फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hathras News ›   Didn't rest after retirement, started Gerbera farming

Hathras News: रिटायरमेंट के बाद नहीं किया आराम, शुरु की जरबेरा की खेती, एक फूल बिकता है दस रूपए तक

Mon, 26 Jun 2023 02:15 AM IST
चमन शर्मा लकी शर्मा, अमर उजाला, हाथरस
लकी शर्मा, अमर उजाला, हाथरस Published by: चमन शर्मा Updated Mon, 26 Jun 2023 02:15 AM IST
सार

शुरू में बालकिशन चौहान ने उद्यान विभाग से मदद लेकर 6 हजार वर्गमीटर में पॉलीहाउस लगाया और खीरे और जरबेरा की खेती करना शुरू की। इस समय उनके पॉलीहाउस में जरबेरा की फसल है। उन्होंने बतााया कि इस फसल से उन्हें अच्छा लाग मिल रहा है। वह दूसरे किसानों को भी आधुनिक विधि से खेती करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। 

विज्ञापन
Didn't rest after retirement, started Gerbera farming
जरबेरा की खेती - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रिटायरमेंट के बाद लोग सिर्फ आराम करना चाहते हैं। हाथरस के एक असिस्टेंट इंजीनियर ने कुछ ऐसा करके दिखाया है, जो लोगों के लिए नजीर बन गया है। लोक निर्माण विभाग से रिटायर सहायक अभियंता ने रिटायरमेंट के बाद शहर से सटे गांव कोटा में पॉलीहाउस में जरबेरा की खेती शुरू की। इस खेती से वह मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। 

विज्ञापन


बालकिशन चौहान

एक तरफ जहां किसान परंपरागत विधि से खेती कर घाटे का सामना कर रहे हैं। दूसरी तरफ कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो आधुनिक विधि से खेती कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। यह लोग अन्य किसानों के लिए भी मिसाल बन गए हैं। ऐसा ही एक उदाहरण लोक निर्माण विभाग से रिटायर सहायक अभियंता बालकिशन चौहान ने पेश किया है। गांव कोटा कपूरा में 6 हजार वर्गमीटर में पॉलीहाउस विधि से जरबेरा के फूल की खेती कर रहे हैं। 
विज्ञापन


जरबेरा की खेती
विज्ञापन
विज्ञापन


उन्होंने बताया कि खेती के लिए उन्होंने पूना और बैंगलोर से बीज मंगवाया था। एक बार उनकी पोस्टिंग सिद्यार्थनगर में थी। इस बीच गोरखपुर में उनकी मुलाकात शिवम दत्त मिश्रा से हुई। शिवम पॉलीहाउस बनाते थे। उनसे मिलने के बाद बालकिशन ने फैसला किया कि वह भी रिटायरमेंट के बाद पॉलीहाउस विधि से खेती करेंगे। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने इस बारे में योजना बनाना शुरू कर दिया। 

शुरू में उन्होंने उद्यान विभाग से मदद लेकर 6 हजार वर्गमीटर में पॉलीहाउस लगाया और खीरे और जरबेरा की खेती करना शुरू की। इस समय उनके पॉलीहाउस में जरबेरा की फसल है। उन्होंने बतााया कि इस फसल से उन्हें अच्छा लाग मिल रहा है। वह दूसरे किसानों को भी आधुनिक विधि से खेती करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। 

शादियों व आयोजनों में सजावट में आता है काम

जरबेरा एक सजावटी फूल है। इसका इस्तेमाल शादियों व आयोजनों में सजावट के काम आता है। बालकिशन ने बताया कि उनके पॉलीहाउस का फूल आगरा, अलीगढ़ से लेकर दल्ली तक सप्लाई होता है। इसके एक फूल की कीमत दो रूपए से लेकर दस रूपए तक है। लागत 50 प्रतिशत रहती है।

6 हजार वर्गमीटर में पॉलीहाउस

विभाग से मिला 50 फीसदी अनुदान
बाल किशन ने बताया कि शुरू में उन्हें लगा कि पॉली हाउस लगाने में काफी खर्चा आएगा। इसके बाद उन्हें विभाग से चल रही योजना के बारे में पता चला। उद्यान विभाग से पॉलीहाउस से उन्हें 50 प्रतिशत का अनुदान मिला। जिससे उन्हें पॉली हाउस लगाने में काफी मदद मिली।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed