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Hathras News: टीबी अस्पताल में जांच मशीन खराब, पांच दिन से मरीज परेशान
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मशीन खराब होने के कारण खाली पड़ी टीबी अस्पताल की पैथोलॉजी लैब। संवाद
- फोटो : Samvad
टीबी अस्पताल में पांच दिनों से खून की जांच प्रभावित है। जांच मशीन में आई तकनीकी खराबी के कारण यहां केवल सीबीसी की जांच हो रही है। टोटल प्रोटीन, लिपिड प्रोफाइल, ब्लड शुगर, एलएफटी, केएफटी, यूरिक एसिड, इलेक्ट्रोलाइट आदि जांचें नहीं हो पा रही हैं। शनिवार को कई मरीजों को निराश लौटना पड़ा। उन्हें दोबारा लाइन में लगकर पर्चा बनवाकर जिला अस्पताल में जांच करानी पड़ी। पैथोलॉजी स्टॉफ के अनुसार बीते पांच दिनों से मशीन में समस्या है।
कभी जिले की शान रहा मटरूमल धन्नालाल क्षय रोग अस्पताल इन दिनों उपेक्षा का शिकार है। स्टाफ से लेकर मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं तक किसी पर भी, शासन स्तर से ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ओपीडी का हाल बुरा है। रोजाना करीब 150 मरीज अपना उपचार कराने यहां पहुंचते हैं। उन्हें परामर्श देने के लिए सिर्फ एक चिकित्सक हैं।
चेस्ट फिजिशियन का पद सात वर्षों से खाली है। नर्स के चार पद हैं, लेकिन तैनाती एक की भी नहीं है। चिकित्सक व स्टाफ के अभाव के कारण मरीजों को केवल डे-केयर सुविधा मिलती है। गंभीर मरीजों को हायर सेंटर भेजा जाता है। अस्पताल में सीएमएस की भी तैनाती नहीं है। जिला अस्पताल के सीएमएस को अतिरिक्त प्रभार दे रखा गया है।
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टीबी मरीजों के चलते अस्पताल में पैथोलॉजी है, जहां आधुनिक मशीन उपलब्ध हैं तथा लगभग हर तरह की जांच हो जाती हैं। रोजाना औसतन 40 से 50 जांचें होती है। मरीजों का भार नहीं होने के कारण रिपोर्ट भी जल्द आती है। सीएमएस डाॅ. सूर्यप्रकाश ने बताया कि लगातार कार्यशील रहने के कारण बीच-बीच में दिक्कत आ जाती है। अब समस्या को दूर करा दिया गया है।
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कभी जिले की शान रहा मटरूमल धन्नालाल क्षय रोग अस्पताल इन दिनों उपेक्षा का शिकार है। स्टाफ से लेकर मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं तक किसी पर भी, शासन स्तर से ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ओपीडी का हाल बुरा है। रोजाना करीब 150 मरीज अपना उपचार कराने यहां पहुंचते हैं। उन्हें परामर्श देने के लिए सिर्फ एक चिकित्सक हैं।
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चेस्ट फिजिशियन का पद सात वर्षों से खाली है। नर्स के चार पद हैं, लेकिन तैनाती एक की भी नहीं है। चिकित्सक व स्टाफ के अभाव के कारण मरीजों को केवल डे-केयर सुविधा मिलती है। गंभीर मरीजों को हायर सेंटर भेजा जाता है। अस्पताल में सीएमएस की भी तैनाती नहीं है। जिला अस्पताल के सीएमएस को अतिरिक्त प्रभार दे रखा गया है।
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टीबी मरीजों के चलते अस्पताल में पैथोलॉजी है, जहां आधुनिक मशीन उपलब्ध हैं तथा लगभग हर तरह की जांच हो जाती हैं। रोजाना औसतन 40 से 50 जांचें होती है। मरीजों का भार नहीं होने के कारण रिपोर्ट भी जल्द आती है। सीएमएस डाॅ. सूर्यप्रकाश ने बताया कि लगातार कार्यशील रहने के कारण बीच-बीच में दिक्कत आ जाती है। अब समस्या को दूर करा दिया गया है।