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हाथरस : जिले में 430 सामुदायिक शौचालय क्रियाशील, 12 निष्क्रिय

Sat, 01 Oct 2022 12:07 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 01 Oct 2022 12:07 AM IST
सार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस जिले की ग्राम पंचायतों में बने सामुदायिक शौचालय के रखरखाव में लापरवाही बरती जा रही है।इसके बावजूद ग्राम पंचायतों में बने शौचालयों के ताले तक महीनों तक नहीं खुल पा रहे हैं।जिले में प्रतिमाह सामुदायिक शौचालयों के रखरखाव के लिए 38 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं।

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Hathras: 430 community toilets functional, 12 inactive in the district
हाथरस : सामुदायिक शौचालय पर लटका ताला। संवाद - फोटो : HATHRAS

विस्तार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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जिले की ग्राम पंचायतों में बने सामुदायिक शौचालय के रखरखाव में लापरवाही बरती जा रही है। हैरानी की बात यह है कि जिले में बने सामुदायिक शौचालय के रखरखाव में प्रति माह लाखों रुपये खर्च होते हैं। पंचायतराज विभाग के आंकड़ों के अनुसार 430 सामुदायिक शौचालय क्रियाशील हैं और 12 अक्रियाशील हैं। सामुदायिक शौचालयों के रखरखाव पर लाखों रुपये पानी की तरह बहाए जा रहे हैं, लेकिन कोई भी अफसर अपनी जिम्मेदारी तय नहीं कर पा रहा है।
उल्लेखनीय है कि स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत जिले की ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालयों का निर्माण किया गया है। इन शौचालयों में गांव के सभी लोगों को शौच की सुविधा दी जाती है। जिले की ग्राम पंचायतों में बने प्रत्येक शौचालय पर प्रतिमाह नौ हजार रुपये रखरखाव पर खर्च किए जाते हैं। रखरखाव करने वाले लोगों को छह हजार रुपये और सामान के लिए तीन हजार रुपये प्रतिमाह दिए जाते हैं।
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इसके बावजूद ग्राम पंचायतों में बने शौचालयों के ताले तक महीनों तक नहीं खुल पा रहे हैं। धनराशि देने वाला पंचायतराज विभाग इस ओर से आंखें मूंदकर बैठा हुआ है। जिले की 430 ग्राम पंचायतों में प्रति माह सामुदायिक शौचालयों के रखरखाव के लिए धनराशि खर्च की जा रही है। जिले में प्रतिमाह सामुदायिक शौचालयों के रखरखाव के लिए 38 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके बावजूद सामुदायिक शौचालयों की स्थिति दयनीय है। संवाद
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सामुदायिक शौचालय तो बना हैं, लेकिन इस पर अक्सर ताला पड़ा रहता है। शौचालय मेरे खेतों के पास बना हुआ है। इसे कभी खुलते हुए नहीं देखा है।
-नवल सिंह, ग्रामीण
गांव में सामुदायिक शौचालय जब से बना है, तब से ताला पड़ा हुआ है। पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। इनका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है।
-हाकिम सिंह, ग्रामीण
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