Hathras News: रिटायरमेंट के बाद नहीं किया आराम, शुरु की जरबेरा की खेती, एक फूल बिकता है दस रूपए तक
शुरू में बालकिशन चौहान ने उद्यान विभाग से मदद लेकर 6 हजार वर्गमीटर में पॉलीहाउस लगाया और खीरे और जरबेरा की खेती करना शुरू की। इस समय उनके पॉलीहाउस में जरबेरा की फसल है। उन्होंने बतााया कि इस फसल से उन्हें अच्छा लाग मिल रहा है। वह दूसरे किसानों को भी आधुनिक विधि से खेती करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
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रिटायरमेंट के बाद लोग सिर्फ आराम करना चाहते हैं। हाथरस के एक असिस्टेंट इंजीनियर ने कुछ ऐसा करके दिखाया है, जो लोगों के लिए नजीर बन गया है। लोक निर्माण विभाग से रिटायर सहायक अभियंता ने रिटायरमेंट के बाद शहर से सटे गांव कोटा में पॉलीहाउस में जरबेरा की खेती शुरू की। इस खेती से वह मोटा मुनाफा कमा रहे हैं।
एक तरफ जहां किसान परंपरागत विधि से खेती कर घाटे का सामना कर रहे हैं। दूसरी तरफ कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो आधुनिक विधि से खेती कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। यह लोग अन्य किसानों के लिए भी मिसाल बन गए हैं। ऐसा ही एक उदाहरण लोक निर्माण विभाग से रिटायर सहायक अभियंता बालकिशन चौहान ने पेश किया है। गांव कोटा कपूरा में 6 हजार वर्गमीटर में पॉलीहाउस विधि से जरबेरा के फूल की खेती कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि खेती के लिए उन्होंने पूना और बैंगलोर से बीज मंगवाया था। एक बार उनकी पोस्टिंग सिद्यार्थनगर में थी। इस बीच गोरखपुर में उनकी मुलाकात शिवम दत्त मिश्रा से हुई। शिवम पॉलीहाउस बनाते थे। उनसे मिलने के बाद बालकिशन ने फैसला किया कि वह भी रिटायरमेंट के बाद पॉलीहाउस विधि से खेती करेंगे। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने इस बारे में योजना बनाना शुरू कर दिया।
शुरू में उन्होंने उद्यान विभाग से मदद लेकर 6 हजार वर्गमीटर में पॉलीहाउस लगाया और खीरे और जरबेरा की खेती करना शुरू की। इस समय उनके पॉलीहाउस में जरबेरा की फसल है। उन्होंने बतााया कि इस फसल से उन्हें अच्छा लाग मिल रहा है। वह दूसरे किसानों को भी आधुनिक विधि से खेती करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
शादियों व आयोजनों में सजावट में आता है काम
जरबेरा एक सजावटी फूल है। इसका इस्तेमाल शादियों व आयोजनों में सजावट के काम आता है। बालकिशन ने बताया कि उनके पॉलीहाउस का फूल आगरा, अलीगढ़ से लेकर दल्ली तक सप्लाई होता है। इसके एक फूल की कीमत दो रूपए से लेकर दस रूपए तक है। लागत 50 प्रतिशत रहती है।
विभाग से मिला 50 फीसदी अनुदान
बाल किशन ने बताया कि शुरू में उन्हें लगा कि पॉली हाउस लगाने में काफी खर्चा आएगा। इसके बाद उन्हें विभाग से चल रही योजना के बारे में पता चला। उद्यान विभाग से पॉलीहाउस से उन्हें 50 प्रतिशत का अनुदान मिला। जिससे उन्हें पॉली हाउस लगाने में काफी मदद मिली।