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योग्यताधारी बेरोजगार अभ्यर्थियों ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

Sun, 04 Apr 2021 01:04 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 04 Apr 2021 01:04 AM IST
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eligible unemployement youth gave memorandum to SDM
सडीएम को ज्ञापन सौंपती योग्यताधारी बेरोजगार अभ्यर्थी सीमा और नीतू शर्मा - फोटो : SADABAD
संवाद न्यूज एजेंसी, सादाबाद।
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योग्यताधारी बेरोजगार महिला अभ्यर्थियों ने शनिवार को एसडीएम राजेश कुमार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में 69000 सहायक अध्यापकों की भर्ती में 22000 रिक्तियों को जुड़वाए जाने की मांग की गई।
बेरोजगार महिला अभ्यर्थी सीमा, नीतू शर्मा ने एसडीएम को सौंपे गए ज्ञापन में कहा कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में दो भर्ती निकाली, पहली 68500 और दूसरी 69000 जब पहली भर्ती आयोजित हुई थी, तो उसमें केवल बीटीसी और शिक्षामित्र ही थे और लगभग 41000 ही लोग सरकार द्वारा जारी मानक के तहत पास हो पाए। इसके बाद अगली भर्ती 69000 में एनसीटीई ने प्राथमिक के लिए बीएड को मान्य कर दिया। जिससे रिकॉर्ड 12 लाख आवेदन हुए, लेकिन मात्र 1 लाख 46 हजार बच्चे ही जारी मानक के तहत पास हो सके।
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ज्ञापन में कहा कि सरकार ने इतनी प्रतिस्पर्धा भर्ती में सभी लोगों को तीन अंक दे दिए, जिन प्रश्नों के पर किसी का विरोध नहीं था और वह प्रश्न बहुत आसान थे, जिससे जो पहले सरकार द्वारा जारी मानक 90, 97 को पार नहीं कर पा रहा था यानि 87, 84 वाला वो भी पास हो गया और अपने एकेडमिक के बल पर मेरिट लिस्ट में सबसे आगे हो गए। जब पहली भर्ती में 26 हजार सीट खाली रह गई थी तो सरकार ने बोला था कि यहां योग्यता की कमी है, लेकिन इस बार तो सभी लोग योग्यता के पैमाने को कई बार पार कर के आए हैं।
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सुप्रीम कोर्ट ने एक लाख 37 हजार पदों को दो भर्ती में भरने का आदेश दिया था तो इन भर्ती में शेष पद अगली भर्ती में क्यों। उत्तर प्रदेश में करीब ढाई लाख पद खाली हैं तो फिर इन 22 हजार खाली पदों के अलावा भी और बहुत सारे पद सरकार के पास हैं, जिस पर सरकार नई भर्ती कर सकती है। बहुत से बीएड अभ्यर्थी का ये अंतिम मौका था, उम्र के कारण क्यों कि बीएड के लिए 2011 के बाद कोई भर्ती प्राइमरी में नहीं आई। बहुत से अभ्यर्थी जो आज से 15 साल पहले पढ़ाई कर रहे थे, उनकी एकेडमिक और आज के अभ्यर्थियों की एकेडमिक में बहुत ही असमानता है।

ऐसे में सरकार द्वारा मुफ्त के तीन अंक दे देना, एकेडमिक वालों को भर्ती से बाहर कर देना ही है। लगभग दो साल पहले मानसिक प्रताड़ना के कारण जिसमें सरकार और अभ्यर्थी कोर्ट में पासिंग मार्क्स की लड़ाई लड़ते रहे, ये अभ्यर्थी कम एकेडमिक से बाहर हो गए, जबकि जो लोग पहले फेल थे, वह तीन अंक पाकर पास हो गए और नौकरी पा गए। जब फाइनल मेरिट का मतलब एकेडमिक से ही था तो मात्र सुपर टीईटी का परीक्षा का आयोजन का क्या औचित्य रह जाता है। इस दौरान आरती शुक्ला, नितेश सिंह गौर, हिमांशु दुबे, धर्मेंद्र, अजीत वाजपेयी आदि थे।
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