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हाथरस : नगर निकाय चुनाव पर हाईकोर्ट के फैसले के बाद राजनीतिक सरगर्मी तेज

Tue, 27 Dec 2022 11:31 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 27 Dec 2022 11:31 PM IST
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Hathras: After the decision of the High Court on the municipal elections, political agitation intensified
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ द्वारा नगर निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण रद करने के फैसले के बाद यहां भी राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। हालांकि इसके बाद मुख्यमंत्री का यह बयान आया कि पहले ओबीसी को आरक्षण देंगे और फिर चुनाव कराए जाएंगे तो इससे यह भी स्पष्ट हो गया कि अभी चुनाव टल सकते हैं।
उल्लेखनीय है कि यूपी नगर निकाय चुनाव को लेकर हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने मंगलवार को निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण को रद्द करने का फैसला सुनाया। इसके बाद से ही राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई। सबकी नजर इस पर लग गई कि सरकार हाईकोर्ट के इस फैसले पर क्या कदम उठाएगी। सभी अपने-अपने हिसाब से आंकलन करने लगे।
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थोड़ी देर बाद ही मुख्यमंत्री ने जब यह घोषणा कर दी कि सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग के नागरिकों के लिए आरक्षण की सुविधा उपलब्ध कराएगी और जरूरत हुई तो सुप्रीम कोर्ट भी जाएगी तो यह भी तय हो गया कि अब नगर निकाय चुनाव अगले कुछ महीने के लिए टल गए हैं।
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वैसे जो सीटें ओबीसी के लिए आरक्षित की गई थी, वहां आरक्षण के बाद दावेदार काफी मायूस हो गए थे। अब उनकी नजर इस पर टिकी है कि आरक्षण की सूरत बदलेगी या नहीं। यह तथ्य भी उल्लेखनीय है कि इस जिले में शासन ने नगर पालिका व नगर पंचायत अध्यक्ष पद के लिए अनंतिम आरक्षण घोषित किया था। इसमें पांच नगर पंचायत ओबीसी के लिए आरक्षित की गईं। संवाद
इस बार यह था निकाय क्षेत्रों का आरक्षण
नगर पालिका परिषद हाथरस-अनुसूचित जाति महिला
नगर पालिका परिषद सिकंदराराऊ-अनारक्षित
नगर पंचायत सादाबाद-महिला
नगर पंचायत मुरसान-ओबीसी
नगर पंचायत पुरदिलनगर-ओबीसी
नगर पंचायत सहपऊ-अनुसूचित जाति महिला
नगर पंचायत मेंडू-अनुसूचित जाति महिला
नगर पंचायत सासनी-अन्य पिछड़ा वर्ग महिला
नगर पंचायत हसायन- ओबीसी
हाईकोर्ट के फैसले के बाद विपक्ष ने सरकार को घेरा
हाथरस नगर निकाय में ओबीसी आरक्षण पर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के फैसले के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। विपक्षी दलों ने इस पर सरकार को घेरा है।
नगर निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण को रद करने का कोर्ट का फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है। इस फैसले के खिलाफ सरकार यदि सुप्रीम कोर्ट में नहीं जाएगी तो हमारी पार्टी और अन्य विपक्षी दल कोर्ट में जाएंगे। ओबीसी को उनके अधिकार मिलने चाहिए।
-जसवंत सिंह यादव, जिलाध्यक्ष सपा
सरकार ओबीसी को धोखा देना चाहती है। सरकार की नीयत साफ नहीं है। हाईकोर्ट में सरकार ने सही पैरवी नहीं की और अब सुप्रीम कोर्ट जाने का बहाना कर सरकार अपनी कमजोरियों को छिपाना चाहती है। पिछडे़ वर्ग का शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
-प्रदीप उर्फ गुड्डू चौधरी, विधायक रालोद
ओबीसी को सरकार उनके हक से वंचित न करे और पिछड़े वर्ग के अधिकारों को न छीने। सरकार नगर निकाय चुनाव में ओबीसी को आरक्षण दे। सरकार ने इस मामले में हाईकोर्ट में सही पैरवी नहीं की और इसी वजह से यह फैसला आया है।

-केसी निराला, जिलाध्यक्ष बसपा
सरकार की नीयत में खोट है और वह यह दिखाना चाहती थी कि वह ओबीसी की कितनी बड़ी हिमायती है, लेकिन कोर्ट में उसने जानबूझकर कमजोर पैरवी की। कांग्रेस हर वर्ग के साथ है। हम ओबीसी को पूरा सम्मान देंगे यदि सरकार हाईकोर्ट के फैसले के हिसाब से चुनाव कराएगी तो जिले में जो जनरल सीटे हैं, कांग्रेस पर उन पर पिछड़े वर्ग का प्रत्याशी उतारेगी।
-चंद्रगुप्त विक्रमादित्य, जिलाध्यक्ष कांग्रेस
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