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Dry Eye Syndrome: मोबाइल-लैपटॉप और टीवी स्क्रीन सूखा रही आंखों का पानी, इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
Sun, 07 Jun 2026 04:47 PM IST
Chaman Kumar Sharma
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
Published by: Chaman Kumar Sharma
Updated Sun, 07 Jun 2026 04:47 PM IST
सार
सामान्य तौर पर एक इंसान एक मिनट में 12 से 15 बार अपनी पलकें झपकाता है। पलकें झपकने से आंखों में आंसू की एक पतली परत बनी रहती है, जो आंखों को नमी और सुरक्षा देती है। जब कोई व्यक्ति लगातार मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन देखता है, तो उसकी पलकें झपकने की दर घटकर केवल 4 से 5 बार प्रति मिनट रह जाती है।
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बिना पलक झपके मोबाइल देखती बच्ची
- फोटो : अमर उजाला डिजिटल
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विस्तार
मोबाइल, लैपटॉप और टीवी का अत्यधिक इस्तेमाल अब आंखों के लिए खतरा बनता जा रहा है। घंटों लगातार स्क्रीन के सामने रहने और पलकें न झपकाने के कारण लोगों की आंखें सूख रही हैं। हाथरस जिला अस्पताल के नेत्र रोग विभाग में ड्राई आई सिंड्रोम के मामले बढ़ गए हैं। शनिवार को भी बागला जिला अस्पताल में कई मरीज आंखों में जलन, सूखापन और चुभन की शिकायत लेकर पहुंचे।
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नेत्र रोग विशेषज्ञ डाॅ. राजन सिंह ने बताया कि ओपीडी में आने वाले हर चौथे मरीज की समस्या सीधे तौर पर अत्यधिक स्क्रीन टाइम से जुड़ी हुई है। स्क्रीन की लत के कारण 15 से 35 वर्ष के युवा और छोटे बच्चे इसका शिकार हो रहे हैं। ऑनलाइन पढ़ाई, गेमिंग और सोशल मीडिया रील देखने के चक्कर में लोग घंटों स्क्रीन से चिपके रहते हैं। नेत्र रोग विभाग में रोजाना 25 से 30 ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं।
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क्या है ड्राई आई सिंड्रोम
नेत्र रोग विशेषज्ञ के अनुसार सामान्य तौर पर एक इंसान एक मिनट में 12 से 15 बार अपनी पलकें झपकाता है। पलकें झपकने से आंखों में आंसू की एक पतली परत बनी रहती है, जो आंखों को नमी और सुरक्षा देती है। जब कोई व्यक्ति लगातार मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन देखता है, तो उसकी पलकें झपकने की दर घटकर केवल 4 से 5 बार प्रति मिनट रह जाती है। लंबे समय तक ऐसा होने से आंखों के आंसू सूखने लगते हैं और आंखों में जरूरी नमी खत्म हो जाती है।
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इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
- लगातार जलन, खुजली या सूखापन महसूस होना।
- आंख के अंदर कुछ चुभने (किरकिरी होने) का अहसास।
- आंखों का अचानक लाल हो जाना और पानी आना।
- रोशनी के प्रति संवेदनशीलता (धूप या तेज रोशनी में आंखें न खुलना)।
- धुंधला दिखाई देना या आंखों में भारीपन रहना।