फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hathras News ›   Glucose was kept in hospital death

जिला अस्पताल में रखा था मौत का ग्लूकोज

Sat, 15 Oct 2016 11:34 PM IST
अमर उजाला, हाथरस
अमर उजाला, हाथरस Updated Sat, 15 Oct 2016 11:34 PM IST
विज्ञापन
Glucose was kept in hospital death
Medical Lab
26 मई को जिला अस्पताल के दवा स्टोर रूम में रखीं ग्लूकोस (आरएल) की कई बोतलों में फफूं द (फंगस) लगने का मामला प्रकाश में आया था। इसके पांच नमूनों में से दो की जांच रिपोर्ट शनिवार को मिल गई। दोनों नमूने जांच में जन स्वास्थ्य के लिए घातक पाए गए हैं। जांच कर रहे ड्रग इंस्पेक्टर की मानें तो इस ग्लूकोज को लगाने से मरीज की जान भी जा सकती थी।
विज्ञापन


औषधि निरीक्षक पूरन सिंह ने बताया कि उन्होंने 26 मई को जिला अस्पताल के दवा स्टोर रूम से ग्लूकोस की अलग-अलग बैच नंबर की पांच बोतलों के नमूने लिए थे। और इनकी सप्लाई करने वाली कंपनी इनवेन फार्मा प्रा. लि. मध्य प्रदेश को भी नोटिस जारी किया था। और इन बोतलों के वितरण पर रोक लगाते हुए इन्हें सीज कर दिया गया था।
विज्ञापन


पांच नमूनों में से दो की जांच रिपोर्ट शनिवार को आ गई। जांच रिपोर्ट में इन बोतलों के नमूनों को मानव जीवन के लिए घातक पाया गया है। इन बोतलों में फफूंद पाई गई है। डीआई ने बताया कि यह फफूंद अगर किसी व्यक्ति के ब्लड में मिल जाए तो उसकी मौत भी हो सकती है। डीआई को इस मामले में जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


औषधि विभाग के कमिश्नर ने भी डीआई को निर्देशित किया है कि सीएमएस से इन बोतलों के खरीद बिल प्राप्त करें। अस्पताल में यह जांच करें कि कहीं इन बोतलों का स्टॉक वहां बरकरार तो नहीं है। इनका कहीं वितरण तो नहीं किया गया है और यह बोतलें कंपनी को वापस की गईं या नहीं। डीआई ने बताया कि नोटिस देने के बाद भी कंपनी ने अभी तक अपना स्पष्टीकरण नहीं दिया है। 

- ग्लूकोज की बोतलों में फफूं द मिली है तो यह वाकई चिंता का विषय है। फफूंद मिली ग्लूकोज की बोतल लगने से फंगल इंन्फेेशन तक हो सकता है। इससे किसी भी व्यक्ति की मौत भी हो सकती है। उन्होने बताया कि जिला अस्पताल में जिस समय बोतलों में फंगस पाया गया था, उसी दौरान इन बोतलों के वितरण व उपयोग पर रोक लगा दी गई थी। 
डॉ. रामवीर सिंह, सीएमओ, हाथरस। 

वहीं जिला पशु चिकित्सालय से लिए गए दो इंजेक्शनों के नमूने भी राजकीय औषधि प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट में मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। जांच में इन इंजेक्शनों मेें कचरा पाया गया है। डीआई पूरनचंद ने बताया कि जून माह में उन्होने जिला पशु चिकित्सालय से फिनरमाइंड मैलिड और ऑक्सीट्रेटा टाइटलीन नामक इंजेक्शनों के नमूने लिए थे और जांच हेतु प्रयोगशाला भेजा था।


उन्होने बताया कि जांच रिपोर्ट में इन इंजेक्शनों में कचरा पाया गया है। इसलिए जिला पशु चिकित्सालय को यह निर्देश दिए गए हैं कि जहां भी इन इंजेक्शनों को भेजा गया है, इनको वहां से वापस मंगाया जाए और खरीद बिल प्रस्तुत किए जाएं। कंपनी को भी नोटिस जारी किया गया है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed