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आंखों देखा हाल: हादसा हुए बीते 72 घंटे, घटना का मंजर याद कर आज भी कांप जाते हैं प्रत्यक्षदर्शी
Fri, 05 Jul 2024 05:11 PM IST
चमन शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
Published by: चमन शर्मा
Updated Fri, 05 Jul 2024 05:11 PM IST
सार
साकार हरि के सत्संग के बाद हुए हादसे को 72 घंटे से अधिक बीत गए, पर अभी तक घटना के प्रत्यक्षदर्शी उस समय समय को याद कर कांप जाते हैं। उस दिन सुबह सब ठीक था, सत्संग के अंत होने पर भगदड़ मच गई।
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हादसे से पहले सत्संग में भीड़ का नजारा
- फोटो : संवाद
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विस्तार
सिकंदराराऊ में हुई घटना के प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि बाबा की गाड़ी निकलने के बाद पहियों की धूल छूने के लिए महिलाएं भागीं। इस कारण वहां भगदड़ के हालात बने। घटना का मंजर याद कर अनुयायी कांप जाते हैं। वह उन भयावह दृश्यों को भूल नहीं पा रहे हैं, जो उन्होंने मौके पर देखे थे।
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हाथरस के गांव नगला बेरिया निवासी विशंभर सिंह ने बताया कि वह क्षेत्र से रवाना हुई बस में बैठकर सत्संग में गए थे। यहां जब बाबा निकले तो उनकी गाड़ी के पहिये की धूल को लेने के लिए महिलाएं दौड़ीं। इस कारण यह हादसा हुआ। मैं जहां मौजूद था, वहां कुछ महिलाएं गर्मी से बेहोश हुई थीं। उनके ऊपर पानी डालकर उन्हें बचाया। मैं जिस जगह पर था, वहां से भगदड़ कुछ दूरी पर हुई थी। हम सब लोग वहां से सही सलामत निकल आए।
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हाथरस के गांव नगला बोझा निवासी सीता देवी ने बताया कि वह महिलाओं को बैठाने का काम कर रही थीं। जब बाबा की गाड़ी निकल गई तो काफी महिलाएं बाबा की ओर भागने लगीं। इनको देखकर हम लोग एक ओर हट गए। सड़क से होकर हम वहां से निकल आए। बाद में हमें पता चला कि सत्संग में कुछ लोग मर गए हैं। सीता का दावा है कि 20 साल पहले बच्चा बीमार हो गया था। तब आगरा से उनकी भाभी ने पानी लाकर दिया, उससे बच्चा सही हो गया। तब से वह यहां से जुड़ गईं।
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