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शादी बीमारी योजना में भी 37 अपात्रों को आवंटित की गई धनराशि
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शादी बीमारी योजना में 37 अपात्रों को आवंटित की धनराशि
पूर्व जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद खुल रहीं घोटालों की परतें
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हाथरस। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग में वर्ष 2010 में 37 अपात्र आवेदकों को शादी बीमारी योजना के तहत अनुदान राशि दी गई थी। इस मामले में भी अब जल्द ही ईओडब्ल्यू स्तर से कार्रवाई की जाएगी। यह वाकया भी पूर्व अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी वीपी सिंह के कार्यकाल में हुआ। पूर्व अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद अब घोटालों की परतें फिर से खुलने लग गई हैं।
जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग में वर्ष 2010 में शादी बीमारी योजना के लिए आवेदन मांगे और पात्रों को योजना से लाभान्वित किया गया, लेकिन यह योजना भी घोटाले से परे नहीं रह सकी। कार्यालय में रखी अलमारी का ताला तोड़ने के बाद निकले दस्तावेजों से जांच अधिकारी सहम गए। इस अलमारी से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर इस योजना में 37 अपात्र लाभार्थियों को अनियमित रूप से धनराशि आवंटित की गई।
जांच में सामने आया कि समस्त आवेदन पत्रों पर अंकित रिपोर्ट फर्जी है। संबंधित क्षेत्रीय लेखपाल और राजस्व निरीक्षक के हस्ताक्षर भी फर्जी बनाए गए हैं। अब इस मामले भी ईओडब्ल्यू द्वारा शिकंजा कसने की तैयारी कर दी गई है। गिरफ्तारी के बाद घोटालों की परतें खुलती जा रही हैं।
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पूर्व जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद खुल रहीं घोटालों की परतें
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हाथरस। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग में वर्ष 2010 में 37 अपात्र आवेदकों को शादी बीमारी योजना के तहत अनुदान राशि दी गई थी। इस मामले में भी अब जल्द ही ईओडब्ल्यू स्तर से कार्रवाई की जाएगी। यह वाकया भी पूर्व अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी वीपी सिंह के कार्यकाल में हुआ। पूर्व अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद अब घोटालों की परतें फिर से खुलने लग गई हैं।
जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग में वर्ष 2010 में शादी बीमारी योजना के लिए आवेदन मांगे और पात्रों को योजना से लाभान्वित किया गया, लेकिन यह योजना भी घोटाले से परे नहीं रह सकी। कार्यालय में रखी अलमारी का ताला तोड़ने के बाद निकले दस्तावेजों से जांच अधिकारी सहम गए। इस अलमारी से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर इस योजना में 37 अपात्र लाभार्थियों को अनियमित रूप से धनराशि आवंटित की गई।
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जांच में सामने आया कि समस्त आवेदन पत्रों पर अंकित रिपोर्ट फर्जी है। संबंधित क्षेत्रीय लेखपाल और राजस्व निरीक्षक के हस्ताक्षर भी फर्जी बनाए गए हैं। अब इस मामले भी ईओडब्ल्यू द्वारा शिकंजा कसने की तैयारी कर दी गई है। गिरफ्तारी के बाद घोटालों की परतें खुलती जा रही हैं।
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