{"_id":"59c2afa54f1c1bac688b5982","slug":"eyes-full-of-visas-leela","type":"story","status":"publish","title_hn":"वनवास लीला देख भर आई आंखें ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वनवास लीला देख भर आई आंखें
अमर उजाला ब्यूरो हाथरस।
Updated Wed, 20 Sep 2017 11:44 PM IST
विज्ञापन
रामलीला
- फोटो : Amar Ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मंथरा की बातों में आकर कैकेई महाराज दशरथ से भरत की राजगद्दी तथा श्री राम के लिए 14 साल का वनवास मांगती लेती हैं। बुधवार को राम, लक्ष्मण, सीता ने वनवास के दौरान नगर भ्रमण किया। शहर के कई बाजारों में पेड़ पौधों की डालियां लगाकर वन बनाए गए। नगर भ्रमण के दौरान, राम, सीता, लक्ष्मण के स्वरूपों की पूजा अर्चना हुई।
रामलीला के कलाकार दिखाते हैं कि दशरथ महल में राजकुमारी के स्वागत की खुशियां फीकी भी नहीं पड़ी थी, कि अयोध्या पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा। दासी मंथरा महारानी कैकेई के कान भर देती है। जिसके बाद कोप भवन से निकली कैकई महाराज दशरथ से दो वरदान मांगती हैं।
पहले वरदान में वह राजकुमार भरत के लिए राजगद्दी व दूसरे वरदान में राम को 14 वर्ष वनवास मांगती हैं। राम को 14 वर्ष के वनवास की बात सुनकर दशरथ विलाप कर रहे हैं, लेकिन कैकेई का दिल पत्थर बना रहता है। राम को यह पता लगता है तो वह वनवास के लिए चल पड़ते हैं। इस लीला को देखकर रामलीला देख रहे श्रद्धालुओं की आंखों से आंसू बह निकले।
विज्ञापन
वनवास की व्यवस्था में रामलीला महोत्सव समिति के अध्यक्ष डॉ. अविन शर्मा, संयोजक बौ. आशीष पचौरी, सह संयोजक बौ. पुनीतराज पचौरी, बौ. पुष्पराज पचौरी, पवन गौतम, बौ. विष्णु पचौरी, बौ. शंकर पचौरी आकाश पचौरी, रामबहादुर यादव, पूर्व सभासद बॉबी यादव, बलराम यादव, आयोग दीपक, राधेश्याम यादव, छवि रंजन द्विवेदी, शिवचरन शर्मा आदि का सहयोग रहा।
विज्ञापन
रामलीला के कलाकार दिखाते हैं कि दशरथ महल में राजकुमारी के स्वागत की खुशियां फीकी भी नहीं पड़ी थी, कि अयोध्या पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा। दासी मंथरा महारानी कैकेई के कान भर देती है। जिसके बाद कोप भवन से निकली कैकई महाराज दशरथ से दो वरदान मांगती हैं।
विज्ञापन
पहले वरदान में वह राजकुमार भरत के लिए राजगद्दी व दूसरे वरदान में राम को 14 वर्ष वनवास मांगती हैं। राम को 14 वर्ष के वनवास की बात सुनकर दशरथ विलाप कर रहे हैं, लेकिन कैकेई का दिल पत्थर बना रहता है। राम को यह पता लगता है तो वह वनवास के लिए चल पड़ते हैं। इस लीला को देखकर रामलीला देख रहे श्रद्धालुओं की आंखों से आंसू बह निकले।
विज्ञापन
वनवास की व्यवस्था में रामलीला महोत्सव समिति के अध्यक्ष डॉ. अविन शर्मा, संयोजक बौ. आशीष पचौरी, सह संयोजक बौ. पुनीतराज पचौरी, बौ. पुष्पराज पचौरी, पवन गौतम, बौ. विष्णु पचौरी, बौ. शंकर पचौरी आकाश पचौरी, रामबहादुर यादव, पूर्व सभासद बॉबी यादव, बलराम यादव, आयोग दीपक, राधेश्याम यादव, छवि रंजन द्विवेदी, शिवचरन शर्मा आदि का सहयोग रहा।