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बागवानी: ज्यादा लागत से कम हुई मांग.. फालसे से दूर हुए किसान, यह है फालसा और इसके फायदे

Mon, 05 May 2025 04:56 PM IST
चमन शर्मा नवीन कुमार शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़
नवीन कुमार शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Mon, 05 May 2025 04:56 PM IST
सार

छोेटे बेर के आकार का दिखने वाला काले रंग का फल फालसा गर्मियों के दिनों में सेहत के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। शरीर को ठंडा रखने के साथ ही यह पाचन तंत्र में सुधार लाता है और रक्तचाप नियंत्रित करने में मदद करता है। इसमें फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और कई पोषक तत्व होते हैं।

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Farmers away from Phalsa
पेड़ पर उगे फालसे - फोटो : संवाद

विस्तार

ज्यादा लागत और कम मांग से किसानों ने फालसे की बागवानी से दूरी बना ली है। अब किसान इसकी पैदावार नहीं कर रहे हैं। पांच साल पहले हाथरस के सासनी, सहपऊ और अलीगढ़ के इगलास में पांच सौ बीघा में इसकी पैदावार होती थी।

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आम, अमरूदों के बाग की तरह फालसे के बाग होते थे। सासनी के निकट करीब 100 बीघा में इसकी पैदावार होती थी। सहपऊ में 60 व सादाबाद के पास इसके 40 बीघा बाग थे। मुरसान और इगलास के अलग-अलग गांवों में दो सौ बीघा से अधिक में इसके बाग थे। महंगाई के साथ लागत व मजदूरी का खर्च बढ़ने से किसानों ने इसकी उपज बंद कर दी। इसके अलावा मंडियों में भी इसकी मांग अब पहले जैसी नहीं रही है। 
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किसानों का कहना है कि एक बीघा में करीब साढ़े चार हजार रुपये का खर्च आता है। मुनाफा दो से तीन हजार रुपये होता है। अगर बारिश हो जाती है तो फल भी खराब हो जाता है। हाथरस फल मंडी में फलों के थोक विक्रेता अनिल शर्मा ने बताया है कि जिले में फालसे की आवक अब आसपास के जिलों से होती है, उसकी मात्रा भी बहुत सीमित है।

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सहपऊ में चार साल पहले हमने अपने खेतों में फालसे की खेती की थी। इस फसल की पैदावार में काफी मेहनत करनी पड़ती है। साल में केवल एक बार ही इसे कर सकते हैं। देखरेख के लिए लोग न होने की वजह से इस खेती को छोड़ना पड़ा है। अब खेत को बंटाई पर उठा दिया है।- योगेश कुमार, किसान, सहपऊ।
करीब 10 साल पहले हमने अपने खेत में फालसे की पैदावार की थी, लेकिन अब इसकी खेती नहीं करते हैं। मुनाफा अधिक न होने की वजह से इसकी खेती करना छोड़ दिया है।-मनीष भूमिधर, सासनी, किसान।
इस बार हमने 17 बीघा खेत में फालसे किए हैं। पहले क्षेत्र में अन्य किसान भी इसकी पैदावार करते थे, लेकिन मुनाफा कम होने की वजह अब वह अन्य फसल करते हैं। - युवराज सिंह, सासनी, किसान।
हाथरस में अब फालसे की खेती नहीं हो रही है। साल में एक बार इसकी पैदावार होती है। किसानों को इसकी बागवानी के लिए जागरूक किया जाएगा।- अनीता सिंह, जिला उद्यान अधिकारी।


आगरा से होती है आवक
अलीगढ़ और हाथरस में पैदावार न होने की वजह से फालसा आगरा के सैंया, रोहता और जारुआ कटरा से मंगाया जाता है। भाव अधिक होने की वजह से बाजार में इसकी मांग कम होती है।

सेहत को फायदा पहुंचाते हैं फालसे
छोेटे बेर के आकार का दिखने वाला काले रंग का यह फल गर्मियों के दिनों में सेहत के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। शरीर को ठंडा रखने के साथ ही यह पाचन तंत्र में सुधार लाता है और रक्तचाप नियंत्रित करने में मदद करता है। इसमें फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और कई पोषक तत्व होते हैं।

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