया है।
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