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Raksha Bandhan: भाइयों की कलाई पर सजेगी गोबर से बनी ईको फ्रेंडली राखी, कीमत केवल 10 से 15 रुपये के बीच
Sat, 19 Jul 2025 01:05 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
Updated Sat, 19 Jul 2025 01:05 AM IST
सार
राखियों में परंपराओं के साथ पर्यावरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। राखियां तैयार करते समय इनमें फल, सब्जी या फूल के पौधे के लिए एक बीज भी डाला जा रहा है, ताकि प्रयोग होने के बाद इन्हें गमला या क्यारी में डाले जाने के बाद बीज की सहायता से एक पौधा भी लोगों को मिल सके।
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गोबर से तैयार की गईं ईको फ्रेंडली राखियां
- फोटो : स्वयं
विस्तार
रक्षाबंधन का त्योहार नजदीक आते ही हाथरस शहर में परंपरागत राखियों का बाजार सजने लगा है, लेकिन इस साल बाजार में परंपरागत के साथ गोबर से बनी खूबसूरत ईको फ्रेंडली राखियां भी नजर आएंगी। महिला समाजसेवी दीप्ती वार्ष्णेय अपने पति नवीन वार्ष्णेय के सहयोग से गोबर से ईको फ्रेंडली राखियां तैयार करा रही हैं।
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अच्छी बात यह है कि इन राखियों को शहर में ही तैयार किया जा रहा है। इनकी लागत भी काफी कम आ रही है। गोबर से तैयार होने के बावजूद यह राखियां बेहद खूबसूरत दिखाई दे रही हैं। दीप्ती वार्ष्णेय बताती हैं कि गोबर से तैयार कराए जाने का मतलब यह नहीं कि यह राखियां खूबसूरत नहीं हैं।
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इन्हें कई प्रकार के डिजायन में तैयार कराया जा रहा है। विशेष तौर पर इसमें बच्चों की पसंद का ध्यान रखा जा रहा है। डोरेमोन व नोबिता की आकृतियां राखियों पर तैयार की जा रही हैं। इन्हें पूरी तरह ईको फ्रेंडली बनाए जाने के लिए बकायदा पानी के रंगों का इस्तेमाल किया जा रहा है। राखियों में सूत से बने कलावों का भी प्रयोग किया जा रहा है।
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राखियों से होगा पौधरोपण
दीप्ती वार्ष्णेय बताती हैं कि राखियों में परंपराओं के साथ पर्यावरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। राखियां तैयार करते समय इनमें फल, सब्जी या फूल के पौधे के लिए एक बीज भी डाला जा रहा है, ताकि प्रयोग होने के बाद इन्हें गमला या क्यारी में डाले जाने के बाद बीज की सहायता से एक पौधा भी लोगों को मिल सके। ग्राहकों को इन राखियों की बिक्री के साथ ही इन्हें प्रयोग के बाद गमले या क्यारी में डालने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है।
मात्र 10 से 15 रुपये में उपलब्ध होंगी राखियां
दीप्ती बताती हैं कि इन राखियों को बहुत कम लागत में तैयार किया जा रहा है। पूरी तरह से हैंडमेड इन राखियों की कीमत बाजार में 10 से 15 रुपये के बीच होगी। वह बताती हैं कि उनके साथ करीब 15 अन्य महिला पुरुष इस काम में लगे हुए हैं। उन्हें अपने पति नवीन वार्ष्णेय का इस काम में भरपूर सहयोग मिल रहा है। वह अपने बैटरी व सौर ऊर्जा के कारोबार से हर रोज समय निकालकर इस काम में उनका सहयोग करतेे हैं।