मुआवजे के नाम पर किसानों के साथ खेल
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हाथरस। बारिश और ओलावृष्टि से पीड़ित किसानों को मुआवजे के वितरण के नाम पर जिले के किसानों के साथ खेल हो रहा है। सत्ता पक्ष ने मुआवजे को वोट बटोरने का जरिया बना लिया है।
यही वजह है कि मुआवजे की ज्यादातर रकम जिले के उन इलाकों में बांटी जा रही है, जहां सत्तापक्ष का दबदबा है या फिर चुनावी नजरिए से वह क्षेत्र उनके लिए अहमियत रखते हैं। इसका खुलासा पिछले महीने उस समय भी हो चुका है, जबकि कुछ खास लोगों को मुआवजा बांटने पर प्रशासन ने कुछ लेखपालों पर कार्रवाई की थी।
अब तक मुआवजा वितरण के जिले को मिले बजट का बड़ा हिस्सा उस सादाबाद और मुरसान क्षेत्र पर खर्च किया गया है, जहां से सत्तापक्ष के विधायक हैं, जबकि हकीकत तो यह है कि इन क्षेत्रों में गेहूं की पैदावार बेहद कम है, जबकि शासन के आदेश के हिसाब से यह मुआवजा गेहूं पैदा करने वाले किसानों को ही बांटा जाना है मगर जानकारों की मानें तो सियासी दवाब में प्रशासन के मुलाजिमों ने मुआवजे की रकम गेहूं के नाम पर सत्ता के करीबी आलू किसानों को परोस दी है।
जबकि आपदा से तबाह हुए गेहूं बोने वाले किसान अब भी सरकारी मदद की राह ही तक रहे हैं। इन तक मदद पहुंचना तो दूर, इनके क्षेत्रों में सर्वे तक नहीं किया गया है, जबकि मदद के सबसे बड़े हकदार यही हैं। इनके पास नई फसल की तैयारी के लिए भी पूंजी नहीं है। उनकी पूरी तैयारी सरकारी मुआवजे पर ही निर्भर है।