{"_id":"5755ba5f4f1c1b181d9c5686","slug":"didar-moon-holy-ramadan-today","type":"story","status":"publish","title_hn":"चांद का दीदार, मुकद्दस रमजान आज से","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चांद का दीदार, मुकद्दस रमजान आज से
हाथरस/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 06 Jun 2016 11:55 PM IST
विज्ञापन
रमजान के लिए बाजार में खरीदारी करते लोग।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो हाथरस
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हाथरस। मुबारक चांद का दीदार होते ही सोमवार की शाम को रोजेदारों में खुशी की लहर दौड़ गई। मंगलवार (आज) से रमजान की शुरुआत हो जाएगी। चांद का दीदार होते ही रोजे रखने की तैयारी शुरू हो गई है। शहर में खरीदारी के लिए भी भीड़ उमड़ पड़ी। सेवइयां, सूतफेनी, मेवा और किराने की दुकानों पर खूब खरीदारी हुई। फलों की भी खूब बिक्री हुई।
शहर के घंटाघर, बांस मंडी, मुरसान गेट, सासनी गेट, मधुगढ़ी, नाई का नगला आदि बाजारों में ग्राहकों की काफी रौनक रही। रमजान का पाक महीना शुरू होने की खुशी हर किसी के चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी। शहर में हो रही विद्युत कटौती से भी रोजेदारों को खासी परेशानी उठानी पड़ सकती है। शहर की मुस्लिम बस्तियों और मस्जिदों के पास साफ-सफाई के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने के कारण लोगों में रोष बना हुआ है। ऑल इंडिया शेख जमीअतुल अब्बास कमेटी के सदर डॉ. रईस अहमद अब्बासी ने बताया कि रमजान में इस बार सबसे बड़ा रोजा 13वां होगा, जो 15 घंटे 38 मिनट का होगा।
इस्लाम के खास फर्ज---
1- तौहीद: अल्लाह, रसूल या नवी पर पूरी जिंदगी ऐतवार करना- उन पर अपना ईमान बनाए रखना।
2- नमाज: फजर (सुबह 4:50 बजे), जौहर (दोपहर 2 बजे), असर (शाम पौने छह बजे), मगरिफ (शाम सवा सात बजे) और ईंशा (रात सवा नौ बजे) की नमाज साथ ही साथ, जो कि कुराने पाक की तिलावत, तरावीह पढ़ना भी बहुत जरूरी है।
विज्ञापन
3- रोजा: हर मुसलमान को रोजा रखना चाहिए। अगर बीमारी या कोई मजबूरी हो तो इसका भी उपाय है।
4- जकात: अपनी कमाई का ढाई फीसदी हिस्सा बेवा, मजलूम, अनाथ और जरूरतमंद को देना। मसलन 40 रुपये में एक रुपये और इसी तरह 100 रुपये में ढाई रुपये। ईद की नमाज से पहले फितरा अदा करना हर मुसलमान का फर्ज है।
बोले अकीदतमंद
-रोजा हर बालिग पर फर्ज है। रोजा किसी हाल में भी नहीं छोड़ना चाहिए। किसी मजबूरी में अगर रह जाए तो उसको कजा रोजा रखना होगा। रोजा सब्र और ईमानदारी और इंसानियत के रास्तों को सिखाता है। हर मुसलमान को चाहिए कि झूठ, फरेब, मक्कारी और बुरे काम से बचें और गरीबों की मदद करें। डॉ. रईस अहमद अब्बासी, सदर ऑल इंडिया शेख जमीअतुल अब्बास कमेटी।
- रमजान का पाक महीना रोजे का शवाब लेकर आता है। रोजा केवल भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं है। आंख, नाक, कान और जुबान का भी रोजा है। अपने व्यवहार को संयमित रखें और किसी भी तरह के व्यसन में नहीं पडे़ं। सभी को खुशी देने वाले को अल्लाह खुशियां अदा फरमाते हैं।
- हाजी अब्दुल रहीम अब्बासी, सरपरस्त, ऑल इंडिया शेख जमीअतुल अब्बास कमेटी।
-सभी रोजेदारों को पूरे एहतियात के साथ रोजा रखना चाहिए। हरसंभव प्रयास कर इस महीने में ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए। रोेजे अल्लाह की इबादत के दिन हैं। ज्यादा से ज्यादा वक्त इबादत में गुजारें।
- नन्ने खां, लाला का नगला।
