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कैलोरा की घटना से कठघरे में बैंक-एटीएम की सुरक्षा

Sat, 30 Dec 2017 12:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो हाथरस। 
अमर उजाला ब्यूरो हाथरस।  Updated Sat, 30 Dec 2017 12:11 AM IST
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Question arise on Bank-ATM security
एटीएम - फोटो : SELF
हाथरस जंक्शन क्षेत्र के गांव कैलोरा में बैंक शाखा और एटीएम में कैश लूटने की कोशिश की घटना ने एक बार फिर जिले में एटीएम की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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वारदात-दर-वारदात के बावजूद खासकर ग्रामीण अंचल में बैंक और एटीएम की सुरक्षा रामभरोसे है। बेशक एटीएम 24 घंटे चलने चाहिए, लेकिन सुरक्षा कारणों से ही ग्रामीण अंचल के एटीएम शाखाओं के साथ ही बंद कर दिए जाते हैं। इतने पर भी यह सुरक्षित नहीं हैं, इसका जीता-जागता सबूत हाल ही में कैलोरा के निकट केनरा बैंक शाखा में हुआ चोरी के दुस्साहसिक प्रयास की घटना है। इस घटना के बाद खासकर ग्रामीण अंचल की बैंक शाखाओं में चाक-चौबंद सुरक्षा इंतजामों की जरूरत महसूस की जा रही है।
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बदमाशों का हौसला देखिए कि उन्होंने कैलोरा चौराहे पर केनरा बैंक शाखा के न केवल 12 ताले चटकाए, बल्कि एटीएम मशीन भी तोड़ डाली। यह बात अलग है कि बदमाश अपने इरादे में पूरी तरह सफल नहीं हो सके। इससे पूर्व भी ग्रामीण अंचल की बैंक शाखाओं में इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन लगता है कि इन घटनाओं से सबक नहीं लिया गया। तभी तो यहां बैंक शाखाओं और एटीएम की सुरक्षा रामभरोसे पर छोड़ रखी है। शहरी क्षेत्र की तरह यहां एटीएम पर सुरक्षा गार्ड की तैनाती नहीं है। शाखा के साथ ही एटीएम भी सुरक्षा कारणों से बंद कर दिए जाते हैं, जिससे    रात के वक्त आकस्मिक जरूरत     के लिए इनसे पैसों की निकासी नहीं हो पाती। 
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सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करने की बजाय एटीएम जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं का इस्तेमाल कम करने पर जोर दिया जा रहा है। अफसोस की बात तो यह है कि कैलोरा में चोरों की शिकार बनी इस बैंक शाखा ही नहीं, बल्कि ज्यादातर शाखाओं में अलार्म, हूटर और सीसीटीवी कैमरे जैसे सुरक्षा उपकरण खराब पड़े हैं। इसी सुरक्षा चूक का पूरा फायदा हमेशा से चोर-बदमाश उठाते रहे हैं। यदि वक्त रहते इन कमियों को      दूर नहीं किया गया तो ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोक पाना आसान    नहीं होगा। 


हालांकि समय-समय पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी बैंकों के सुरक्षा इंतजामों को लेकर बैंक प्रबंधकों के साथ बैठकें करते रहते हैं और उन्हें सुरक्षा इंतजाम चाक-चौबंद रखने के लिए निर्देशित करते रहे हैं, लेकिन शायद बैंक अफसर इन निर्देशों को गंभीरता से नहीं लेते। तभी तो सुरक्षा इंतजामों में चोर-बदमाशों की सहूलियत के लिए ढिलाई बरती जाती है। 
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