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Hathras News: पहले खेतों में किया रतजगा, अब फसल बचाने के लिए मंडी में कट रही सर्द रात

Sat, 20 Dec 2025 01:14 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 20 Dec 2025 01:14 AM IST
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First, they stayed up all night in the fields, and now they are spending cold nights in the market to save their crops.
क्रय केंद्र पर ट्रैक्टरों के बीच तिरपाल तानकर जमीन पर सोते किसान। संवाद  - फोटो : Samvad
घना कोहरा और सर्द रात… बृहस्पतिवार रात साढ़े 10 बजे मंडी परिसर में कंपकपाती ठंड में बाजरा बेचने आए किसान ठिठुरते नजर आए। पैठगांव निवासी किसान महेश तो छह दिन से मंडी पर डेरा डाले हुए हैं।
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किसानों का कहना है कि पहले निराश्रित पशुओं से फसल बचाने के लिए खेतों में रतजगा करना पड़ा, अब अब फसल तैयार हुई तो उसे बेचने के लिए मंडी में रात कट रही है।
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महेश अकेले नहीं थे और भी किसान अपनी फसल बिकने का इंतजार कर रहे हैं। कोहरे और ओस से बचने के लिए किसी ने रजाई- गद्दे के ऊपर तिरपाल डाली हुई थी तो किसी ने ट्रैक्टर-ट्राली के बीच तिरपाल तानी हुई थी। कई किसान डंडे और टार्च लेकर बैठे नजर आए।
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उन्होंने बताया कि निराश्रित पशु बोरे फाड़ देते हैं, चोरी का भी डर रहता है, इसलिए बारी-बारी से किसान जागते और सोते हैं। एक सोता है तो दूसरा जागकर रखवाली करता है। किसानों का आरोप है कि सरकारी खरीद केंद्र पर व्यापारियों के बोरे तोले जा रहे हैं, किसानों की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।




टोकन व्यवस्था बस नाम

की, जुगाड़ का है सारा खेल

बाजरा खरीद के लिए जिले में सात क्रय केंद्र बनाए गए हैं। मंडी समिति के क्रय केंद्र पर पहुंचे किसानों का कहना है कि उन्हें बाजरा खरीद के लिए टोकन दिए गए हैं, इसके बाद भी उनकी तौल नहीं हो रही है। जिनका जुगाड़ लग जता है, वह पीछे से मंडी में ट्रैक्टर ले जाते है और तौल करा लेते हैं। किसानों ने बताया कि अब यदि बाजरा वापस ले जाए तो डीजल का अतिरिक्त खर्च वहन करना पड़ेगा।




बाजार में कम है दाम, एमएसपी ज्यादा, बिचौलिए उठा रहे फायदा

हाथरस। खुले बाजार में बाजरे का मूल्य 2000 से लेकर 2200 रुपये प्रति क्विंटल है। सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2775 रुपये प्रति क्विंटल है। किसानों का आरोप है कि इसी का फायदा बिचौलिए उठा रहे हैं। वह किसानों से सस्ते दाम पर खरीदकर बाजरा सरकारी खरीद केंद्रों पर बेच रहे हैं।

इस बार बाजरा खरीद का लक्ष्य 10600 मीट्रिक टन निर्धारित किया गया था। 9586.75 क्विंटल की अब तक खरीद हो चुकी है। सादाबाद, सिकंदराराऊ व हाथरस में दो-दो व सासनी में एक क्रय केंद्र पर खरीद हो रही है। खरीद का 90.45 फीसदी लक्ष्य पूरा होने से अधिकारी राहत की सांस ले रहे हैं। किसान परेशान हैं। आरोप तो यह भी है कि अधिकांश खरीद व्यापारियों से बाजरा लेकर पूरी की गई है।

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मंडी समिति स्थित बाजरा क्रय केंद्र 13 दिसम्बर को आया था, तब से यहीं हूं। कभी गोदाम फुल होने की बात कहते हैं, कभी ट्रक लोड नहीं होने का बहाना बनाकर तौल नहीं की जाती। सैटिंग से व्यापारियों के माल की खरीद की जा रही है।

महेश उर्फ भोला, किसान निवासी पैंठगांव





करीब 35 क्विंटल बाजरा लेकर 14 दिसंबर को आया था, पिछले पांच दिन से रात को कडाके की ठंड व कोहरे में तिरपाल के नीचे सोना पड रहा है। गंदगी भी बहुत है, रात को ठंड व कोहरे के अलावा मच्छर भी काटते हैं। रात को और भी किसान रुकते हैं, जिन्हें भी समस्या हो रही है।

सुरेश, किसान निवासी मुरसान।





13 दिसंबर को यहां आया, पर्ची पर नंबर डालकर दे दे दिया, लेकिन दिन में तीन-चार टोकन पर ही तौल हो पाती है। बाकी बड़े व्यापारियों के माल की तौल की जा रही है। कोहरा और ठंड में बुरा हाल हो जाता है।

योगेश शर्मा, किसान पैंठगांव





चार दिन तो हो गए लेकिन अभी नंबर नही आया है। केवल व्यापारियों का नंबर आ रहा है ,हमारा 50 क्विंटल बाजरा है, जिसकी तौल नहीं हो पा रही है। व्यापरियों के बड़े-बड़े ट्रोला तुल रहे हैं।

दुष्यंत कुमार, वासी गांव मौहारी






ठंड और कोहरे का मौसम में पिछली चार रातें यहीं पर कटी हैं। पूरा दिन हल्ला करने में बीत जाता है। व्यापारियों के अलावा किसी किसान का बाजरा बड़ी मुश्किल से तुल पाता है। जो रुपये दे रहे हैं, उनका माल पीछे से तोला जा रहा है।


दीनदयाल शर्मा, निवासी पैंठगांव






खरीद अच्छी हो रही है। समर्थन मूल्य बाजार से अधिक होने के कारण क्रय केंद्रों पर मारामारी है। किसानों की सुविधा के लिए ऑफलाइन टोकन व्यवस्था की गई है। टोकन में हेरा-फेरी या फिर बिना नंबर के तौल की बात गलत है। किसानों की सहूलियत के लिए ही टोकन दिए जा रहे हैं।

राजीव वर्मा, डिप्टी आरएमओ

क्रय केंद्रों का लक्ष्य और पूर्ति
क्रय केंद्र लक्ष्य पूर्ति
सादाबाद - प्रथम 17150 87.19
सादाबाद - द्वितीय 17150 95.58
सासनी 14100 93.15
सिकंदराराऊ प्रथम 14650 99.06
सिकंदराराऊ द्वितीय 14650 82.59
हाथरस प्रथम 14150 86.92
हाथरस द्वितीय 14150 88.23
(आंकड़े खाद्य एवं विपणन विभाग के खरीद, प्रति क्विंटल में और लक्ष्य पूर्ति प्रतिशत में)
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