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Hathras: जिला अस्पताल के एनआरसी में भर्ती मासूम की मौत, हंगामा, परिजन ने अस्पताल प्रशासन पर लगाया यह आरोप

Thu, 21 Dec 2023 08:02 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: चमन शर्मा Updated Thu, 21 Dec 2023 08:02 PM IST
सार

हाथरस में सात दिन पूर्व चिकित्सक ने मासूम को जिला अस्पताल रेफर कर दिया था। यहां बच्चे को एनआरसी में भर्ती किया गया था। 21 दिसंबर को बच्चे की हालत बिगड़ गई। इससे उसकी मौत हो गई। इसके बावजूद परिजन उसे उपचार के लिए एसएनसीयू लेकर गए। वहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।

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Death of an innocent child admitted in NRC of Hathras District Hospital
हाथरस जिला अस्पताल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हाथरस जिला अस्पताल के एनआरसी में भर्ती आठ माह के मासूम की 21 दिसंबर को मौत हो गई। बच्चे की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल में हंगामा करते हुए अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। बच्चा जन्मजात तालू कटने व निमोनिया से ग्रसित था।  

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आठ माह के कृष्णा पुत्र सोनू निवासी बिसावर निमोनिया से ग्रस्त था। उसका तालू कटा हुआ था। परिजन उसका उपचार सादाबाद के एक अस्पताल में करा रहे थे। करीब सात दिन पूर्व चिकित्सक ने उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया था। यहां बच्चे को एनआरसी में भर्ती किया गया था। 21 दिसंबर को बच्चे की हालत बिगड़ गई। इससे उसकी मौत हो गई। इसके बावजूद परिजन उसे उपचार के लिए एसएनसीयू लेकर गए। वहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
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जानकारी होते ही परिजनों में कोहराम मच गया। परिजन हंगामा करने लगे। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। उनका आरोप था कि कि बार-बार बुलाने पर भी चिकित्सक बच्चे को देखने नहीं आते थे। जब बच्चे की हालत ज्यादा खराब हो गई, तब जाकर चिकित्सक आए। जानकारी होने पर महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. शैली सिंह व बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अनूप एसएनसीयू पहुंच गए। उन्होंने जैसे-तैसे परिजनों को समझा-बुझाकर शांत किया। बाद में परिजन रोते बिलखते हुए शव को लेकर चले गए। 

बच्चे का जन्मजात तालू कटा हुआ था। उसको निमोनिया भी था। बच्चा एनआरसी में भर्ती था। परिजनों को कई बार उसे अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज रेफर करने के लिए भी बोला गया था। इसके बावजूद परिजन उसे लेकर अलीगढ़ नहीं गए। 21 दिसंबर को बच्चे की मौत हो गई। - डॉ. सूर्यप्रकाश, सीएमएस बागला जिला अस्पताल हाथरस। 
हमारे यहां का मामला ही नहीं है। बच्चा आठ महीने का था। एसएनसीयू में 28 दिन तक के बच्चों का ही उपचार किया जाता है। इसके बावजूद परिजन बच्चे को एसएनसीयू लेकर आए थे। यहां लाने से पूर्व ही बच्चे की मौत हो चुकी थी।- डॉ. शैली सिंह, सीएमएस जिला महिला अस्पताल हाथरस।

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