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अब जाति व जेब देखकर मिलता है टिकट
अमर उजाला, हाथरस
Updated Sat, 04 Feb 2017 11:15 PM IST
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राजनीति
- फोटो : demo pic
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भूवेंद्र सेंगर
भाजपा के टिकट पर पहली बार सांसद चुने गए डॉ. लालबहादुर रावल भी राजनीति के मौजूदा हालात से नाखुश दिखे। उनका कहना है कि तब प्रत्याशी चयन का आधार योग्यता एवं स्वच्छ और ईमानदार छवि होती थी।
इसी आधार पर पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी ने उन्हें हाथरस लोकसभा क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया था, लेकिन अब प्रत्याशी चयन का आधार उसकी जाति का वोट बैंक और धनबल व बाहुबल हो गया है। उन्होंने बताया कि हमारे समय में कार्यकर्ता प्रत्याशियों को जीत दिलाने के लिए रात-दिन मेहनत कर गांव-गांव और घर-घर पोस्टर लगाने एवं बिल्ले वितरित करने का काम करते थे।
अब नेता अधिक और कार्यकर्ता कम हो गए हैं। डॉ. रावल ने कहा कि वह हाथरस लोकसभा क्षेत्र से 1991 से 1996 तक 10वीं लोकसभा में भाजपा के पहले सांसद थे। उस समय चुनाव जीतने के लिए क्षेत्र का विकास ही एकमात्र मुद्दा होता था।
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अब तरह-तरह के प्रलोभन के माध्यम से चुनाव जीते जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि उस समय प्रत्याशी चयन में जिला कार्यकारिणी द्वारा भेजे जाने वाले कार्यकर्ताओं के नामों में से ही प्रत्याशी का चयन करने पर विचार होता था।
चुनाव के समय दलों में शामिल होने वाले लोगों के नाम पर प्रत्याशी बनाए जाने के लिए विचार नहीं किया जाता था, लेकिन अब शाम को दल में नेता शामिल होते हैं और सुबह उसी व्यक्ति को पार्टी अपना प्रत्याशी बना रही हैं, जिससे निष्ठावान कार्यकर्ताओं का राजनीति में दम घुट रहा है।
चुनाव आयोग उस समय प्रचार के लिए कम से कम 25 से 30 दिन का समय देता था, लेकिन अब पूरा चुनाव 15 दिन में निपट जाता है। उस समय चुनाव में बडे़ नेताओं की सभा के अलावा तीन-चार गांवों की नुक्कड़ सभाओं का आयोजन होता था।
कार्यकर्ता खुद प्रत्याशी बनकर गांव-गांव और घर-घर चुनाव प्रचार करते और पोस्टर, बैनर और झंडों से क्षेत्र को पाट देते थे। बड़ी संख्या में बिल्ले वितरित कराए जाते थे। उस समय चाहे जितने वाहनों की परमीशन प्राप्त हो जाती थी।
लाउडस्पीकर लगाकर रात-दिन प्रचार होता था। अब यह अधिकांश चीजें प्रचार में नजर नहीं आ रही हैं। उन्होंने सांसद बनने के बाद हाथरस जंक्शन ओवरब्रिज, सलेमपुर परियोजना और ट्रेनों में आरक्षण बढ़वाया था। संचार साधन कम थे तो पत्रों के माध्यम से जनता की समस्याओं को समाधान कराने के प्रयास करते थे। पैसे की बर्बादी कम थी। अटल जी हम सबके आदर्श नेता होते थे।
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भाजपा के टिकट पर पहली बार सांसद चुने गए डॉ. लालबहादुर रावल भी राजनीति के मौजूदा हालात से नाखुश दिखे। उनका कहना है कि तब प्रत्याशी चयन का आधार योग्यता एवं स्वच्छ और ईमानदार छवि होती थी।
इसी आधार पर पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी ने उन्हें हाथरस लोकसभा क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया था, लेकिन अब प्रत्याशी चयन का आधार उसकी जाति का वोट बैंक और धनबल व बाहुबल हो गया है। उन्होंने बताया कि हमारे समय में कार्यकर्ता प्रत्याशियों को जीत दिलाने के लिए रात-दिन मेहनत कर गांव-गांव और घर-घर पोस्टर लगाने एवं बिल्ले वितरित करने का काम करते थे।
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अब नेता अधिक और कार्यकर्ता कम हो गए हैं। डॉ. रावल ने कहा कि वह हाथरस लोकसभा क्षेत्र से 1991 से 1996 तक 10वीं लोकसभा में भाजपा के पहले सांसद थे। उस समय चुनाव जीतने के लिए क्षेत्र का विकास ही एकमात्र मुद्दा होता था।
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अब तरह-तरह के प्रलोभन के माध्यम से चुनाव जीते जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि उस समय प्रत्याशी चयन में जिला कार्यकारिणी द्वारा भेजे जाने वाले कार्यकर्ताओं के नामों में से ही प्रत्याशी का चयन करने पर विचार होता था।
चुनाव के समय दलों में शामिल होने वाले लोगों के नाम पर प्रत्याशी बनाए जाने के लिए विचार नहीं किया जाता था, लेकिन अब शाम को दल में नेता शामिल होते हैं और सुबह उसी व्यक्ति को पार्टी अपना प्रत्याशी बना रही हैं, जिससे निष्ठावान कार्यकर्ताओं का राजनीति में दम घुट रहा है।
चुनाव आयोग उस समय प्रचार के लिए कम से कम 25 से 30 दिन का समय देता था, लेकिन अब पूरा चुनाव 15 दिन में निपट जाता है। उस समय चुनाव में बडे़ नेताओं की सभा के अलावा तीन-चार गांवों की नुक्कड़ सभाओं का आयोजन होता था।
कार्यकर्ता खुद प्रत्याशी बनकर गांव-गांव और घर-घर चुनाव प्रचार करते और पोस्टर, बैनर और झंडों से क्षेत्र को पाट देते थे। बड़ी संख्या में बिल्ले वितरित कराए जाते थे। उस समय चाहे जितने वाहनों की परमीशन प्राप्त हो जाती थी।
लाउडस्पीकर लगाकर रात-दिन प्रचार होता था। अब यह अधिकांश चीजें प्रचार में नजर नहीं आ रही हैं। उन्होंने सांसद बनने के बाद हाथरस जंक्शन ओवरब्रिज, सलेमपुर परियोजना और ट्रेनों में आरक्षण बढ़वाया था। संचार साधन कम थे तो पत्रों के माध्यम से जनता की समस्याओं को समाधान कराने के प्रयास करते थे। पैसे की बर्बादी कम थी। अटल जी हम सबके आदर्श नेता होते थे।