World Press Freedom Day: हो जाएं सावधान, कुछ भी फॉरवर्ड करने के चक्कर में फंस सकते हैं आप, ये बातें रखें ध्यान
आपका एक गलत फॉरवर्ड समाज में दंगा या किसी निर्दोष की जान के लिए खतरा बन सकता है। किसी भी अपुष्ट खबर को आगे बढ़ाना सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के तहत दंडनीय अपराध है।
विस्तार
डिजिटल युग में जानकारी जितनी तेजी से पहुंच रही है, उतनी ही तेजी से झूठ का जाल भी फैल रहा है। आज के समय में फॉरवर्ड बटन की रफ्तार फैक्ट (तथ्य) की चाल से कहीं ज्यादा तेज है। लोग अखबार या न्यूज चैनल देखने से पहले अपने फोन की नोटिफिकेशन और फैमिली ग्रुप्स में आने वाले मेसेज पर भरोसा कर लेते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपका यही अटूट भरोसा आपको साइबर ठगी या मानसिक तनाव का शिकार बना सकता है? महज कुछ लाइक्स व व्यूज पाने के लिए झूठी व तथ्यहीन जानकारियों को साझा किया जाता है। जिले के ताजा इन दो मामलों से स्थिति को समझ सकते हैं।
आज के समय में सूचना की स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी है। आपका एक गलत फॉरवर्ड समाज में दंगा या किसी निर्दोष की जान के लिए खतरा बन सकता है। किसी भी अपुष्ट खबर को आगे बढ़ाना सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के तहत दंडनीय अपराध है। इसलिए लोगों को समझदारी दिखाते हुए विश्वसनीय व मुख्य धारा से जुड़े मीडिया संस्थानों की खबरों पर यकीन करना चाहिए। न कि सोशल मीडिया एकाउंट्स पर। पहले जांचें, फिर साझा करें, यही डिजिटल सुरक्षा का मूलमंत्र है।
चिरंजीवनाथ सिन्हा, एसपी
केस-01
पाकिस्तान के वीडियो को हाथरस जंक्शन का बताया
प्रकरण सितंबर 2025 का है। एक्स हैंडल पर एक परिवार की सामूहिक हत्या का वीडियो वायरल किया गया था। घटना हाथरस जंक्शन के गांव लाड़पुर की बताई गई थी। सनसनीखेज घटना होने के कारण एक्स हैंडल के लिंक को धड़ाधड़ व्हाट्सएप पर शेयर किया गया। वीडियो में मासूम बच्चों के शव खून से लथपथ पड़े हुए थे। खबर जिले में आग की तरह फैल गई। पुलिस ने जब छानबीन की तो सामने आया कि वीडियो लाड़पुर का नहीं, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के मुजफ्फरगढ़ जिले में 2024 में हुई एक घटना का है। उस घटना में एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी सहित सात बच्चों की हत्या कर दी थी, लेकिन सनसनी फैलाने के लिए घटना लाड़पुर क्षेत्र की बताई गई। पुलिस ने प्रकरण में संबंधित एक्स हैंडल के संचालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी।
केस-02
युवती से छेड़खानी व हत्या की भ्रामक खबर फैलाई
कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर के नेता ने हाल ही में एक झूठी खबर फैलाई थी कि हाथरस में एक कुशवाहा समाज की युवती से छेड़खानी हुई थी। शिकायत के बाद भी पुलिस ने कार्रवाई नहीं की, जिससे उसकी हत्या हो गई। इस बारे में कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेंद्र पाल गौतम ने दिल्ली में प्रेस कान्फ्रेंस की थी। साथ ही इसके अंश कांग्रेस के एक्स हैंडल पर साझा कर दिए, जो कि देखते ही देखते वायरल हो गए, जबकि इस तरह की कोई घटना जिले में नहीं हुई थी और न ही अखबारों में प्रकाशित हुई थी, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल होने के कारण लोगों ने इसे सच मान लिया। व्हाट्स एप ग्रुपों पर जब यह लिंक फॉरवार्ड हुए तो पुलिस तक खबर पहुंची। जांच के बाद एसपी के निर्देश पर 23 अप्रैल 2026 को कोतवाली सदर में पूर्व विधायक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई।
केस-03
अप्रैल 2026 में एक थाने में युवक की पिटाई का वीडियो वायरल हुआ। यह वीडियो अलीगढ़ के महुआ खेड़ा थाने का बताया गया। मार्च में भी यह वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें अलीगढ़ पुलिस ने पुष्टि की थी कि यह महुआ खेड़ा का नहीं है। इसके बाद भी वीडियो व संदेश फॉरवर्ड होना बंद नहीं हुआ।
खतरनाक है यह ट्रेंड.. कानूनी पचड़े में फंस सकते हैं
साइबर विशेषज्ञ व साइबर सेल के प्रभारी निरीक्षक आशीष कुमार ने बताया कि आजकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जरिये डीपफेक वीडियो और वॉयस क्लोनिंग का इस्तेमाल कर ऐसी सामग्री बनाई जा रही है, जिसे पहचानना आम आदमी के लिए संभव नहीं है। इसके अलावा लाइक्स व व्यूज के लिए झूठी व भ्रामक घटनाएं या फिर किसी पुरानी सनसनीखेज घटना को कहीं और का दर्शाकर री-पोस्ट का ट्रेंड भी चल गया है। आशीष कुमार ने बताया कि ये भ्रामक सूचनाएं कानून व्यवस्था के लिए खतरा पैदा करती हैं। इन्हें फॉरवार्ड कर लोग अनजाने में अपराधी बन कानूनी पचड़ों में फंस जाते हैं।
इन पांच बातों का विशेष ध्यान रखें
- स्रोत की जांच करें : मेसेज के साथ आए लिंक को देखें। क्या वह किसी विश्वसनीय समाचार संस्थान का है या किसी अनजान वेबसाइट का?
- गूगल सर्च का सहारा लें : यदि कोई बड़ी घटना है, तो उसे गूगल पर कीवर्ड्स के साथ सर्च करें। अगर वह सच होगी, तो मुख्यधारा के अखबारों में जरूर होगी।
- तारीख और स्थान पर गौर करें : अक्सर पुरानी घटनाओं के वीडियो को नई तारीख और नए स्थान के साथ शेयर किया जाता है। वीडियो की क्वालिटी और बैकग्राउंड में दिख रहे साइनबोर्ड आदि पर ध्यान दें।
- भावनाओं में न बहें : फेक न्यूज अक्सर आपको बहुत ज्यादा गुस्सा दिलाने या डराने के लिए बनाई जाती है। उत्तेजित होकर तुरंत शेयर न करें।
- अखबारों पर भरोसा करें : सोशल मीडिया केवल सूचना का माध्यम है, पुष्टि का नहीं। तथ्यपूर्ण और प्रामाणिक खबरों के लिए हमेशा दैनिक समाचार पत्र ही पढ़ें।