-रमजान के पाक माह का हर मुसलमान को बेसब्री से इंतजार रहता है। रमजान के लिए बाजार से सेर्वइं, खजूर, मेवा आदि की खरीदारी की है। मैं हर साल रमजान में रोजा रखता हूं। रोजे रखने से दिल को तसल्ली और सुकून मिलता है।
- चांद खां, नाई का नगला।
रमजान मुबारक---
पहला रोजा--
सुन्नी समुदाय
रोजा सहरी खत्म - सुबह 3 बजकर 43 मिनट तक।
रोजा इफ्तार - शाम 7 बजकर 15 मिनट तक।
शिया समुदाय
रोजा सहरी खत्म - सुबह 3 बजकर 33 मिनट तक।
रोजा इफ्तार - शाम 7 बजकर 25 मिनट तक।
विज्ञापन
शहर के घंटाघर, बांस मंडी, मुरसान गेट, सासनी गेट, मधुगढ़ी, नाई का नगला आदि बाजारों में ग्राहकों की काफी रौनक रही। रमजान का पाक महीना शुरू होने की खुशी हर किसी के चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी। शहर में हो रही विद्युत कटौती से भी रोजेदारों को खासी परेशानी उठानी पड़ सकती है। शहर की मुस्लिम बस्तियों और मस्जिदों के पास साफ-सफाई के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने के कारण लोगों में रोष बना हुआ है। ऑल इंडिया शेख जमीअतुल अब्बास कमेटी के सदर डॉ. रईस अहमद अब्बासी ने बताया कि रमजान में इस बार सबसे बड़ा रोजा 13वां होगा, जो 15 घंटे 38 मिनट का होगा।
विज्ञापन
इस्लाम के खास फर्ज---
1- तौहीद: अल्लाह, रसूल या नवी पर पूरी जिंदगी ऐतवार करना- उन पर अपना ईमान बनाए रखना।
2- नमाज: फजर (सुबह 4:50 बजे), जौहर (दोपहर 2 बजे), असर (शाम पौने छह बजे), मगरिफ (शाम सवा सात बजे) और ईंशा (रात सवा नौ बजे) की नमाज साथ ही साथ, जो कि कुराने पाक की तिलावत, तरावीह पढ़ना भी बहुत जरूरी है।
विज्ञापन
3- रोजा: हर मुसलमान को रोजा रखना चाहिए। अगर बीमारी या कोई मजबूरी हो तो इसका भी उपाय है।
4- जकात: अपनी कमाई का ढाई फीसदी हिस्सा बेवा, मजलूम, अनाथ और जरूरतमंद को देना। मसलन 40 रुपये में एक रुपये और इसी तरह 100 रुपये में ढाई रुपये। ईद की नमाज से पहले फितरा अदा करना हर मुसलमान का फर्ज है।
बोले अकीदतमंद
-रोजा हर बालिग पर फर्ज है। रोजा किसी हाल में भी नहीं छोड़ना चाहिए। किसी मजबूरी में अगर रह जाए तो उसको कजा रोजा रखना होगा। रोजा सब्र और ईमानदारी और इंसानियत के रास्तों को सिखाता है। हर मुसलमान को चाहिए कि झूठ, फरेब, मक्कारी और बुरे काम से बचें और गरीबों की मदद करें। डॉ. रईस अहमद अब्बासी, सदर ऑल इंडिया शेख जमीअतुल अब्बास कमेटी।
- रमजान का पाक महीना रोजे का शवाब लेकर आता है। रोजा केवल भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं है। आंख, नाक, कान और जुबान का भी रोजा है। अपने व्यवहार को संयमित रखें और किसी भी तरह के व्यसन में नहीं पडे़ं। सभी को खुशी देने वाले को अल्लाह खुशियां अदा फरमाते हैं।
- हाजी अब्दुल रहीम अब्बासी, सरपरस्त, ऑल इंडिया शेख जमीअतुल अब्बास कमेटी।
-सभी रोजेदारों को पूरे एहतियात के साथ रोजा रखना चाहिए। हरसंभव प्रयास कर इस महीने में ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए। रोेजे अल्लाह की इबादत के दिन हैं। ज्यादा से ज्यादा वक्त इबादत में गुजारें।
- नन्ने खां, लाला का नगला।
-रमजान के पाक माह का हर मुसलमान को बेसब्री से इंतजार रहता है। रमजान के लिए बाजार से सेर्वइं, खजूर, मेवा आदि की खरीदारी की है। मैं हर साल रमजान में रोजा रखता हूं। रोजे रखने से दिल को तसल्ली और सुकून मिलता है।
- चांद खां, नाई का नगला।
रमजान मुबारक---
पहला रोजा--
सुन्नी समुदाय
रोजा सहरी खत्म - सुबह 3 बजकर 43 मिनट तक।
रोजा इफ्तार - शाम 7 बजकर 15 मिनट तक।
शिया समुदाय
रोजा सहरी खत्म - सुबह 3 बजकर 33 मिनट तक।
रोजा इफ्तार - शाम 7 बजकर 25 मिनट तक।